हिंदी मुहावरे

Hindi Muhavare | हिंदी मुहावरे समस्त प्रकार के पढ़े (Idioms)

Hindi Muhavare | हिंदी मुहावरे समस्त प्रकार के पढ़े (Idioms)
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कोई भी परीक्षा हो चाहे, स्कूल या गवर्मेन्ट जॉब की उसमें दो या तीन मुहावरे जरूर ही पूछ लिए जाते हैं जो सबको करना अनिवार्य होते हैं। किसी छात्रों को उनका अर्थ पता नही होता हैं तो किसी को वाक्य में प्रयोग करते नहीं बनता हैं।

इसके अतिरिक्त अपनी दैनिक जीवन में मुहावरे का उपयोग करके अपनी भाषा शैली को एक उच्च स्तर पर ले जाया जा सकता है

इसलिए हमने हिंदी वर्ण माला के 52 अक्षर से सम्बंधित सम्पूर्ण मुहावरे  के अर्थ और वाक्य में प्रयोगो को नीचे हिंदी वर्णमाला के क्रमानुसार लिखा है

पिछली पोस्ट में हम हिंदी व्याकरण के महतवपूर्ण अध्याय पर्यायवाची शब्दों की जानकारी विस्तार पूर्वक दे चुके है यदि अपने वह नहीं पढ़ी है तो जरूर पढ़े

नमस्कार छात्रों,HTIPS के इस पेज पर हम हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण अध्याय मुहावरे को विस्तार पूर्वक पड़ेेंगे और समझेंगे जो कि समस्त कक्षाओं की परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।

तो चलिए मुहावरे की समान्य जानकारी से शुरू करते है

मुहावरे (Idioms) की परिभाषा

मुहावरा अरबी भाषा का शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है अभ्यास करना हिंदी मे ऐसे वाक्यांश को मुहावरा कहा जाता हैं जो अपने साधारण अर्थ को छोड़ कर विशेष अर्थ को व्यक्त करते है।

मुहावरा किसी भाषा विशेष में प्रचलित उस अभिव्यक्तिक इकाई को कहते हैं जिसका प्रयोग प्रत्यक्षार्थ से अलग रूढ़ लक्ष्यार्थ के लिए किया जाता है।

वाक्य प्रयोग करने के सामान्य नियम निम्न लिखित हैं।

  1. सर्वप्रथम मुहावरे का अर्थ जानना आवश्यक होता है।
  2. इसके बाद एक सार्थक वाक्य का निर्माण करेंगे।
  3. वाक्य इस प्रकार होना चाहिये जो मुहावरे के अर्थ को व्यक्त करता हो।
  4. वाक्य प्रयोग मे मुहावरे का अर्थ नही लिखा जाता बल्कि मुहावरे को ही वाक्य प्रयोग में लिखा जाता है।

उदाहरण के रुप में यदि हम ‘नौ दो ग्यारह होना ‘मुहावरे का वाक्य प्रयोग करेंगे तो सबसे पहले उसके अर्थ पर ध्यान देंगे।

इस मुहावरे का अर्थ है – भाग जाना

वाक्य प्रयोग इस प्रकार करेंगे कि भाग जाना अर्थ न लिख कर नौ दो ग्यारह लिखेंगे।

जैसे:- पुलिस को देख कर चोर नौ दो ग्यारह हो गये।

जरूर देखे- हिंदी व्याकरण

नीचे कुछ महत्वपूर्ण मुहावरे और उनके अर्थ और वाक्य में प्रयोग सहित दिए गए है।

अ – से मुहावरे 

1. अक्ल पर पत्थर पड़ना – बुद्धि भष्ट होना

प्रयोग – विद्वान और वीर होकर भी रावण की अक्ल पर पत्थर ही पड़ गया था कि उसने राम की पत्नी का अपहरण किया।

2. अंक भरना – स्नेह से लिपटा लेना

प्रयोग – माँ ने देखते ही बेटी को अंक भर लिया।

3. अंग टूटना – थकान का दर्द

प्रयोग – इतना काम करना पड़ा कि आज अंग टूट रहे है।

4. अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना – स्वयं अपनी प्रशंसा करना

प्रयोग – अच्छे आदमियों को अपने मुहँ मियाँ मिट्ठू बनना शोभा नहीं देता।

5. अक्ल चरने जाना – समझ का अभाव होना

प्रयोग – इतना सी बीत भी समझ नहीं सके क्या अक्ल चरने गई है।

6. अपने पैरों पर खड़ा होना – स्वालंबी होना

प्रयोग – युवकों को अपने पैरों पर खड़े होने पर ही विवाह करना चाहिए।

7. अक्ल का दुश्मन – मूर्ख

प्रयोग – राम तुम मेरी बात क्यों नहीं मानते, लगता है आजकल तुम अक्ल के दुश्मन हो गए हो।

8. अपना उल्लू सीधा करना – मतलब निकालना

प्रयोग – आजकल के नेता अपना उल्लू सीधा करने के लिए ही लोगों को भड़काते है।

9. अंगारों पर लेटना – दुःख सहना

प्रयोग – वह उसकी तरक्की देखते ही अंगारों पर लोटने लगा। मैं जीवन भर अंगारों पर लोटता रहा हूँ।

10. अँगूठा दिखाना – समय पर धोखा देना

प्रयोग – अपना काम तो निकाल लिया, पर जब मुझे जरूरत पड़ी, तब अँगूठा दिखा दिया। भला, यह भी कोई मित्र का लक्षण है।

11. अँचरा पसारना – माँगना, याचना करना

प्रयोग – हे देवी मैया, अपने बीमार बेटे के लिए आपके आगे अँचरा पसारती हूँ। उसे भला-चंगा कर दो, माँ।

12. अण्टी मारना – चाल चलना

प्रयोग – ऐसी अण्टीमारो कि बच्चू चारों खाने चित गिरें।

13. अण्ड-बण्ड कहना – भला-बुरा या अण्ट- सण्ट कहना

प्रयोग – क्या अण्ड-बण्ड कहे जा रहे हो। वह सुन लेगा, तो कचूमर ही निकाल छोड़ेगा।

14. अन्धाधुन्ध लुटाना – बिना विचारे व्यय

प्रयोग – अपनी कमाई भी कोई अन्धाधुन्ध लुटाता है।

15. अन्धा बनना – आगे-पीछे कुछ न देखना

प्रयोग – धर्म से प्रेम करो, पर उसके पीछे अन्धा बनने से तो दुनिया नहीं चलती।

16. अन्धा बनाना – धोखा देना

प्रयोग – मायामृग ने रामजी तक को अन्धा बनाया था। इस माया के पीछे मौजीलाल अन्धे बने तो क्या।

17. अन्धा होना – विवेकभ्रष्ट होना

प्रयोग – अन्धे हो गये हो क्या, जवान बेटे के सामने यह क्या जो-सो बके जा रहे हो

18. अन्धे की लकड़ी – एक ही सहारा

प्रयोग – भाई, अब तो यही एक बेटा बचा, जो मुझे अन्धे की लकड़ी है। इसे परदेश न जाने दूँगा।

19. अन्धेरखाता – अन्याय

प्रयोग – मुँहमाँगा दो, फिर भी चीज खराब। यह कैसा अन्धेरखाता है।

20. अन्धेर नगरी  – जहाँ धांधली का बोलबाला हो

प्रयोग – इकत्री का सिक्का था, तो चाय इकत्री में मिलती थी, दस पैसे का निकला, तो दस पैसे में मिलने लगी। यह बाजार नहीं, अन्धेरनगरी ही है।

21. अकेला दम – अकेला

प्रयोग – मेरा क्या अकेला दम हूँ जिधर सींग समायेगा चल दूँगा।

22. अक्ल की दुम – अपने को बड़ा होशियार लगानेवाला

प्रयोग – दस तक का पहाड़ा भी तो आता नहीं, मगर अक्ल की दुम साइन्स का पण्डित बनता है।

23. अगले जमाने का आदमी – सीधा-सादा, ईमानदार

प्रयोग – आज की दुनिया ऐसी हो गई कि अगले जमाने का आदमी बुद्धू समझा जाता है।

24. अढाई दिन की हुकूमत – कुछ दिनों की शानोशौकत

प्रयोग – जनाब, जरा होशियारी से काम लें। यह अढाई दिन की हुकूमत जाती रहेगी।

25. अत्र-जल उठना – रहने का संयोग न होना, मरना

प्रयोग – मालूम होता है कि तुम्हारा यहाँ से अत्र-जल उठ गया है, जो सबसे बिगाड़ किये रहते हो।

26. अत्र-जल करना – जलपान, नाराजगी आदि के कारण निराहार के बाद आहार-ग्रहण

प्रयोग – भाई, बहुत दिनों पर आये हो। अत्र-जल तो करते जाओ।

27. अत्र लगना – स्वस्थ रहना

प्रयोग – उसे ससुराल का ही अत्र लगता है। इसलिए तो वह वहीं का हो गया।

28. अपना किया पाना – कर्म का फल भोगना

प्रयोग – बेहूदों को जब मुँह लगाया है, तो अपना किया पाओ। झखते क्या हो ?

29. अपना-सा मुँह लेकर रह जाना – शर्मिन्दा होना

प्रयोग – आज मैंने ऐसी चुभती बात कही कि वे अपना-सा मुँह लिए रह गये।

30. अपनी खिचड़ी अलग पकाना – स्वार्थी होना, अलग रहना

प्रयोग –  यदि सभी अपनी खिचड़ी अलग पकाने लगें, तो देश और समाज की उत्रति होने से रही।

31. अपने पाँव आप कुल्हाड़ी मारना – संकट मोल लेना

प्रयोग – उससे तकरार कर तुमने अपने पाँव आप कुल्हाड़ी मारी है।

32. अब-तब करना – बहाना करना

प्रयोग – कोई भी चीज माँगो, वह अब-तब करना शुरू कर देगा।

33. अब-तब होना – परेशान करना या मरने के करीब होना

प्रयोग – दवा देने से क्या वह तो अब-तब हो रहा है।

34. अंग-अंग ढीला होना – अत्यधिक थक जाना

प्रयोग – विवाह के अवसर पर दिन भर मेहमानों के स्वागत में लगे रहने से मेरा अंग-अंग ढीला हो रहा हैं।

35. अंगारे उगलना – कठोर और कड़वी बातें कहना

प्रयोग – मित्र अवश्य कोई बात होगी बिना बात कोई क्यों अंगारे उगलेगा।

36. अंगारों पर लोटना – ईर्ष्या से व्याकुल होना

प्रयोग – मेरे सुख को देखकर रामू अंगारों पर लोटता हैं।

37. अँगुली उठाना – किसी के चरित्र या ईमानदारी पर संदेह व्यक्त करना

प्रयोग – मित्र हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे कोई हम पर अँगुली उठाए।

38. अँगुली पकड़कर पहुँचा पकड़ना – थोड़ा पाकर अधिक पाने की कोशिश करना

प्रयोग – जब भिखारी एक रुपया देने के बाद और रुपए मांगने लगा तो मैंने उससे कहा- अँगुली पकड़कर पहुँचा पकड़ते हो, जाओ यहाँ से।

