हिन्दी भाषा का विकास

हिंदी भाषा का विकास

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‘हिन्दी’ वास्तव में फारसी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है हिन्दी का या हिंद से संबंधित।

हिन्दी शब्द की निष्पत्ति सिन्धु-सिंध शब्द से हुई है ईरानी भाषा में ‘स’ का उच्चारण ‘ह’ से किया जाता था।

इस प्रकार हिन्दी शब्द वास्तव में सिन्धु शब्द का प्रतिरूप है कालांतर में हिन्द शब्द संपूर्ण भारत का पर्याय बनकर उभरा इसी ‘हिन्द’ से हिन्दी शब्द बना।

हिन्दी भाषा का विकास

हिन्दी भाषा का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना गया है। सामान्यतः प्राकृत की अन्तिम अपभ्रंश अवस्था से ही हिन्दी साहित्य का आविर्भाव स्वीकार किया जाता है।

उस समय अपभ्रंश के कई रूप थे और उनमें सातवीं-आठवीं शताब्दी से ही ‘पद्य’ रचना प्रारम्भ हो गयी थी।

हिन्दी भाषा व साहित्य के जानकार अपभ्रंश की अंतिम अवस्था ‘अवहट्ट’ से हिन्दी का उद्भव स्वीकार करते हैं। चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ ने इसी अवहट्ट को ‘पुरानी हिन्दी’ नाम दिया।

वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार, लगभग 25.79 करोड़ भारतीय हिंदी भाषा का उपयोग मातृ भाषा के रूप में करते हैं।

जबकि लगभग 42.20 करोड़ लोग इसकी 50 से अधिक बोलियों में से एक का इस्तेमाल करते हैं हिंदी भारतीय गणराज की राजकीय और मध्य भारतीय की आर्य भाषा है।

वर्ष 998 के पूर्व, मातृभाषियों की संख्या की दृष्टि से विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं के जो आँकड़े मिलते थे, उनमें हिन्दी को तीसरा स्थान दिया जाता था।

वर्गीकरण

  • हिंदी भाषा विश्व की लगभग 3,000 भाषाओं में से एक हैं।
  • आकृति एवं रूप के आधार पर हिंदी वियोगात्मक या विश्लिष्ट भाषा है।
  • भाषा-परिवार के आधार पर हिंदी भारोपीय परिवार की भाषा है।
  • भारत में 4 भाषा-परिवार भारोपीय, द्रविड़, आस्ट्रिक व चीनी-तिब्बती मिलते हैं।
  • भारत में बोलने वालों के प्रतिशत के आधार पर भारोपीय परिवार सबसे बड़ा भाषा परिवार है।
  • हिंदी भारोपीय/भारत यूरोपीय के भारतीय-ईरानी शाखा के भारतीय आर्य उपशाखा से विकसित एक भाषा है।
  • भारतीय आर्यभाषा को तीन कालों में विभक्त किया जाता है।

भारत में 4 भाषा-परिवार

भाषा-परिवारभारत में बोलने वालों का %
भारोपीय73%
द्रविड़25%
आस्ट्रिक1.30%
चीनी–तिब्बती0.70%

भारतीय आर्यभाषा के तीन काल

नामप्रयोग कालउदाहरण
प्राचीन भारतीय आर्यभाषा1500 ई0 पू0 – 500 ई0 पू0वैदिक संस्कृत व लौकिक संस्कृत
मध्यकालीन भारतीय आर्यभाषा500 ई0 पू0 – 1000 ई0 पालि, प्राकृत, अपभ्रंश
आधुनिक भारतीय आर्यभाषा1000 ई0 – अब तकहिन्दी और हिन्दीतर भाषाएँ – बांग्ला, उड़िया, मराठी,
सिंधी, असमिया, गुजराती, पंजाबी आदि।

1. प्राचीन भारतीय आर्यभाषा

नामप्रयोग कालअन्य नाम
वैदिक संस्कृत1500 ई0 पू0 – 1000 ई0 पू0छान्दस् (यास्क, पाणिनि)
लौकिक संस्कृत1000 ई0 पू0 – 500 ई0 पू0संस्कृत भाषा (पाणिनि)

2. मध्यकालीन भारतीय आर्यभाषा

नामप्रयोग कालविशेष टिप्पणी
प्रथम प्राकृत काल– पालि500 ई0 पू0 – 1 ई0 भारत की प्रथम देश भाषा, भगवान बुद्ध के सारे उपदेश पालि में ही हैं।
द्वितीय प्राकृत काल– प्राकृत1 ई0 – 500 ई0 भगवान महावीर के सारे उपदेश प्राकृत में ही हैं।
तृतीय प्राकृत काल– अपभ्रंश अवहट्ट500 ई0 – 1000 ई0 900 ई0 – 1100 ई0 संक्रमणकालीन/संक्रान्तिकालीन भाषा

3. आधुनिक भारतीय आर्यभाषा (हिन्दी)

नामप्रयोग काल
प्राचीन हिन्दी1100 ई0 – 1400 ई0
मध्यकालीन हिन्दी1400 ई0 – 1850 ई0
आधुनिक हिन्दी1850 ई0 – अब तक

