BHARTIYA SAHITYA

भारतीय साहित्य

Last Updated on August 30th, 2020 by Bhupendra Singh

इस पेज पर आप सामान्य ज्ञान विषय के महत्वपूर्ण अध्याय भारतीय साहित्य की सम्पूर्ण जानकारी पढ़ेंगे जो सभी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।

पिछले पेज पर हमने सामान्य ज्ञान विषय के महत्वपूर्ण अध्याय भारतीय कला तथा संस्कृति की जानकारी शेयर की है उसे जरूर पढ़े।

चलिए नीचे भारतीय साहित्य की जानकारी को पढ़कर समझते है।

भारतीय साहित्य

भारतीय साहित्य का इतिहास देखा जाये तो इसकी शुरुआत प्रागैतिहासिक काल से मानी जाती है।

उस समय भारतीय साहित्य के लिखित प्रमाण नहीं मिले हैं परन्तु फिर भी टेराकोटा व शिलालेख व चित्रकारी से उस समय के बारे में जानकारी मिलती है।

भारत मे वेदो को प्रमाणित लेख माना जाता है भारत के साहित्य के बारे में जरुरी जो विषय हैं उसकी जानकारी शुरु करते हैं।

पुराण :

पुराण का शाब्दिक अर्थ पुराना है यानि जो अभिलेख हिन्दू देवी-देवताओं के बारे में जानकारी देते हैं

इनको भी अलग-अलग भारतीय भाषाओं में लिखा गया है और इनमें सृष्टि, लय, प्राचीन ऋषियों, मुनियों व राजाओ के वृत्तात्त मिलते हैं।

पुराणों की संंख्या कुल 18 हैं तथा अलग-अलग पुराणों में देवी-देवताओं के लिए पाप व पुण्य, धर्म और अधर्म, कर्म व अकर्म की गाथाएँ कही गई हैं। 

पुराणों की रचना अधिकतर संस्कृत भाषा में हुई है तथा कुछ पुराण अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में लिखे गये हैं यह भारतीय साहित्य के सबसे पुराने प्रमाणों में से एक हैं।

भारतीय मानस में पुराणों के माध्यम से भक्ति धारा प्रभावित हुई है।

पुराण मुख्यतः विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण, वायु पुराण में  राजाओ की कहानी का वर्णन है जिसमें राजा मनु का वृत्तात्त प्रमुख माना जाता है। 

प्राकृत साहित्य :

प्राकृत साहित्य  मध्ययुगीन साहित्य में विशाल मात्रा में उपलब्ध है जिसमें सबसे प्राचीन साहित्य अर्धमागधी है उसमें जैन धर्म के बारे में बहुत ज्यादा जानकारियां मिलती हैं इसमें जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी के बारे में उनके जन्म, शिक्षा, दीक्षा आदि के बारे में विस्तृत उल्लेख है। 

मलयालम साहित्य :

मलयालम साहित्य की लगभग 1000 वर्ष पुराना माना गया है। मलयालम भाषा संस्कृत से उत्पन्न भाषा नहीं है वह तेलगु, कन्नड़ आदि भाषाओ की तरह द्रविड़ संस्कृति से प्रेषित एक भाषा का हिस्सा है।

लेकिन यह विषय अभी भी विवाद का विषय के की इसका तमिल भाषा से सीधा सम्बध है या नहीं, क्योकिं तमिल को संस्कृत से जाेड़ा जाता है। लेकिन  फिर भी तमिल व मलयालम को माँ -बेटी के रिश्ते से सम्मान दिया जाता रहा है क्योंकि यह रिशता इसलिए भी तार्किक है क्योंकि मलयालम का साहित्य जब शुरु हाे रहा था जब तक तमिल का साहित्यक विकास काफी फल फूल चुका था।

सन् 3000 ई0पू0 से लेकर 100 ई0पू0 तक प्राचीन तमिल अपने स्थानीय रुप में थी।

ईसा पूर्व पहली सदी से इस पर संस्कृत भाषा का प्रभाव आरम्भ हुआ। इसके बाद तीसरी सदी से पन्द्रहवी सदी तक मलयालम का विकास हुआ है। 

रामायण :

रामायण  मर्हषि वाल्मिक द्वारा रचित महाकाव्य  है। जिसकी रचना श्रीराम भगवान के जीवन पर आधारित है। जिसमें  24000 श्लोक हैं। इसमें रामायण के सात अलग- अलग अध्याय हैं जो जिन्हें रामायाण के काण्ड भी कहते हैं। 

महाभारत :

यह वेद व्यास द्वारा रचित दुनिया का सबसे बड़ा महाकाव्य है। यह हिन्दुओं का प्रमुख धर्म ग्रंन्थ है। इसका दूसरा नाम जयसंहिता भी कहा जाता है इसमें एक विराट युध्द के जरिये धर्म की विजय का वृत्तात है।