39. अँगूठा छाप – अनपढ़

प्रयोग – रामेश्वर अँगूठा छाप हैं, परंतु अब वह पढ़ना चाहता हैं।

40. अंगूर खट्टे होना – कोई वस्तु न मिलने पर उससे विरक्त होना

प्रयोग – जब लोमड़ी को अंगूर नहीं मिले तो वह कहने लगी कि अंगूर खट्टे हैं।

41. अंजर-पंजर ढीला होना – शरीर शिथिल होना या बहुत थक जाना

प्रयोग – दिन-भर भागते-भागते आज तो मेरा अंजर-पंजर ढीलाहो गया।

42. अंडे सेना – घर से बाहर न निकलना; घर में ही बैठे रहना

प्रयोग – रामू की पत्नी ने कहा कि कुछ काम करो, अंडे सेने से काम नहीं चलेगा।

43. अंतड़ियों के बल खोलना – बहुत दिनों के बाद भरपेट भोजन करना

प्रयोग – आज पंडित जी का न्योता हैं, आज वे अपनी अंतड़ियों के बल खोल देंगे।

44. अंतड़ियों में बल पड़ना – पेट में दर्द होना

प्रयोग – दावत में खाना अधिक खाकर मेरी तो अंतड़ियों में बल पड़ गए।

45. अंतिम घड़ी आना – मौत निकट आना

प्रयोग – शायद रामू की दादी की अंतिम घड़ी आ गई हैं। वह पंद्रह दिन से बिस्तर पर पड़ी हैं।

46. अंधा बनना – ध्यान न देना

प्रयोग – अरे मित्र तुम तो जान-बुझकर अंधे बन रहे हो- सब जानते हैं कि रामू पैसे वापस नहीं करता, फिर भी तुमने उसे पैसे उधार दे दिए।

47. अंधे के हाथ बटेर लगना – अनाड़ी आदमी को सफलता प्राप्त होना

प्रयोग – रामू मात्र आठवीं पास हैं, फिर भी उसकी सरकारी नौकरी लग गई। इसी को कहते हैं- अंधे के हाथ बटेर लगना।

48. अंधे को दो आँखें मिलना – मनोरथ सिद्ध होना

प्रयोग – एम.ए., बी.एड. करते ही प्रेम की नौकरी लग गई। उसे और क्या चाहिए- अंधे को दो आँखें मिल गई।

49. अंधेर मचना – अत्याचार करना

प्रयोग – औरंगजेब ने अपने शासनकाल में बहुत अंधेर मचाया था।

50. अक्ल का अंधा – मूर्ख व्यक्ति

प्रयोग – वह अक्ल का अंधा नहीं, जैसा कि आप समझते हैं।

51. अक्ल के पीछे लट्ठ लेकर फिरना – हर वक्त मूर्खता का काम करना

प्रयोग – रमेश तो हर वक्त अक्ल के पीछे लट्ठ लिए फिरता हैं- चीनी लेने भेजा था, नमक लेकर आ गया।

52. अक्ल घास चरने जाना – वक्त पर बुद्धि का काम न करना

प्रयोग – अरे मित्र लगता हैं, तुम्हारी अक्ल घास चरने गई हैं तभी तो तुमने सरकारी नौकरी छोड़ दी।

53. अक्ल ठिकाने लगना – गलती समझ में आना

प्रयोग – जब तक उस चोर को पुलिस के हवाले नहीं करोगे, उसकी अक्ल ठिकाने नहीं आएगी।

54. अगर-मगर करना – तर्क करना या टालमटोल करना

प्रयोग – ज्यादा अगर-मगर करो तो जाओ यहाँ से; हमें तुम्हारे जैसा नौकर नहीं चाहिए।

55. अपना सिक्का जमाना – अपनी धाक या प्रभुत्व जमाना

प्रयोग – रामू ने कुछ ही दिनों में अपने मोहल्ले में अपना सिक्का जमा लिया हैं।

56. अपना सिर ओखली में देना – जान-बूझकर संकट मोल लेना

प्रयोग – खटारा स्कूटर खरीदकर मोहन ने अपना सिर ओखली में दे दिया हैं।

57. अपनी खाल में मस्त रहना – अपने आप में संतुष्ट रहना

प्रयोग – वह तो अपनी खाल में मस्त रहता हैं, उसे किसी से कोई मतलब नहीं हैं।

58. अढाई चावल की खिचड़ी अलग पकाना – सबसे अलग रहना

प्रयोग – मोहन आजकल अढ़ाई चावल की खिचड़ी अलग पकाते है।

59. अंगारों पर पैर रखना – अपने को खतरे में डालना, इतराना

प्रयोग – भारतीय सेना अंगारों पर पैर रखकर देश की रक्षा करते है।

60. अक्ल के घोड़े दौड़ाना – कल्पनाएँ करना

प्रयोग – वह हमेशा अक्ल के घोड़े दौड़ाता रहता है।

जरूर देखे –

आ – से मुहावरे

61. आँख भर आना – आँसू आना

प्रयोग – बेटी की विदाई पर माँ की आखें भर आयी।

62. आँखों में बसना – हृदय में समाना

प्रयोग – वह इतना सुंदर है की उसका रूप मेरी आखों में बस गया है।

63. आँखे खुलना – सचेत होना

प्रयोग – ठोकर खाने के बाद ही बहुत से लोगों की आँखे खुलती है।

64. आँख का तारा – बहुत प्यारा

प्रयोग – आज्ञाकारी बच्चा माँ-बाप की आँखों का तारा होता है।

65. आँखे दिखाना – बहुत क्रोध करना

प्रयोग – राम से मैंने सच बातें कह दी, तो वह मुझे आँख दिखाने लगा।

66. आँच न आने देना – जरा भी कष्ट या दोष न आने देना

प्रयोग – तुम निश्र्चिन्त रहो तुम पर आँच न आने दूँगा।

67. आस्तीन का साँप – कपटी मित्र

प्रयोग – उससे सावधान रहो। आस्तीन का साँप है वह।

68. आसमान टूट पड़ना – गजब का संकट पड़ना

प्रयोग – पाँच लोगों को खिलाने-पिलाने में ऐसा क्या आसमान टूट पड़ा कि तुम सारा घर सिर पर उठाये हो

69. आकाश-पाताल एक करना – अत्यधिक उद्योग/परिश्रम करना

प्रयोग – सूरज ने इंजीनियर पास करने के लिए आकाश-पाताल एक कर दिया।

70. आँचल पसारना – प्रार्थना करना या किसी से कुछ माँगना

प्रयोग – मैं ईश्वर से आँचल पसारकर यही माँगता हूँ कि तुम कक्षा में उत्तीर्ण हो जाओ।

71. आँतें बुलबुलाना – बहुत भूख लगना

प्रयोग – मैंने सुबह से कुछ नहीं खाया, मेरी आँतें कुलबुला रही हैं।

72. आँतों में बल पड़ना – पेट में दर्द होना

प्रयोग – रात की पूड़ियाँ खाकर मेरी आँतों में बल पड़ गए।

73. आँधी के आम होना – बहुत सस्ता होना

प्रयोग – आजकल तो आलू आँधी के आम हो रहे हैं, जितने चाहो, ले लो।

74. आँसू पीना या पीकर रहना – दुःख या कष्ट में भी शांत रहना

प्रयोग – जब राकेश कक्षा में फेल हो गया तो वह आँसू पीकर रह गया।

75. आकाश का फूल होना – अप्राप्य वस्तु

प्रयोग – आजकल दिल्ली में घर खरीदना तो आकाश का फूल हो रहा हैं।

76. आकाश के तारे तोड़ लाना – असंभव कार्य करना

प्रयोग – श्याम हमेशा आकाश के तारे तोड़ने की बात करता हैं।

77. आग उगलना – कड़वी बातें कहना

प्रयोग – रमेश तो हमेशा आग उगलता रहता हैं।

78. आकाश से बातें करना – अत्यधिक ऊँचा होना

प्रयोग – मुंबई की इमारतें तो आकाश से बातें करती हैं।

79. आग बबूला होना – अति क्रुद्ध होना

प्रयोग – राधा जरा-सी बात पर आग बबूला हो गई।

80. आग पर लोटना – ईर्ष्या से जलना

प्रयोग – मेरी कार खरीदने की बात सुनकर रामू आग पर लोटने लगा।

81. आग में घी डालना – क्रोध को और भड़काना

प्रयोग – आपसी लड़ाई में अनुपम के आँसुओं ने आग में घी डाल दिया

82. आग लगने पर कुआँ खोदना – विपत्ति आने पर/ऐन मौके पर प्रयास करना

प्रयोग – मित्र, पहले से कुछ करो। आग लगने पर कुआँ खोदना ठीक नहीं।

83. आग लगाकर तमाशा देखना – दूसरों में झगड़ा कराके अलग हो जाना

प्रयोग – वह तो आग लगाकर तमाशा देखने वाला हैं, वह तुम्हारी क्या मदद करेगा।

84. आटे-दाल का भाव मालूम होना – दुनियादारी का ज्ञान होना या कटु परिस्थिति का अनुभव होना

प्रयोग – जब पिता की मृत्यु हो गई तो राकेश को आटे-दाल का भाव मालूम हो गया।

85. आग से खेलना – खतरनाक काम करना

प्रयोग – मित्र, तस्करी करना बंद कर दो, तुम क्यों आग से खेल रहे हो।

86. आग हो जाना – अत्यन्त क्रोधित हो जाना

प्रयोग – सुनिल के स्वभाव से सब परिचित हैं, वह एक ही पल में आग हो जाता हैं।

87. आगा-पीछा न सोचना – कार्य करते समय हानि-लाभ के बारे में न सोचना

प्रयोग – कुणाल कुछ भी करने से पहले आगा-पीछा नहीं सोचता।

88. आज-कल करना – टालमटोल करना

प्रयोग – राजू कह रहा था कि उसके दफ्तर में कोई काम नहीं करता, सब आज-कल करते हैं।

89. आटे के साथ घुन पिसना – अपराधी के साथ निर्दोष को भी सजा मिलना

प्रयोग – राघव तो जुआरियों के पास केवल खड़ा हुआ था, पुलिस उसे भी पकड़कर ले गई। इसे ही कहते हैं- आटे के साथ घुन पिसना।

90. आधा तीतर आधा बटेर – बेमेल वस्तुएँ

प्रयोग – राजू तो आधा तीतर, आधा बटेर हैं- हिंदुस्तानी धोती-कुर्ते के साथ सिर पर अंग्रेजी टोप पहनता हैं।

91. आसमान पर उड़ना – थोड़ा पैसा पाकर इतराना

प्रयोग – उसकी 10 हजार की लॉटरी क्या खुल गई, वह तो आसमान पर उड़ रहा हैं।

92. आसमान पर चढ़ना – बहुत अभिमान करना

प्रयोग – आजकल मदन का मिजाज आसमान पर चढ़ा हुआ दिखाई देता हैं।

93. आसमान पर थूकना – किसी महान् व्यक्ति को बुरा-भला कहना

प्रयोग – नेताजी सुभाषचंद्र बोस एक महान् देशभक्त थे उनके बारे में कुछ कहना-आसमान पर थूकने जैसा हैं।