हिंदी की आदि जननी संस्कृत है। संस्कृत पालि, प्राकृत भाषा से होती हुई अपभ्रंश तक पहुँचती है। फिर अपभ्रंश, अवहट्ट से गुजरती हुई प्राचीन/प्रारम्भिक हिंदी का रूप लेती है। विशुद्धतः, हिंदी भाषा के इतिहास का आरम्भ अपभ्रंश से माना जाता है।

हिंदी का विकास क्रम :- संस्कृत → पालि → प्राकृत → अपभ्रंश → अवहट्ट → प्राचीन / प्रारम्भिक हिंदी

अपभ्रंश

  • अपभ्रंश भाषा का विकास 500 ई. से लेकर 1000 ई. के मध्य हुआ
  • इसमें साहित्य का आरम्भ 8वीं सदी ई. (स्वयंभू कवि) से हुआ, जो 13वीं सदी तक जारी रहा।
  • अपभ्रंश (अप+भ्रंश+घञ्) शब्द का यों तो शाब्दिक अर्थ है
  • ‘पतन’, किन्तु अपभ्रंश साहित्य से अभीष्ट है।
  • प्राकृत भाषा से विकसित भाषा विशेष का साहित्य।

प्रमुख रचनाकार :- स्वयंभू अपभ्रंश का वाल्मीकि (पउम चरिउ अर्थात् राम काव्य), धनपाल (‘भविस्सयत कहा’–अपभ्रंश का पहला प्रबन्ध काव्य), पुष्पदंत (महापुराण, जसहर चरिउ), सरहपा, कण्हपा आदि सिद्धों की रचनाएँ (चरिया पद, दोहाकोशी) आदि।

अपभ्रंश से आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं का विकास

अपभ्रंश के भेदआधुनिक भारतीय आर्यभाषा
शौरसेनीपश्चिमी हिंदी, राजस्थानी, गुजराती
अर्द्ध मागधीपूर्वी हिंदी
मागधीबिहारी, उड़िया, बांग्ला, असमिया
खसपहाड़ी (शौरसेनी से प्रभावित)
ब्राचड़पंजाबी (शौरसेनी से प्रभावित) सिंधी
महाराष्ट्रीमराठी

अवहट्ट

  • अवहट्ट ‘अपभ्रंष्ट’ शब्द का विकृत रूप है।
  • इसे ‘अपभ्रंश का अपभ्रंश’ या ‘परवर्ती अपभ्रंश’ कह सकते हैं।
  • अवहट्ट अपभ्रंश और आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं के बीच की संक्रमणकालीन/संक्रांतिकालीन भाषा है।
  • इसका कालखंड 900 ई. से 1100 ई. तक निर्धारित किया जाता है।
  • साहित्य में इसका प्रयोग 14वीं सदी तक होता रहा है।
  • अब्दुर रहमान, दामोदर पंडित, ज्योतिरीश्वर ठाकुर, विद्यापति आदि रचनाकारों ने अपनी भाषा को ‘अवहट्ट’ या ‘अवहट्ठ’ कहा है।
  • विद्यापति प्राकृत की तुलना में अपनी भाषा को मधुरतर बताते हैं।
  • देश की भाषा सब लोगों के लिए मीठी है।
  • इसे अवहट्ठा कहा जाता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. हिंदी किस भाषा परिवार की भाषा हैं?
A. भारोपीय
B. द्रविड़
C. ऑस्ट्रिक
D. चीनी-तिब्बती

Ans. भारोपीय

2. भारत में सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषा कौन-सी हैं?
A. हिंदी
B. संस्कृत
C. तमिल
D. उर्दू

Ans. हिंदी

3. हिंदी भाषा का जन्म हुआ हैं?
A. अपभ्रश से
B. लौकिक संस्कृत से
C. पालि प्राकृत से
D. वैदिक संस्कृत से

Ans. अपभ्रश से

4. निम्लिखित में से कौन-सी बोली अथवा भाषा हिंदी के अर्न्तगत नहीं आती हैं?
A. कन्नौज
B. बागरू
C. अवधी
D. तेलुगू

Ans. तेलुगू

5. हिंदी की विशिष्य बोली ब्रजभाषा किस रूप में सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं?
A. राजभाषा
B. तकनीकी भाषा
C. राष्ट्रभाषा
D. काव्यभाषा

Ans. काव्यभाषा

6. भारतवर्ष में हिंदी को आप किस वर्ग में रखेंगे?
A. राजभाषा
B. राष्ट्रभाषा
C. विभाषा
D. तकनीकी भाषा

Ans. राजभाषा

7. ढूंढाड़ी बोली हैं?
A. पश्चिमी राजस्थान की
B. पूर्वी राजस्थान की
C. दक्षिणी राजस्थान की
D. उत्तरी राजस्थान की

Ans. पूर्वी राजस्थान की

8. ब्रजबुलि नाम से जानी जाती हैं?
A. पंजाबी
B. मराठी
C. गुजराती
D. पुरानी बांग्ला

Ans. पुरानी बांग्ला

9. निम्लिखित में से कौन-सी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं?
A. गुजराती
B. उड़िया
C. मराठी
D. सिंधी

Ans. मराठी

10. एक मनई के दुई बेटवे रहिन। ओह माँ लहुरा अपने बाप से कहिल-दादा धन माँ जवन हमर बखरा लागत होय लवन हमका दै द। यह अवतरण हिंदी की किस बोली में हैं।
A. भोजपुरी
B. कन्नौजी
C. अवधि
D. खड़ी बोली

Ans. अवधि

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Conclusion :

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