यह कृति प्राचीन भारत के इतिहास की एक गाथा है। इसमें लगभग 1,10,000 श्लोक हैं जो विश्व के किसी महाकाव्य कहीं ज्यादा है। साथ ही देवकी पुत्र भगवान श्रीकृष्ण द्वारा भागवत गीता के सुगम सूक्त भी हैं जिन पर चल कर मनुष्य अपने जीवन में कल्याणकारी कार्य कर सकता है।

यह महाकाव्य साहित्य इसी के साथ न्याय, शिक्षा, चिकित्सा, ज्योतिष, युद्धनीति,अर्थशास्त्र , शिल्पशास्त्र, योगशास्त्र, वास्तुशास्त्र, कामशास्त्र, खगोलविद्या तथा धर्मशास्त्र का भी विस्तार से वर्णन किया गया है।  

अर्थशास्त्र :

अर्थशास्त्र चाणक्य द्वारा रचित एक राजनैतिक तथ्यो पर आधारित पुस्तक है जिसमें मौर्यकालीन समय के समाज के बारे में विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है तथा  शिष्ट  समाज की  अवधारणा की गई है।

अर्थशास्त्र में एक सभ्य समाज की स्थापना के लिए नियमों को बताया गया है जैसा कि हम सबको विदित है उनको विष्णुगुप्त तथा कौटिल्य के नाम से भी जाना गया है। 

हिन्दी साहित्य

हिन्दी विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषायो में से एक है तथा वर्तमान समय में इसकी माँग विश्व में पिछले कुछ वर्षों में और भी ज्यादा बढी है।

इस भाषा की जननी संस्कृत भाषा है तथा हिन्दी भाषा के विकास में ब्रजभषा, अवधी, मैथिली, आदि भाषाओं का योगदान है।

हिन्दी गद्य.व पद्य में पहले पद्य का विकास हुआ फिर बाद में गद्य भी का भी विकास हुआ।

हिन्दी साहित्य इतिहास पहली रचना देवकीनन्दन खत्री द्वारा लिखा गया उपन्यास चंन्द्रकाता को माना जाता है।

वेद

वेद सबसे पुराने पवित्र साहित्य है जो हिन्दुओं के प्राचीनतम और आधारभूत धर्मग्रन्थ है।

बिना वेदो के आप भारतीय संस्कृति की कल्पना कर ही नहीं सकते।

हिन्दु माlन्यता के अनुसार वेद ईश्वर की वाणी से निकले हुए शब्द है।

वेदो की ऋचाएं व मंत्र आज भी बड़ी श्रद्दा व भक्ति के साथ आज भी सम्रण किये जाते हैँ।

वेदो के कुल संख्या चार है जिसमें –ऋग्वेद, सामवेद, युर्वेवेद, अर्थववेद है।

1. ऋग्वेद :

 सबसे प्राचीन वेद है इसकी रचना  स्वयं ब्रह्मा ने की है। जय सनातन धर्म के लिए सबसे आरंभिक स्रोत है इसमें 10 मंडल है तथा सभी मंडल अलग-अलग देवता के लिए समर्पित है।

इसका निर्माण रिग वैदिक काल में हुआ था इसलिए  ऋग्वेद कहते हैं। इसमें 1028 रिचा हैं।

प्रचलित गायत्री मंत्र ऋग्वेद से ही लिया गया है जो कि  देवी  सविता को समर्पित है।

ऐसी मान्यता है कि जरूरत का श्रवण करने से ज्ञान प्राप्ति तो होती ही है साथ ही दीर्घायु  प्राप्त होती है और कष्ट मिट जाते हैं।

श्री सूक्त लक्ष्मी सूक्त  विवाह आदि के सूक्त इसमें वर्णित है।

2. सामवेद :

इसकी रचना उत्तर वैदिक काल में की गई है इसमें उस समय की घटनाओं के बारे में बताया गया है सामवेद पद में विद्यमान हैं तथा इसमें देवी देवताओं की गायन की विधियां दी गई है।

जब भी किसी देवता को यज्ञ में बुलाया जाता था तो उसे पढ़कर गाया जाता था और इसको बात चले वाला जो पंडित होता था उसे उद्गाता कहा जाता था। 

3. युर्जववेद :

यजुर्वेद का स्थान वेदों में सर्वोपरि है यह ऐसा वेद है जिसको गद्य-पद्य दोनों में रचित वेद है

यजुर्वेद की भी रचना उत्तर वैदिक काल में हुई है जिसका समय 1000 ई0पू0 से 600 ई0पू0 माना गया है यजुर्वेद की आरधना करने वाले ब्राह्मण को अर्ध्वयु कहा जाता है।