94. आसमान पर मिजाज होना – अत्यधिक अभिमान होना

प्रयोग – सरकारी नौकरी लगने के बाद उसका आसमान पर मिजाज हो गया हैं।

95. आसमान सिर पर उठाना – अत्यधिक ऊधम मचाना

प्रयोग – इस बच्चे ने तो आसमान सिर पर उठा लिया हैं, इसे ले जाओ यहाँ से।

96. आसमान सिर पर टूटना – बहुत मुसीबत आना

प्रयोग – पिता के मरते ही राजू के सिर पर आसमान टूट पड़ा।

97. आसमान से गिरे, खजूर में अटके – एक परेशानी से निकलकर दूसरी परेशानी में आना

प्रयोग – अध्यापक की मदद से राजू गणित में तो पास हो गया, परंतु विज्ञान में उसकी कम्पार्टमेंट आ गई। इसी को कहते हैं आसमान से गिरे, खजूर में अटके।

98. आस्तीन चढ़ाना – लड़ने को तैयार होना

प्रयोग – मुन्ना हर वक्त आस्तीन चढ़ाकर रखता हैं।

99. आँधी के आम – बिना परिश्रम के मिली वस्तु

प्रयोग – आँधी के आमों की तरह से मिली दौलत बहुत दिनों तक नहीं रुकती।

100. आखिरी साँसें गिनना – मरणासन्न होना

प्रयोग – मदन की माँ आखिरी साँस ले रही है, सभी डॉक्टरों ने जवाब दे दिया है।

इ – से मुहावरे

101. इंद्र की परी – बहुत सुन्दर स्त्री

प्रयोग – राधा तो इंद्र की परी हैं, वह तो विश्व सुन्दरी बनेगी।

102. इज्जत उतारना – अपमानित करना

प्रयोग – जब चीनी लेकर पैसे नहीं दिए तो दुकानदार ने ग्राहक की इज्जत उतार दी।

103. इज्जत मिट्टी में मिलाना – प्रतिष्ठा या सम्मान नष्ट करना

प्रयोग – रामू की शराब की आदत ने उसके परिवार की इज्जत मिट्टी में मिला दी हैं।

104. इधर-उधर की लगाना या इधर की उधर लगाना – चुगली करना

प्रयोग – मित्र, इधर-उधर की लगाना छोड़ दो, बुरी बात हैं।

105. इधर-उधर की हाँकना – बेकार की बातें करना या गप मारना

प्रयोग – वह हमेशा इधर-उधर की हाँकता रहता हैं, कभी बैठकर पढ़ता नहीं।

106. इस हाथ देना, उस हाथ लेना – तुरन्त फल मिलना

प्रयोग – रामदीन तो इस हाथ दे, उस हाथ ले में विश्वास करता हैं।

107. इंतकाल होना  – मर जाना

प्रयोग – पिता के इंतकाल के बाद सारे घर की जिम्मेदारी अब फारुख के कंधों पर ही है।

108. इशारे पर नाचना – वश में हो जाना

प्रयोग – जो व्यक्ति अपनी पत्नी के इशारे पर नाचता है वह अपने माँ-बाप की कहाँ सुनेगा।

ई – से मुहावरे

109. ईंट से ईंट बजाना – युद्धात्मक विनाश लाना

प्रयोग – शुरू में तो हिटलर ने यूरोप में ईट-से-ईट बजा छोड़ी, मगर बाद में खुद उसकी ईंटे बजनी लगी।

110. ईंट का जबाब पत्थर से देना – जबरदस्त बदला लेना

प्रयोग – भारत अपने दुश्मनों को ईंट का जबाब पत्थर से देगा।

111. ईद का चाँद होना – बहुत दिनों बाद दिखाई देना

प्रयोग – तुम तो कभी दिखाई ही नहीं देते, तुम्हे देखने को तरस गया, ऐसा लगता है कि तुम ईद के चाँद हो गए हो।

112. ईमान बेचना – बेईमानी करना

प्रयोग – मित्र ईमान बेचने से कुछ नहीं होगा, परिश्रम करके खाओ।

उ – से मुहावरे

113. उड़ती चिड़िया को पहचानना – मन की या रहस्य की बात तुरंत जानना

प्रयोग – कोई मुझे धोखा नही दे सकता। मै उड़ती चिड़िया पहचान लेता हुँ।

114. उन्नीस बीस का अंतर होना – थोड़ा-सा अन्तर

प्रयोग – रामू और मोहन की सूरत में बस उन्नीस-बीस का अन्तर हैं।

115. उलटी गंगा बहाना – अनहोनी या लीक से हटकर बात करना

प्रयोग – अमित हमेशा उल्टी गंगा बहाता हैं कह रहा था कि वह हाथों के बल चलकर स्कूल जाएगा।

116. उँगली उठाना – बदनाम करना या दोषारोपण करना

प्रयोग – किसी पर खाहमखाह उँगली उठाना गलत हैं।

117. उड़ जाना – खर्च हो जाना

प्रयोग – अरे मित्र महीना पूरा होने से पहले ही सारा वेतन उड़ जाता हैं।

118. उड़ती खबर – अफवाह

प्रयोग – मित्र, ये तो उड़ती खबर हैं। प्रधानमंत्री को कुछ नहीं हुआ।

119. उड़न-छू हो जाना – गायब हो जाना

प्रयोग – जो भी हाथ लगा, चोर वही लेकर उड़न-छूहो गया।

120. उबल पड़ना – एकाएक क्रोधित होना

प्रयोग – दादी माँ से सब बच्चे डरते हैं, पता नहीं वे कब उबल पड़ें।

121. उलटी माला फेरना – बुराई या अनिष्ट चाहना

प्रयोग – जब आयुष को रमेश ने चाँटा मारा तो वह उल्टी माला फेरने लगा।

122. उलटी-सीधी जड़ना – झूठी शिकायत करना

प्रयोग – उल्टी-सीधी जड़ना तो माया की आदत हैं।

123. उलटी-सीधी सुनाना – डाँटना-फटकारना

प्रयोग – जब माला ने दादी का कहना नहीं माना तो वे उसे उल्टी-सीधी सुनाने लगीं।

124. उलटे छुरे से मूँड़ना – ठगना

प्रयोग – प्रयाग में पण्डे और रिक्शा वाले गरीब ग्रामीणों को उल्टे छुरे से मूँड़ देते हैं।

125. उलटे पाँव लौटना – बिना रुके, तुरंत वापस लौट जाना

प्रयोग – मनीष के घर पर ताला लगा था इसलिए मैं उलटे पाँव लौट आया।

126. उल्लू बनाना – बेवकूफ बनाना

प्रयोग – कल एक साधु, ममता को उल्लू बनाकर उससे रुपए ले गया।

127. उल्लू सीधा करना – अपना स्वार्थ सिद्ध करना

प्रयोग – मुझे ज्ञात हैं, तुम यहाँ अपना उल्लू सीधा करने आए हो।

128. उँगलियों पर नचाना – वश में करना

प्रयोग – इब्राहीम की पत्नी तो उसे अपनी उँगलियों पर नचाती है।

129. उगल देना – भेद प्रकट कर देना

प्रयोग – जब पुलिस के डंडे पड़े तो उस चोर ने सब कुछ सच-सच उगल दिया।

130. उठ जाना – मर जाना

प्रयोग – जो भले लोग होते हैं उनके उठ जाने के बाद भी दुनिया उन्हें याद करती है।

जरूर देखे – सामान्य ज्ञान

ऊ – से मुहावरे

131. ऊँच-नीच समझाना – भलाई-बुराई के बारे में बताना

प्रयोग – माँ ने पुत्री ममता को ऊँच-नीच समझाकर ही पिकनिक पर जाने दिया।

132. ऊँट के गले में बिल्ली बाँधना – बेमेल काम करना

प्रयोग – कम उम्र की लड़की का अधेड़ उम्र के व्यक्ति के साथ विवाह करना ऊँट के गले में बिल्ली बाँधना हैं।

133. ऊँट के मुँह में जीरा – अधिक आवश्यकता वाले के लिए थोड़ा सामान

प्रयोग – पेटू रामदीन के लिए दो रोटी तो ऊँट के मुँह में जीरा हैं।

134. ऊल-जलूल बकना – अंट-शंट बोलना

प्रयोग – वह तो यूँ ही ऊल-जलूल बकता रहता हैं, उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं देता।

135. ऊसर में बीज बोना या डालना – व्यर्थ कार्य करना

प्रयोग – मैंने कौशिक से कहा कि अपने घर में दुकान खोलना तो ऊसर में बीज डालना हैं, कोई और स्थान देखो।

136. ऊँचा सुनना – कुछ बहरा होना

प्रयोग – जरा जोर से बोलिए, मेरे पिताजी थोड़ा ऊँचा सुनते हैं।

137. ऊँच-नीच समझना – भलाई-बुराई की समझ होना

प्रयोग – दूसरों को राय देने से पहले तुम्हें ऊँच-नीच समझ लेनी चाहिए।

138. ऊपरी मन से कहना/करना – दिखावे के लिए कहना/करना

प्रयोग – वह हमेशा ऊपरी मन से खाना खाने के लिए पूछती थी और मैं हमेशा मना कर देता था।

ए – से मुहावरे

139. एक आँख से सबको देखना – सबके साथ एक जैसा व्यवहार करना

प्रयोग – अध्यापक विद्यालय में सब बच्चों को एक आँख से देखते हैं

140. एँड़ी-चोटी का पसीना एक करना – खूब परिश्रम करना

प्रयोग – दसवीं कक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए सीमा ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया।

141. एक और एक ग्यारह होना – आपस में संगठित होकर शक्तिशाली होना

प्रयोग – राजू और रामू पुनः मित्रता करके एक और एक ग्यारह हो गए हैं।

142. एक तीर से दो शिकार करना – एक साधन से दो काम करना

प्रयोग – रवि एक तीर से दो शिकार करने में माहिर हैं।

143. एक से इक्कीस होना – उन्नति करना

प्रयोग – सेठ जी की दुकान चल पड़ी हैं, अब तो शीघ्र ही एक से इक्कीस हो जाएँगे।

144. एक ही थैली के चट्टे-बट्टे – एक जैसे स्वभाव के लोग

प्रयोग – उस कक्षा में तो सब बच्चे एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं- सबके सब ऊधम मचाने वाले।

145. एक ही नाव में सवार होना – एक जैसी परिस्थिति में होना

प्रयोग – देखते हैं आतंकवादी क्या करते हैं – इस होटल में हम सब एक ही नाव में सवार हैं। अब जो होगा, सबके साथ होगा।

ओ – से मुहावरे

146. ओखली में सिर देना – जान-बूझकर परेशानी में फँसना

प्रयोग – कल बदमाशों से उलझकर केशव ने ओखली में सिर दे दिया।

147. ओर छोर न मिलना – रहस्य का पता न चलना

प्रयोग – रोहन विचित्र आदमी हैं, उसकी योजनाओं का कुछ ओर-छोर नहीं मिलता।

औ – से मुहावरे

148. औने के पौने करना – खरीद-फरोख्त में पैसे बचाना या चुराना

प्रयोग – अभिषेक बहुत सीधा लड़का हैं, वह औने-पौने करना नहीं जानता।

149. औने-पौने निकालना या बेचना – कोई वस्तु बहुत कम पैसों में बेचना

प्रयोग – वह अपना मकान औने-पौने में निकाल रहा हैं, पर कोई ग्राहक नहीं मिल रहा।

150. और का और होना – विशिष्ट परिवर्तन होना

प्रयोग – घर में सौतेली माँ के आते ही अनिल के पिताजी और के और हो गए।

क – से मुहावरे

151. कागजी घोड़े दौड़ाना – केवल लिखा-पढ़ी करना, पर कुछ काम की बात न होना

प्रयोग – आजकल सरकारी दफ्तर में सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ते है; होता कुछ नही।

152. कान देना – ध्यान देना

प्रयोग – पिता की बातों पर कण दिया करो।

153. कान खोलना – सावधान होना

प्रयोग – कान खोलकर सुन लो तिम्हें जुआ नही खेलना है।

154. कमर कसना – तैयार होना

प्रयोग – शत्रुओं से लड़ने के लिए भारतीयों को कमर कसकर तैयार हो जाना चाहिए

155. कबाब होना – क्रोध या ईर्ष्या से जलना

प्रयोग – मेरी सच्ची बात सुनकर राकेश कबाब हो गया।

156. कबाब में हड्डी होना – सुख-शांति में बाधा होना

प्रयोग – देखो मित्र, तुम दोनों बात करो, मैं यहाँ बैठकर कबाब में हड्डी नहीं बनूँगा।

157. कमर सीधी करना – आराम करना, लेटना

प्रयोग – मैं अभी चलता हूँ, जरा कमर सीधी कर लूँ।

158. कलेजा फटना – बहुत दुःख होना

प्रयोग – उस हृदय-विदारक दुर्घटना से मेरा तो कलेजा फट गया।

159. कलेजे का टुकड़ा – अत्यन्त प्यारा या पुत्र

प्रयोग – रामू तो अपनी दादी का कलेजे का टुकड़ा हैं।

160. कलेजे में आग लगना – ईर्ष्या होना

प्रयोग – अपने पड़ोसी की ख़ुशी देखकर शीतल के कलेजे में आग लग गई

खा – से मुहावरे

161. ख़ाक छानना – भटकना

नौकरी की खोज में वह खाक छानता रहा।

162. खून-पसीना एक करना – अधिक परिश्रम करना

प्रयोग – खून पसीना एक करके विद्यार्थी अपने जीवन में सफल होते है।

163. खून खौलना – क्रोधित होना

प्रयोग – झूठ बातें सुनते ही मेरा खून खौलने लगता है।

164. खून का प्यासा – जानी दुश्मन होना

प्रयोग – उसकी क्या बात कर रहे हो, वह तो मेरे खून का प्यासा हो गया है।

165. खाक में मिलना – सब कुछ नष्ट हो जाना

प्रयोग – बाढ़ आने पर उसका सब कुछ खाक में मिल गया।

166. खाने को दौड़ना – बहुत क्रोध में होना

प्रयोग – मैं अपने ताऊजी के पास नहीं जाऊँगा, वे तो हर किसी को खाने को दौड़ते हैं।

167. खिचड़ी पकाना – गुप्त बात या कोई षड्यंत्र करना

प्रयोग – छात्रों को खिचड़ी पकाते देख अध्यापक ने उन्हें डाँट दिया।

168.  खून-पसीना एक करना – बहुत कठिन परिश्रम करना

प्रयोग – रामू खून-पसीना एक करके दो पैसे कमाता हैं।

ग – से मुहावरे

169. गले का हार होना – बहुत प्यारा

प्रयोग – लक्ष्मण राम के गले का हर थे।

170. गर्दन पर सवार होना – पीछा ना छोड़ना

प्रयोग – जब देखो, तुम मेरी गर्दन पर सवार रहते हो।

171. गागर में सागर भरना – एक रंग -ढंग पर न रहना

प्रयोग – उसका क्या भरोसा वह तो गिरगिट की तरह रंग बदलता है।

172. गिरगिट की तरह रंग बदलना – बातें बदलना

प्रयोग – गिरगिट की तरह रंग बदलने से तुम्हारी कोई इज्जत नहीं करेगा।

173. गाल बजाना – डींग हाँकना

प्रयोग – जो करता है, वही जानता है। गाल बजानेवाले क्या जानें ?

174. गिन-गिनकर पैर रखना – सुस्त चलना, हद से ज्यादा सावधानी बरतना

प्रयोग – माना कि थक गये हो, मगर गिन-गिनकर पैर क्या रख रहे हो शाम के पहले घर पहुँचना है या नहीं

175. गुस्सा पीना – क्रोध दबाना

प्रयोग – गुस्सा पीकर रह गया। चाचा का वह मुँहलगा न होता, तो उसकी गत बना छोड़ता।

176. गुड़ गोबर करना – बनाया काम बिगाड़ना

प्रयोग – वीरू ने जरा-सा बोलकर सब गुड़-गोबर कर दिया।

177. गंगा नहाना – अपना कर्तव्य पूरा करके निश्चिन्त होना

प्रयोग – रमेश अपनी बेटी की शादी करके गंगा नहा गए।

178. गजब ढाना (कमाल करना)-

प्रयोग – लता मंगेशकर ने तो गायकी में गजब ढा दिया हैं।

179. गधा बनाना – मूर्ख बनाना

प्रयोग – अप्रैल फूल डे वाले दिन मैंने रामू को खूब गधा बनाया।

180. गधे को बाप बनाना – काम निकालने के लिए मूर्ख की खुशामद करना

प्रयोग – रामू गधे को बाप बनाना अच्छी तरह जानता हैं।

घ – से मुहावरे

181. घर का न घाट का – कहीं का नहीं

प्रयोग – कोई काम आता नही और न लगन ही है कि कुछ सीखे-पढ़े। ऐसा घर का न घाट का जिये तो कैसे जिये।

182. घाव पर नमक छिड़कना – दुःख में दुःख देना

प्रयोग – राम वैसे ही दुखी है, तुम उसे परेशान करके घाव पर नमक छिड़क रहे हो।

183. घोड़े बेचकर सोना – बेफिक्र होना

प्रयोग – बेटी तो ब्याह दी। अब क्या, घोड़े बेचकर सोओ।

184. घड़ो पानी पड़ जाना – अत्यन्त लज्जित होना

प्रयोग – वह हमेशा फस्ट क्लास लेता था मगर इस बार परीक्षा में चोरी करते समय रँगे हाथ पकड़े जाने पर बच्चू पर घोड़े पड़ गया।

185. घी के दीए जलाना – अप्रत्याशित लाभ पर प्रसत्रता

प्रयोग – जिससे तुम्हारी बराबर ठनती रही वह बेचारा कल शाम कूच कर गया। अब क्या है घी के दीये जलाओ।

186. घर बसाना – विवाह करना

प्रयोग – उसने घर क्या बसाया बाहर निकलता ही नहीं।

187. घर का बोझ उठाना – घर का खर्च चलाना या देखभाल करना

प्रयोग – बचपन में ही अपने पिता के मरने के बाद राकेश घर का बोझ उठा रहा है।

188. घर का नाम डुबोना – परिवार या कुल को कलंकित करना

प्रयोग – रामू ने चोरी के जुर्म में जेल जाकर घर का नाम डुबो दिया।

189. घर घाट एक करना – कठिन परिश्रम करना

प्रयोग – नौकरी के लिए संजय ने घर घाट एक कर दिया।

190. घर फूँककर तमाशा देखना – अपना घर स्वयं उजाड़ना या अपना नुकसान खुद करना

प्रयोग – जुए में सब कुछ बर्बाद करके राजू अब घर फूँक के तमाशा देख रहा है।

200. घर में आग लगाना – परिवार में झगड़ा कराना

प्रयोग – वह तो सबके घर में आग लगाता फिरता हैं इसलिए उसे कोई अपने पास नहीं बैठने देता।

201. घर में भुंजी भाँग न होना – बहुत गरीब होना

प्रयोग – रामू के घर में भुंजी भाँग नहीं हैं और बातें करता है नवाबों की।

202. घाव पर मरहम लगाना – सांत्वना या तसल्ली देना

प्रयोग – दादी पहले तो मारती है, फिर घाव पर मरहम लगाती है।

203. घाव हरा होना – भूला हुआ दुःख पुनः याद आना

प्रयोग – राजा ने अपने मित्र के मरने की खबर सुनी तो उसके अपने घाव हरे हो गए।

204. घास खोदना – तुच्छ काम करना

प्रयोग – अच्छी नौकरी छोड़ के राजू अब घास खोद रहा है।

205. घास न डालना – सहायता न करना या बात तक न करना

प्रयोग – मैनेजर बनने के बाद राजू अब मुझे घास नहीं डालता।

206. घी-दूध की नदियाँ बहना – समृद्ध होना

प्रयोग – श्रीकृष्ण के युग में हमारे देश में घी-दूध की नदियाँ बहती थीं।

207. घुटने टेकना – हार या पराजय स्वीकार करना

प्रयोग – संजू इतनी जल्दी घुटने टेकने वाला नहीं है, वह अंतिम साँस तक प्रयास करेगा।

208. घोड़े पर सवार होना – वापस जाने की जल्दी में होना

प्रयोग – अरे मित्र, तुम तो सदैव घोड़े पर सवार होकर आते हो, जरा हमारे पास भी बैठो।

209. घोलकर पी जाना – कंठस्थ याद करना

प्रयोग – रामू दसवीं में गणित को घोलकर पी गया था तब उसके 90 प्रतिशत अंक आए हैं।

210. घुट-घुट कर मरना – असहय कष्ट सहते हुए मरना

प्रयोग – गरीबों पर अत्याचार करने वाले घुट-घुट कर मरेंगे।

च – से मुहावरे

211. चल बसना – मर जाना

प्रयोग – बेचारे का बेटा भरी जवानी में चल बसा।

212. चार चाँद लगाना – चौगुनी शोभा देना

प्रयोग – निबन्धों में मुहावरों का प्रयोग करने से चार चाँद लग जाता है।

213. चिकना घड़ा होना – बेशर्म होना

प्रयोग –  तुम ऐसा चिकना घड़ा हो तुम्हारे ऊपर कहने सुनने का कोई असर नहीं पड़ता।

214. चिराग तले अँधेरा – पण्डित के घर में घोर मूर्खता आचरण

प्रयोग – पण्डितजी स्वयं तो बड़े विद्वान है, किन्तु उनके लड़के को चिराग तले अँधेरा ही जानो।

215. चैन की बंशी बजाना – मौज करना

प्रयोग – आजकल राम चैन की बंशी बजा रहा है।

216. चार दिन की चाँदनी – थोड़े दिन का सुख

प्रयोग – राजा बलि का सारा बल भी जब चार दिन की चाँदनी ही रहा तो तुम किस खेत की मूली हो।