इसके पद्य भाग को कृष्ण यर्जुवेद तथा इसके गद्द भाग को शुक्ल यर्जुवेद कहा जाता है। 

4. अर्थववेद :

यह चौथा व महत्वपूर्ण वेद हैं इसमें अंधविशवास व जादू टोने के बारे में तथा विशेष रोगो की औषधियों के बारे में जानकारी मिलती है

इसकी रचना भी उत्तर वैदिक काल में हुआ था। इसी वजह से सामवेद- यजुर्वेद – अर्थववेद  तीनों को वेदोत्रिय कहा जाता है।

संस्कृत साहित्य

यह भारत की सबसे प्राचीन लिपि है। यह भारत एक ऐसी भाषा है जिसकी जानकारी किसी न किसी रुप में भारत के प्रत्येक कोने में दी जाती रही है या इसका अध्ययन प्रत्येक राज्य के लोग करते रहे हैं।

भारतीय संस्कृति और विचारधारा का माध्यम होकर भी यह भाषा अनेक दष्टियों से धर्मनिरपेक्ष रही है।

इस भाषा में धार्मिक, साहित्यिक, आध्यात्मिक, दार्शनिक, व वैज्ञानिक समस्त प्रकार की रचना हुई है।

मगही साहित्य

मगही साहित्य से तात्पर्य उस लिखित साहित्य से है जो पाली मागधी, प्राकृत मागधी, अपभ्रंश मागधी अथवा आधुनिक मगही भाषा में लिखी गयी है।

महावीर व गौतम बुध्द के समय मागधी प्रमुख भाषा थी। तथा उस समय के व्यक्तियों का वार्तालाप भी इसी भाषा में हुआ करता था।

अशोक के शिलालेखो में वर्णित भाषा भी प्राकृत के साथ यही है जैन, बौद्ध के ज्यादातर प्राचीन ग्रन्थ साहित्य इस लिपिब्धद है।

पंचतन्त्र

पंचतन्त्र विष्णु शर्मा द्वारा रचित विश्व की सबसे प्रचलित पुस्तक है जिसमें उच्च शिक्षा, सीख तथा नैतिक बुध्दि का बौध होता है।

दुनिया में यह पुस्तक पहला स्थान रखने वाली पुस्तक कहे तो यह गलत न होगा। इसकी रचना करीब 2000 वर्ष पूर्व राजा अमरशक्ति के कहने पर हुई क्योंकि राजा अमरशक्ति के बेटे मुर्ख व अंहकारी थे इस वजह से उनको ज्ञान व नीति के मार्ग पर लाने के लिए इस पुस्तक की रचना की गई।

आज भी यह पुस्तक वही कार्य कर रही है जिससे बच्चो व अन्य व्यक्तियों को काफी फायदा हुआ है।

उर्दू साहित्य

आधुनिक उर्दू जिसको हम आज एक अलग रुप में देखते हैं इससे इस समय भारत में उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के कुछ हिस्से के साथ देश कुछ हिस्से सम्मलित है।

जिसका आधार उस प्राकृत और अपभ्रंश पर था। जिसे शौरसेनी कहते थे और जिससे खड़ी बोली, ब्रजभाषा, हरियाणी और पंजाब आदि ने जन्म लिया था।

मुसलमानों का राज्य और शासन स्थापित हो जाने के बाद उनकी सस्कृंति में इसी सब में ढल गई तथा उन्होने अपने धर्म, नीति, रहन- सहन, आचार-विचार व रंग उस भाषा में झलकने लगे। इस प्रकार उसके विकास में कुछ ऐसी प्रवृत्तियाँ सम्मलित हो गई।

गुजराती साहित्य

भारतीय संस्कृति में गुजराती साहित्य की भी प्रमुख भूमिका है

गुजराती भाषा का क्षेत्र गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ के अतिरिक्त महाराष्ट्र का सीमावर्ती प्रदेश तथा राजस्थान का सीमावर्ती क्षेत्र है।

यहाँ की प्रमुख बोलीयाँ  गुजराती, सौराष्ट्र, कच्छ, मारवाडी हैं। इसमें गुर्जर अपभ्रंश भी शामिल है। राजस्थानी भाषा का भी इससे घनिष्ठ संबध है।

तेलगू साहित्य

तेलगू साहित्य की काफी प्राचीन साहित्य है इसकी शुरुआत करीब 2000 वर्ष पुराना माना जाता है। इसमें काव्य उपन्यास, नाटक, लघुकथाए आदि शामिल है।

जरुर पढ़े :

इस पेज पर आपने भारतीय साहित्य की सम्पूर्ण जानकारी को पढ़कर समझा है जो सभी परीक्षा की दृष्टि से जरूरी हैं इस टॉपिक से परीक्षा में प्रश्न पूछ लिए जाते हैं।

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