217. चींटी के पर लगना या जमना – विनाश के लक्षण प्रकट होना

प्रयोग – इसे चींटी के पर जमना ही कहेंगे कि अवतारी राम से रावण बुरी तरह पेश आया।

218. चाँद पर थूकना – व्यर्थ निन्दा या सम्माननीय का अनादर करना

प्रयोग – जिस भलेमानस ने कभी किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा, उसे ही तुम बुरा-भला कह रहे हो, चाँद पर भी थूका जाता है।

219. चाँदी काटना – खूब आमदनी करना

प्रयोग – कार्यालय में बाबू लोग खूब चाँदी काट रहे है।

220. चकमा देना – धोखा देना

प्रयोग – वह बदमाश मुझे धोखा देकर भाग गया।

221. चक्कर में आना – फंदे में फँसना

प्रयोग – मुझसे गलती हो गई जो मैं उस ठग के चक्कर में फँस गया।

222. चना-चबैना – रूखा-सूखा भोजन

प्रयोग – आजकल रामू चना-चबैना खाकर गुजारा कर रहा हैं।

223. चरणों की धूल – तुच्छ व्यक्ति

प्रयोग – हे प्रभु मैं तो आपके चरणों की धूल हूँ, मुझ पर दया करो।

224. चस्का लगना – बुरी आदत

प्रयोग – धीरू को धूम्रपान का बहुत बुरा चस्का लग गया है।

225. चाँद का टुकड़ा – बहुत सुन्दर

प्रयोग –  रामू का पुत्र तो चाँद का टुकड़ा है, वह उसे प्रतिदिन काला टीका लगाता है।

226. चाँदी ही चाँदी होना – खूब धन लाभ होना

प्रयोग – अरे मित्र! यदि तुम्हारी ये दुकान चल गई तो चाँदी ही चाँदी हो जाएगी।

227. चाट पड़ना – आदत पड़ना

प्रयोग – रानी को तो चाट पड़ गई है, वह बार-बार पैसा उधार माँगने आ जाती है।

228. चादर देखकर पाँव पसारना – आमदनी के अनुसार खर्च करना

प्रयोग – पिताजी ने मुझसे कहा कि आदमी को चादर देखकर पाँव पसारने चाहिए, वरना उसे पछताना पड़ता है।

229. चादर के बाहर पैर पसारना – आय से अधिक व्यय करना

प्रयोग – जो लोग चादर के बाहर पैर पसारते हैं हमेशा तंगी का ही अनुभव करते रहते हैं।

230. चार सौ बीस – कपटी एवं धूर्त व्यक्ति

प्रयोग – मुन्ना चार सौ बीस है, इसलिए सब उससे दूर रहते हैं।

231. चूहे-बिल्ली का बैर – स्वाभाविक विरोध

प्रयोग – राम और मोहन में तो चूहे-बिल्ली का बैर है। दोनों भाई हर समय झगड़ते रहते हैं।

232. चेहरे का रंग उड़ना – निराश होना

प्रयोग – जब रानी को परीक्षा में फेल होने की सूचना मिली तो उसके चेहरे का रंग उड़ गया।

233. चेहरा खिलना – खुश होना

प्रयोग – जब अमित दसवीं में उत्तीर्ण हो गया तो उसका चेहरा खिल गया।

234. चेहरा तमतमाना – बहुत क्रोध आना

प्रयोग – जब बच्चे कक्षा में शोर मचाते हैं तो अध्यापक का चेहरा तमतमा जाता हैं।

235. चोटी और एड़ी का पसीना एक करना – खूब परिश्रम करना

प्रयोग – मुकेश ने नौकरी के लिए चोटी और एड़ी का पसीना एक कर दिया हैं।

छ – से मुहावरे

236. छक्के छूटना – बुरी तरह पराजित होना

प्रयोग – महाराजकुमार विजयनगरम की विकेट-कीपरी में अच्छे-अच्छे बॉलर के छक्के छूट चुके है।

237. छप्पर फाडकर देना – बिना मेहनत का अधिक धन पाना

प्रयोग – ईश्वर जिसको देता है उसे छप्पर फाड़कर देता है।

238. छाती पर पत्थर रखना – कठोर ह्रदय

प्रयोग – उसने छाती पर पत्थर रखकर अपने पुत्र को विदेश भेजा था।

239. छाती पर सवार होना – आ जाना

प्रयोग – अभी वह बात कर रही थी कि बच्चे उसके छाती पर सवार हो गए।

240. छक्के छुड़ाना – हौसला पस्त करना या हराना

प्रयोग – शिवाजी ने युद्ध में मुगलों के छक्के छुड़ा दिए थे।

241. छाती पर साँप लोटना – ईर्ष्या से हृदय जलना

प्रयोग – जब पड़ोसी ने नई कार ली तो शेखर की छाती पर साँप लोट गया।

242. छोटा मुँह बड़ी बात – अपनी हैसियत से बढ़कर बोलना।

प्रयोग – आजकल लोगों को छोटा मुँह बड़ी बात करने की आदत सी हो गयी है।

243. छत्तीस का आँकड़ा – घोर विरोध

प्रयोग – मुझमें और मेरे मित्र में आजकल छत्तीस का आँकड़ा है।

244. छाती पीटना – मातम मनाना

प्रयोग – अपने किसी संबंधी की मृत्यु पर मेरे पड़ोसी छाती पीट रहे थे।

245. छाती जलना – ईर्ष्या होना

प्रयोग – जब भवेश दसवीं में फर्स्ट क्लास आया तो उसके विरोधियों की छाती जल गई।

246. छाती फूलना – गर्व होना

प्रयोग – जब मैंने एम.ए. कर लिया तो मेरे अध्यापक की छाती फूल गई।

247. छाती सुलगना – ईर्ष्या होना

प्रयोग – किसी को सुखी देखकर मेहता जी की तो छाती सुलग उठती है।

248. छुट्टी पाना – झंझट या अपने कर्तव्य से मुक्ति पाना

प्रयोग – रामपाल जी अपनी इकलौती बेटी का विवाह करके छुट्टी पा गए।

249. छू हो जाना या छूमंतर हो जाना – चले जाना या गायब हो जाना

प्रयोग – अरे, विकास अभी तो यही था, अभी कहाँ छूमंतर हो गया।

250. छोटा मुँह बड़ी बात –  हेसियत से अधिक बात करना

प्रयोग – अध्यापक ने विद्यार्थियों को समझाया कि हमें कभी छोटे मुँह बड़ी बात नहीं करनी चाहिए, वरना पछताना पड़ेगा।

251. छी छी करना – घृणा प्रकट करना

प्रयोग – तुम्हारे काले कारनामों के कारण सब लोग तुम्हारे लिए छी छी कर रहे हैं।

ज – से मुहावरे

252. जलती आग में घी डालना – क्रोध बढ़ाना

प्रयोग – बहन ने भाई की शिकायत करके जलती आग में भी डाल दिया।

253. जमीन आसमान एक करना – बहुत प्रयास करना

प्रयोग – मै शहर में अच्छा मकान लेने के लिए जमीन आसमान एक कर दे रहा हूँ परन्तु सफलता नहीं मिल रही है।

254. जान पर खेलना – साहसिक कार्य

प्रयोग – हम जान पर खेलकर भी अपने देश की रक्षा करेंगे।

255. जूती चाटना – खुशामद करना, चापलूसी करना

प्रयोग – संजीव ने अफसरों की जूतियाँ चाटकर ही अपने बेटे की नौकरी लगवाई है।

256. जहर उगलना – कड़वी बातें कहना या भला-बुरा कहना

प्रयोग – पता नहीं क्या बात हुई, आज राजू अपने मित्र के खिलाफ जहर उगल रहा था।

257. जान खाना – तंग करना

प्रयोग – अरे भाई! क्यों जान खा रहे हो? तुम्हें देने के लिए मेरे पास एक भी पैसा नहीं है।

258. जख्म पर नमक छिड़कना – दुःखी या परेशान को और परेशान करना

प्रयोग – जब सोहन भिखारी को बुरा-भला कहने लगा तो मैंने कहा कि हमें किसी के जख्म पर नमक नहीं छिड़कना चाहिए।

259. जख्म हरा हो जाना – पुराने दुःख या कष्ट भरे दिन याद आना

प्रयोग – जब भी मैं गंगा स्नान के लिए जाता हूँ तो मेरा जख्म हरा हो जाता है, क्योंकि गंगा नदी में मेरा मित्र डूबकर मर गया था।

260. जबान चलाना – अनुचित शब्द कहना

प्रयोग – सीमा बहुत जबान चलाती है उससे कौन बात करेगा।

261. जबान देना – वायदा करना

प्रयोग – अध्यापक ने विद्यार्थियों से कहा कि अच्छा आदमी वही होता है जो जबान देकर निभाता है।

262. जबान बन्द करना – तर्क-वितर्क में पराजित करना

प्रयोग – रामधारी वकील ने अदालत में विपक्षी पार्टी के वकील की जबान बन्द कर दी।

263. जबान में ताला लगाना – चुप रहने पर विवश करना

प्रयोग – सरकार जब भी चाहे पत्रकारों की जबान में ताला लगा सकती है।

264. जबानी जमा-खर्च करना – मौखिक कार्यवाही करना

प्रयोग – मित्र, अब जबानी जमा-खर्च करने से कुछ नहीं होगा। कुछ ठोस कार्यवाही करो।

265. जमीन पर पाँव न पड़ना – अत्यधिक खुश होना

प्रयोग – रानी दसवीं में उत्तीर्ण हो गई है तो आज उसके जमीन पर पाँव नहीं पड़ रहे हैं।

266. जहर का घूँट पीना – कड़वी बात सुनकर चुप रह जाना

प्रयोग – सबके सामने अपमानित होकर रानी जहर का घूँट पीकर रह गई।

267. जहर की गाँठ – बुरा या दुष्ट व्यक्ति

प्रयोग – अखिल जहर की गाँठ है, उससे मित्रता करना बेकार है।

268. जान न्योछावर करना – बलिदान करना

प्रयोग – हमारे सैनिक देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर देते हैं।

269. जान हथेली पर लेना – जान की परवाह न करना

प्रयोग – सीमा पर सैनिक जान हथेली पर लेकर चलते हैं और देश की रक्षा करते हैं।

270. जी खट्टा होना – मन में वैराग पैदा होना

प्रयोग – मेरे दादाजी का तो शहर से जी खट्टा हो गया है। वे अब गाँव में ही रहते हैं।

झ – से मुहावरे

271. झक मारना – विवश होना

प्रयोग – दूसरा कोई साधन नहीं हैै। झक मारकर तुम्हे साइकिल से जाना पड़ेगा।

272. झण्डा गाड़ना/झण्डा फहराना – अपना आधिपत्य स्थापित करना

प्रयोग – अंग्रेजों ने झाँसी की रानी को परास्त करने के पश्चात् भारत में अपना झण्डा गाड़ दिया था।

273. झण्डी दिखाना – स्वीकृति देना

प्रयोग – साहब के झण्डी दिखाने के बाद ही क्लर्क बाबू ने लालू का काम किया।

274. झख मारना – बेकार का काम करना

प्रयोग – आजकल बेरोजगारी में राजू झख मार रहा है।

275. झाँसा देना – धोखा देना

प्रयोग – विपिन को उसके सगे भाई ने ही झाँसा दे दिया।

276. झाँसे में आना – धोखे में आना

प्रयोग – वह बहुत होशियार है, फिर भी झाँसे में आ गया।

277. झाड़ू फेरना – बर्बाद करना

प्रयोग – प्रेम ने अपने पिताजी की सारी दौलत पर झाड़ू फेर दी।

278. झूठ का पुतला – बहुत झूठा व्यक्ति

प्रयोग – वीरू तो झूठ का पुतला है तभी कोई उसकी बात का विश्वास नहीं करता।

ट – से मुहावरे

279. टाँग अड़ाना – अड़चन डालना

प्रयोग – हर बात में टाँग ही अड़ाते हो या कुछ आता भी है तुम्हे ?

280. टका सा जबाब देना – साफ़ इनकार करना

प्रयोग – मै नौकरी के लिए मैनेज़र से मिला लेकिन उन्होंने टका सा जबाब दे दिया।

281. टस से मस न होना – कुछ भी प्रभाव न पड़ना

प्रयोग – दवा लाने के लिए मै घंटों से कह रहा हूँ, परन्तु आप आप टस से मस नहीं हो रहे हैं।

282. टोपी उछालना – निरादर करना

प्रयोग – जब पुत्री के विवाह में दहेज नहीं दिया तो लड़के वालों ने रमेश की टोपी उछाल दी।

283. टके सेर मिलना – बहुत सस्ता मिलना

प्रयोग – आजकल आलू टके सेर मिल रहे हैं।

284. टर-टर करना – बकवास करना/व्यर्थ में बोलते रहना

प्रयोग – सुनील तो हर वक्त टर-टर करता रहता है। कौन सुनेगा उसकी बात?

285. टाँग खींचना – किसी के बनते हुए काम में बाधा डालना

प्रयोग – रमेश ने मेरी टाँग खींच दी, वरना मैं मैनेजर बन जाता।

286. टेढ़ी खीर – अत्यन्त कठिन कार्य

प्रयोग – आई.ए.एस. पास करना टेढ़ी खीर है।

287. टक्कर खाना – बराबरी करना

प्रयोग – जो धूर्त हैं उनसे टक्कर लेने से क्या लाभ।

288. टालमटोल करना  बहाना बनाना

प्रयोग – मैंने उनसे पूछा, ‘टालमटोल मत कीजिए। साफ बताइए, आप मेरी मदद करेंगे या नहीं?’

ठ – से मुहावरे

289. ठन-ठन गोपाल – खाली जेब अथवा अत्यन्त गरीब

प्रयोग – सुमेर तो ठन-ठन गोपाल है, वह चंदा कहाँ से देगा?

290. ठंडा करना – क्रोध शान्त करना

प्रयोग – महेश ने समझा-बुझाकर दादाजी को ठंडा कर दिया।

291. ठंडा पड़ना – मर जाना

प्रयोग – वह साईकिल से गिरते ही ठंडा पड़ गया।

292. ठिकाने लगाना – मार डालना

प्रयोग – अपहरणकर्ताओं ने भवन के बेटे को ठिकाने लगा ही दिया।

293. ठेंगा दिखाना – इनकार करना

प्रयोग – वक्त आने पर मेरे मित्र ने मुझे ठेंगा दिखा दिया।

294. ठोकरें खाना – कष्ट या दुःख सहना

प्रयोग – दुनियाभर की ठोकरें खाकर गोपाल ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है।

295. ठाट-बाट से रहना – शानौशौकत से रहना

प्रयोग – वे जिस ठाट-बाट से रहते हैं, उसकी बराबरी शायद ही कोई कर सके।

296. ठिकाने की बात कहना – समझदारी की बात कहना

प्रयोग – जो लोग ठिकाने की बात कहते हैं लोग उन पर अवश्य यकीन करते हैं।

ड – से मुहावरे

297. डकार जाना – हड़प जाना

प्रयोग – सियाराम अपने भाई की सारी संपत्ति डकार गया।

298. डींग मारना या हाँकना – शेखी मारना

प्रयोग – जब देखो, मोहन डींगें मारता रहता है ‘मैंने ये किया, मैंने वो किया’।

299. डेढ़/ढाई चावल की खिचड़ी पकाना – सबसे अलग काम करना

प्रयोग – सुधीर अपनी डेढ़ चावल बनी खिचड़ी अलग पकाता है।

300. डंका पीटना – प्रचार करना

प्रयोग – अनिल ने झूठा डंका पीट दिया कि उसकी लॉटरी खुल गई है।

301. डंके की चोट पर – खुल्लमखुल्ला

प्रयोग – शेरसिंह जो भी काम करता है, डंके की चोट पर करता है।

302. डोंड़ी पीटना – मुनादी या ऐलान करना

प्रयोग – बीरबल की विद्वता को देखकर अकबर ने डोंड़ी पीट दी थी कि वह राज दरबार के नवरत्नों में से एक है।

303. डूब मरना – बहुत लज्जित होना

प्रयोग – इस तरह की बातें मेरे लिए डूब मरने के समान हैं।

304. डूबती नैया को पार लगाना – संकट से छुड़ाना

प्रयोग – ईश्वर की कृपा होगी तभी तुम्हारी डूबती नैया पार लगेगी।

305. डेरा डालना – निवास करना

प्रयोग – साधु ने मंदिर में जाकर अपना डेरा डाल दिया।

ढ़ – से मुहावरे

306. ढील देना – छूट देना

प्रयोग – दादी माँ कहती हैं कि बच्चों को अधिक ढील नहीं देनी चाहिए।

307. ढेर हो जाना – गिरकर मर जाना

प्रयोग – कल पुलिस की मुठभेड़ में दो बदमाश ढेर हो गए।

308. ढोल पीटना – सबसे बताना

प्रयोग – अरे, कोई इस रानी को कुछ मत बताना, वरना ये ढोल पीट देगी।

309. ढलती-फिरती छाया – भाग्य का खेल या फेर

प्रयोग – कल वह गरीब था, आज अमीर है- सब ढलती-फिरती छाया है।

310. ढल जाना – कमजोर हो जाना, वृद्धावस्था की ओर जान

प्रयोग – बीमारी के कारण उसका सारा शरीर ढल गया है।

311. ढिंढोरा पीटना – घोषणा करना

प्रयोग – केवल ढिंढोरा पीटने से काम नहीं बनता। काम बनाने के लिए लोगों का विश्वास जीतना जरूरी है।

312. ढोंग रचना – पाखंड करना

प्रयोग – ढोंग रचने वाले साधुओं से मुझे सख्त नफ़रत है।

त – से मुहावरे

313. तूती बोलना – बोलबाला होना

प्रयोग – आजकल तो राहुल गाँधी की तूती बोल रही है।

314. तारे गिनना – चिंता के कारण रात में नींद न आना

प्रयोग – अपने पुत्र की चिन्ता में पिता रात भर तारे गिनते रहे।

315. तिल का ताड़ बनाना – छोटी-सी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना

प्रयोग – शांति तो तिल का ताड़ बनाने में माहिर है।

316. तीन तेरह करना – नष्ट करना, तितर बितर करना

प्रयोग – जरा-से झगड़े ने दोनों भाइयों को तीन तेरह कर दिया।

317. तलवार सिर पर लटकना – खतरा होना

प्रयोग – आजकल रामू के मैनेजर से उसकी कहासुनी हो गई है इसलिए तलवार उसके सिर पर लटकी हुई है।

318. ताक में बैठना – मौके की तलाश में रहना

प्रयोग – सुधीर बहुत दिनों से ताक में बैठा था कि उसे मैं कब अकेला मिलूँ और वो मुझे पीटे।

319. तारीफ के पुल बाँधना – अधिक प्रशंसा या तारीफ करना

प्रयोग – राकेश जब फर्स्ट क्लास पास हुआ तो सभी ने उसकी तारीफ के पुल बाँध दिए।

320. तिनके का सहारा – थोड़ी-सी मदद

प्रयोग – मैंने मोहित की जब सौ रुपए की मदद की तो उसने कहा कि डूबते को तिनके का सहारा बहुत होता है।

321. तीर मार लेना – कोई बड़ा काम कर लेना

प्रयोग – इंजीनियर बनकर आयुष ने तीर मार लिया है।

322. तेल निकालना – खूब कस कर काम लेना

प्रयोग – प्राइवेट फर्म तो कर्मचारी का तेल निकाल लेती है। तभी विकास को नौकरी करना पसंद नहीं है।

323. तोता पालना – किसी बुरी आदत को न छोड़ना

प्रयोग – केशव ने तंबाकू खाने का तोता पाल लिया है। बहुत मना किया, मानता ही नहीं है।

324. तरस खाना – दया करना

प्रयोग – ठंड में काँपते हुए उस भिखारी पर तरस खाकर मैंने अपना कंबल उसी को दे दिया।

325. तिल-तिल करके मरना – धीरे-धीरे मृत्यु के मुख में जाना

प्रयोग – बेटे के गम में उसने बिस्तर पकड़ लिया है और अब तिल-तिल करके मर रही है।

326. तू-तू मैं-मैं होना – आपस में कहा-सुनी होना

प्रयोग – कल रमेश और उसकी पत्नी के बीच तू-तू मैं-मैं हो गई।

327. तेल निकालना – खूब कसकर काम लेना

प्रयोग – जमींदार मजदूरों का तेल निकाल लेते थे।

328. तौल-तौल कर मुँह से शब्द निकालना – बहुत सोच-विचार कर बोलना

प्रयोग – शालिनी बहुत विवेकशील है वह तौल-तौलकर मुँह से शब्द निकालती है।

त्र – से मुहावरे

329. त्राहि-त्राहि करना – विपत्ति या कठिनाई के समय रक्षा या शरण के लिए प्रार्थना करना

प्रयोग – आग लगने पर बच्चे का उपाय न देखकर लोग त्राहि-त्राहि करने लगे।

330. त्रिशुंक होना – बीच में रहना, न इधर का होना, न उधर का

प्रयोग – केशव न तो अभी तक आया और न ही फोन किया। समारोह में जाना है या नहीं कुछ भी नहीं पता। मैं तो त्रिशुंक हो गया हूँ।

थ शब्द से मुहावरे

331. थूक कर चाटना – कह कर मुकर जाना

प्रयोग – कल मुन्ना थूक कर चाट गया अब उस पर कोई विश्वास नहीं करेगा।

332. थाली का बैंगन होना – ऐसा आदमी जिसका कोई सिद्धान्त न हो

प्रयोग – आजकल के नए-नए नेता तो थाली के बैंगन हैं।

333. थाह मिलना या लगना – भेद खुलना

प्रयोग – अब वैज्ञानिकों ने थाह लगा ली है कि मंगल ग्रह पर भी पानी है।

334. थुक्का फजीहत होना – अपमान होना

प्रयोग – कुमार थुक्का फजीहत होने से पहले ही चला गया।

335. थुड़ी-थुड़ी होना – बदनामी होना

प्रयोग – बच्चों को बेवजह पीटने पर अध्यापक की हर जगह थुड़ी-थुड़ी हो रही है।

336. थक कर चूर होना – बहुत थक जाना

प्रयोग – मई की धूप में चार कि० मी० की पैदल यात्रा करने के कारण मैं तो थककर चूर हो गया हूँ।

द – से मुहावरे

337. दम टूटना – मर जाना

प्रयोग – शेर ने एक ही गोली में दम तोड़ दिया।

338. दिन दूना रात चौगुना – तेजी से तरक्की करना

प्रयोग – रामदास अपने व्यापार में दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है।

339. दौड़-धूप करना – बड़ी कोशिश करना

प्रयोग – कौन बाप अपनी बेटी के ब्याह के लिए दौड़-धूप नहीं करता।

340. दाँत पीसना – बहुत क्रोधित होना

प्रयोग – रमेश तो बात-बात पर दाँत पीसने लगता है।

341. दाँत खट्टे करना – परास्त करना, हराना

प्रयोग – महाभारत में पांडवों ने कौरवों के दाँत खट्टे कर दिए थे।

342. दाँतों तले उँगली दबाना – दंग रह जाना

प्रयोग – जब एक गरीब छात्र ने आई.ए.एस. पास कर ली तो सब दाँतों तले उँगली दबाने लगे।

343. दिन पलटना – अच्छे दिन आना

प्रयोग – नौकरी लगने के बाद अब शम्भू के दिन पलट गए हैं।

344. दिन-रात एक करना – कठिन श्रम करना

प्रयोग – मोहन ने दसवीं पास करने के लिए दिन-रात एक कर दिया था।

345. दिल की दिल में रह जाना – मनोकामना पूरी न होना

प्रयोग – जिस लड़की से वह विवाह करना चाहता था उससे कह ही नहीं पाया और इस तरह से दिल की दिल में ही रह गई।

346. दिल के अरमान निकलना – इच्छा पूरी होना

प्रयोग – जब मेरे दिल के अरमान निकलेंगे तब मुझे तसल्ली मिलेगी।

347. दिल्ली दूर होना – लक्ष्य दूर होना

प्रयोग – अभी तो मोहन ने सिर्फ दसवीं पास की है। उसे डॉक्टर बनना है तो अभी दिल्ली दूर है।

348. दूध की नदियाँ बहना – धन-दौलत से पूर्ण होना

प्रयोग – कृष्ण के युग में मथुरा में दूध की नदियाँ बहती थीं।

349. दाल रोटी चलना – जीवन निर्वाह होना

प्रयोग – इतनी तनख्वाह मिल जाती है कि किसी तरह दाल-रोटी चल जाती है।

350. देखते रह जाना – दंग रह जाना

प्रयोग – इतने छोटे बच्चे के करतब लोग देखते रह गए।

ध – से मुहावरे

351. धज्जियाँ उड़ाना – किसी के दोषों को चुन-चुनकर गिनाना

प्रयोग – उसने उनलोगों की धज्जियाँ उड़ाना शुरू किया कि वे वहाँ से भाग खड़े हुए।

352. धूप में बाल सफेद करना – बिना अनुभव के जीवन का बहुत बड़ा भाग बिता देना

प्रयोग – रामू काका ने धूप में बाल सफेद नहीं किए हैं, उन्हें बहुत अनुभव है।

353. धोबी का कुत्ता घर का न घाट का – जिसका कहीं ठिकाना न हो, निरर्थक व्यक्ति

प्रयोग – जब से रामू की नौकरी छूटी है, उसकी दशा धोबी का कुत्ता घर न घाट का जैसी है।

354. धीरज बँधाना – सांत्वना देना

प्रयोग – सब लोगों ने धीरज बँधाने की कोशिश की पर उसके आँसू न थमे।

355. धोखा देना – ठगना

प्रयोग – चोर पुलिस को धोखा देकर भाग गया।

356. धूल चाटना – खुशामद करना

प्रयोग – पहले तो बहुत अकड़ रहे थे। जब पता चला कि मदन मंत्री का बेटा है तो लगे उसकी धूल चाटने।

357. ध्यान से उतरना – भूलना

प्रयोग – मैंने गाड़ी की चाबी कहाँ रख दी है यह मेरे ध्यान से उतर गया है।

358. धरना देना – अड़कर बैठना

प्रयोग – सत्याग्रही मंत्री की कोठी के सामने धरना दे रहे है।

359. धोती ढीली होना – डर जाना

प्रयोग – मास्टर साहब के आते ही लड़के की धोती ढीली हो गयी।

360. धक्का देना – अपमान करना

प्रयोग – तुम मुझे धक्का दो और मैं तुम्हारी आरती उतारूँ- ऐसा क्या संभव है ?

न – से मुहावरे

361. नौ-दो ग्यारह होना – भाग जाना

प्रयोग – बिल्ली को देखकर चूहे नौ दो ग्यारह हो गए।

362. न घर का रहना न घाट का – दोनों तरफ से उपेक्षित होना

प्रयोग – पढ़ाई छोड़ कर रोहन घर का रहा न घाट का, अब वह पछताता है।

363. नमक हलाल करना – उपकार का बदला उतारना

प्रयोग – कुत्ते ने मालिक के लिए अपनी जान दे कर अपना नमक हलाल कर दिया।

364. नमक का हक अदा करना – बदला/ऋण चुकाना

प्रयोग – यदि आप मेरी मदद करेंगे तो जीवन भर मैं आपके नमक का हक अदा करता रहूँगा।

365. नमक-मिर्च लगाना – बढ़ा-चढ़ाकर कहना

प्रयोग – मेरे भाई ने नमक-मिर्च लगाकर मेरी शिकायत पिता जी से कर डाली।

366. नयनों का तारा – अत्यन्त प्रिय व्यक्ति या वस्तु

प्रयोग – पिंटू अपने माता-पिता के नयनों का तारा है।

367. नस-नस ढीली होना – बहुत थक जाना

प्रयोग – दिन-भर घर का काम करके माँ की नस-नस ढीली हो जाती है।

368. नस-नस पहचानना – भलीभाँति अच्छी तरह जानना

प्रयोग – माता-पिता अपने बच्चों की नस-नस पहचानते हैं।

369. नाक में दम करना – बहुत परेशान करना

प्रयोग – इस बच्चे ने तो नाक में दम कर दिया है। कितना ऊधम करता है ये!

370. नाक ऊँची रखना – सम्मान या प्रतिष्ठा रखना

प्रयोग – शांति हमेशा अपनी नाक ऊँची रखती है।

371. नाक रखना – इज्जत रखना

प्रयोग – आई० ए० एस० की परीक्षा में प्रथम आकर मेरी बेटी ने मेरी नाक रख ली।

372. नाम उछालना – बदनामी करना

प्रयोग – छात्रों ने बेमतलब ही संस्कृति के आचार्य जी का नाम उछाल दिया कि ये बच्चों को मारते हैं।

373. नाम डुबोना – प्रतिष्ठा, मर्यादा आदि खोना

प्रयोग – सीमा ने घर से भाग कर अपने माँ-बाप का नाम डुबो दिया।

374. नाव या नैया पार लगाना – सफलता या सिद्धि प्रदान करना

प्रयोग – ईश्वर सदा मेहनती व्यक्ति की नाव/नैया पार लगाता है।

375. न लेना न देना – कोई संबंध न रखना

प्रयोग – रोहन का अपनी पत्नी से न लेना है न देना। दोनों अलग हो गए हैं।

376. नखरे उठाना – खुशामद करना

प्रयोग – मैं किसी के नखरे नहीं उठा सकता। जो मुझे उचित लगेगा वही करूँगा।

377. नजर अंदाज करना – उपेक्षा करना

प्रयोग – धनवान बच्चों के सामने गरीब बच्चों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

378. नजर उतारना – बुरी दृष्टि के प्रभाव को मंत्र आदि युक्ति से दूर करना

प्रयोग – लगता है तुम्हें लोगों की नजर लग जाती है इसलिए जल्दी-जल्दी बीमार पड़ जाती हो। इस बार किसी साधु-संत से नजर उतरवा लो।

379. नजर बचाकर – चुपके से

प्रयोग – माता-पिता की नजर बचाकर वह सिनेमा देखने आई थी।

380. नजर से गिरना – प्रतिष्ठा कम करना

प्रयोग – जो लोग अपने बड़ों की नजर में गिर जाते हैं उनको कोई नहीं पूछता।

381. नसीब फूटना – भाग्य का प्रतिकूल होना

प्रयोग – हमारे तो नसीब फूटे थे जो इस शहर में आकर बसे।

382. नाक के नीचे – बहुत निकट

प्रयोग – आपकी नाक के नीचे आपका नौकर चोरी करता रहा और आपको तब पता चला जब उसने सारा खजाना खाली कर दिया।

प – से मुहावरे

383. पेट काटना – अपने भोजन तक में बचत

प्रयोग – अपना पेट काटकर वह अपने छोटे भाई को पढ़ा रहा है।

384. पानी उतारना – इज्जत लेना

प्रयोग – भरी सभा में द्रोपदी को पानी उतारने की कोशिश की गयी।

385. पेट में चूहे कूदना – जोर की भूख

प्रयोग – पेट में चूहे कूद रहे है। पहले कुछ खा लूँ, तब तुम्हारी सुनूँगा।

386. पहाड़ टूट पड़ना – भारी विपत्ति आना

प्रयोग – उस बेचारे पर तो दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा।

387. पट्टी पढ़ाना – बुरी राय देना

प्रयोग – तुमने मेरे बेटे को कैसी पट्टी पढ़ाई कि वह घर जाता ही नहीं ?

388. पाँचों उँगलियाँ घी में होना – पूरे लाभ में

प्रयोग – पिछड़े देशों में उद्योगियों और मेहनतकशों की हालत पतली रहती है तथा दलालों, कमीशन एजेण्टों और नौकरशाहों की ही पाँचों उँगलियाँ घी में रहता हैं।

389. पगड़ी रखना – इज्जत बचाना

प्रयोग – हल्दीघाटी में झाला सरदार ने राजपूतों की पगड़ी रख ली।

390. पानी-पानी होना – अधिक लज्जित होना

प्रयोग – जब धीरज की चोरी पकड़ी गई तो वह पानी-पानी हो गया।

391. पत्ता कटना – नौकरी छूटना

प्रयोग – मंदी के दौर में मेरी कंपनी में दस लोगों का पत्ता कट गया।

392. पर्दाफाश होना – भेद खुलना

प्रयोग – रामू ने बहुत छिपाया, पर कल उसका पर्दाफाश हो ही गया।

393. पाँव तले से धरती खिसकना – अत्यधिक घबरा जाना

प्रयोग – बस में जेब कटने पर मेरे पाँव तले से धरती खिसक गई।

394. पारा चढ़ना – क्रोधित होना

प्रयोग – मेरे दादाजी का जरा-सी बात में पारा चढ़ आता है।

फ – से मुहावरे

395. फूलना-फलना – धनवान या कुलवान होना

प्रयोग – मेरा आशीर्वाद है सदा फूलो-फलो।

396. फटे में पाँव देना – दूसरे की विपत्ति अपने ऊपर लेना

प्रयोग – शर्मा जी की फटे में पाँव देने की आदत है।

397. फल चखना – कुपरिणाम भुगतना

प्रयोग – वह जैसा कर्म करेगा, वैसा फल चखेगा।

398. फुलझड़ी छोड़ना – कटाक्ष करना

प्रयोग – गुप्ता जी तो कोई न कोई फुलझड़ी छोड़ते ही रहते हैं।

399. फूट डालना – मतभेद पैदा करना

प्रयोग – अंग्रेजों ने फूट डाल कर भारत पर राज किया था।

400. फूला न समाना – अत्यन्त आनन्दित होना

प्रयोग – जब रवि कक्षा 10 में पास हो गया तो वह फूला नहीं समाया।

401. फूंक-फूंक कर कदम रखना – सोच-समझकर काम करना

प्रयोग – एक बार नुकसान उठा लिया अब तो फूंक-फूंक कर कदम रखो।

402. फूटी आँखों न सुहाना – तनिक भी अच्छा न लगना

प्रयोग – झूठ बोलने वाले लोग मुझे फूटी आँख नहीं सुहाते।

403. फटे हाल होना – बहुत गरीब होना

प्रयोग – जो बेचारा खुद फटे हाल है वह दूसरों की क्या मदद करेगा।

404. फूँक निकल जाना – भयभीत होना

प्रयोग – बहुत बढ़-चढ़ कर बोल रहा था। जैसे ही प्रधानाचार्य आए उसकी फूँक निकल गई।

405. फूट-फूट कर रोना – बहुत रोना

प्रयोग – परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने की खबर सुनकर वह फूट-फूट कर रोने लगी।

ब – से मुहावरे

406. बीड़ा उठाना – दायित्व लेना

प्रयोग – गांधजी ने भारत को आजाद करने का बीड़ा उठाया था।

407. बाजी ले जाना या मारना – जीतना

प्रयोग – देखें, दौड़ में कौन बाजी ले जाता या मारता है।

408. बेसिर-पैर की बात करना – व्यर्थ की बात करना

प्रयोग – वह तो जब भी देखो बेसिर-पैर की बात करता है।

409. बगलें झाँकना – उत्तर न दे सकना

प्रयोग – अध्यापक के सवाल पर राजू बगलें झाँकने लगा।

410. बाग-बाग होना – बहुत खुश होना

प्रयोग – जब राम अपनी कक्षा में फर्स्ट आया तो उसके माता-पिता का दिल बाग-बाग हो गया।

411. बोलबाला होना – ख्याति होना

प्रयोग – शहर में सेठ रामचंदानी का बहुत बोलबाला है।

412. बात खुलना – रहस्य खुलना

प्रयोग – कल सबके सामने रमेश की बात खुल गई।

413. बात बनाना – झूठ बोलना

प्रयोग – मोहन अब बात बनाना भी सीख गया है।

414. बुद्धि पर पत्थर पड़ना – अक्ल काम न करना

प्रयोग – आज उसकी बुद्धि पर पत्थर पड़ गए तभी तो उसने 10 लाख का मकान 2 लाख में बेच दिया।

415. बिन बेपेंदी का लौटा – किसी की तरफ न टिकने वाला

प्रयोग – वह नेता तो बेपेंदी का लौटा है- कभी इस पार्टी में तो कभी उस पार्टी में चला जाता है।

416. बाएं हाथ का खेल – बहुत सुगम कार्य

प्रयोग – रामू ने कहा कि कबड्डी में जीतना तो उसके बाएं हाथ का खेल है।

417. बुढ़ापे की लाठी – बुढ़ापे का सहारा

प्रयोग – रामदीन का बेटा उसके बुढ़ापे का लाठी था, वह भी विदेश चला गया।

418. बहती गंगा में हाथ धोना – समय का लाभ उठाना

प्रयोग – हर आदमी बहती गंगा में हाथ धोना चाहता है चाहें उसमें क्षमता हो या न हो।

419. बलि जाना – न्योछावर होना

प्रयोग – मीरा कृष्ण के हर रूप पर बलि जाती थी।

420. बात का बतंगड़ बनाना – छोटी-सी बात को बहुत बढ़ा देना

प्रयोग – बात का बतंगड़ मत बनाओ और इस किस्से को यहीं समाप्त करो।

भ – से मुहावरे

421. भीगी बिल्ली होना – डर से दबना

प्रयोग – वह अपने शिक्षक के सामने भीगी बिल्ली हो जाता है।

422. भंडा फूटना – पोल खुलना

प्रयोग – भंडा फूटने के डर से रवि मीटिंग से उठ कर चला गया।

423. भंडा फोड़ना – पोल खोलना

प्रयोग – जरा-सी कहासुनी पर महेश ने रवि का भंडा फोड़ दिया।

424. भगवान को प्यारे हो जाना – मर जाना

प्रयोग – सोनू के नानाजी कल भगवान को प्यारे हो गए।

425. भांजी मारना – किसी के बनते काम को बिगाड़ना

प्रयोग – रामू के विवाह में उसके ताऊ ने भांजी मार दी।

426. भैंस के आगे बीन बजाना – वज्र मूर्ख के सामने बुद्धिमानी की बातें करना

प्रयोग – राजू को कोई बात समझाना तो भैंस के आगे बीन बजाना है।

427. भौंहे टेढ़ी करना – क्रोध आना

प्रयोग – पिताजी की जरा भौंहे टेढ़ी करते ही पिंटू चुप हो गया।

428. भाड़े का टट्टू – किराए का आदमी

प्रयोग – इस तरह के काम भाड़े के टट्टुओं से नहीं होते। खुद मेहनत करनी पड़ती है।

429. भूत चढ़ना या सवार होना – किसी काम में पूरी तरह लग जाना

प्रयोग – उस पर आजकल परीक्षा का भूत सवार है। दिन रात पढ़ने में ही लगी रहती है।

430. भूत उतरना – क्रोध शांत होना

प्रयोग – उससे कुछ मत कहो। जब भूत उतर जाएगा तब खुद ही शांत हो जाएगा।

431. भूत बनकर लगना – जी-जान से लगना

प्रयोग – वह तो मेरे पीछे भूत बनकर लग गया है, छोड़ने का नाम ही नहीं लेता।

432. भोग लगाना – देवता/ईश्वर को नैवेद्य चढ़ाना

प्रयोग – मैं पहले ठाकुरजी को भोग लगाऊँगा तब नाश्ता करूँगा।

म – से मुहावरे

433. मुँह धो रखना – आशा न रखना

प्रयोग – यह चीज अब मिलने को नही मुँह धो रखिए।

434. मुँह में पानी आना – लालच होना

प्रयोग – मिठाई देखते ही उसके मुँह में पानी भर आया।

435. मुँह बंद कर देना – शांत कराना

प्रयोग – तुम धमकी देकर मेरा मुँह बंद कर देना चाहते हो

436. मुँह काला होना – अपमानित होना

प्रयोग – उसका मुँह काला हो गया अब वह किसी को क्या मुँह दिखाएगा।

437. मस्तक ऊँचा करना – प्रतिष्ठा बढ़ाना

प्रयोग – डॉक्टरी पास करके रवि ने अपने माँ-बाप का मस्तक ऊँचा कर दिया।

438. महाभारत मचाना – खूब लड़ाई-झगड़ा करना

प्रयोग – सोनू और मोनू दोनों बहन-भाई सुबह से महाभारत मचा रहे हैं।

439. मिट्टी डालना – किसी के दोष को छिपाना

प्रयोग – बच्चों की गलतियों पर मिट्टी नहीं डालनी चाहिए।

440. मुँह पर ताला लगना – चुप रहने के लिए विवश होना

प्रयोग – कक्षा में अध्यापक के आने पर सब छात्रों के मुँह पर ताला लग जाता है।

441. मुँह लगाना – बहुत स्वतंत्रता देना

प्रयोग – ऐसे घटिया लोगों को मैं मुँह नहीं लगाता।

442. मूँछ नीची होना – लज्जित होना

प्रयोग – जब नौकर ने टका-सा जवाब दे दिया तो ठाकुर साहब की मूँछ नीची हो गई।

443. मन उड़ा-उड़ा सा रहना – मन स्थिर न रहना

प्रयोग – पति के आने के इंतजार में मधु का मन आजकल उड़ा-उड़ा सा रहता है।

444. मजा चखाना – गलती की सजा देना

प्रयोग – जो कुछ तुमने किया है उसका तुम्हें मजा चखाकर रहूँगा।

445. मन की मन में रह जाना – इच्छा पूरी न होना

प्रयोग – बेटी के विवाह में लड़के वालों से अनबन हो गई इसलिए कुछ भी ठीक से न हो पाया।

446. मार-मार कर चमड़ी उधेड़ देना – बहुत पीटना

प्रयोग – पुलिस वाले ने उस चोर को मार-मार कर उसकी चमड़ी उधेड़ दी।

य – से मुहावरे

447. यमपुर पहुँचाना – मार डालना

प्रयोग – पुलिस ने चोर को मारमार कर यमपुर पहुँचा दिया।

448. युक्ति लड़ाना – उपाय करना

प्रयोग – अशोक हमेशा पैसा कमाने की युक्ति लड़ाता रहता।

449. यश गाना – प्रशंसा करना

प्रयोग – यदि आप देश के लिए अच्छे काम करेंगे तो लोग आपका यश गाएँगे।

450. यारी गाँठना – मित्रता करना

प्रयोग – पुलिस वालों से यारी गाँठना उसे महँगा पड़ा।

451. यश मिलना – सम्मान मिलना

प्रयोग – देखें इस चुनाव में किसे यश मिलता है।

452. युगांतर उपस्थित करना- किसी पुरानी प्रथा को हटाकर उसके स्थान पर नई प्रथा चलाना

र – से मुहावरे

453. रंग जमना – धाक जमना

प्रयोग – तुम्हारा तो कल खूब रंग जमा।

454. रंग बदलना – परिवर्तन होना

प्रयोग – जमाने का रंग बदल गया है।

455. रंग चढ़ना – प्रभावित होना

प्रयोग – रामू पर दिल्ली के रहन-सहन का रंग चढ़ गया है। अब तो वह कान में मोबाइल लगाए फिरता है।

456. रात-दिन एक करना – निरन्तर कठिन परिश्रम करना

प्रयोग – परीक्षा में पास होने के लिए सुरेश ने रात-दिन एक कर दी।

457. रास्ता नापना – चले जाना

प्रयोग – तुम अपना रास्ता नापो। यहाँ तुम्हारी दाल नहीं गलेगी।

458. रोजी चलना – जीविका का निर्वाह होना

प्रयोग – इस महँगाई में रोजी चलना भी दूभर हो गया है।

459. रोटियाँ तोड़ना – किसी के यहाँ उसकी कृपा पर जीवन वसर करना

प्रयोग – कब तक ससुराल में मुफ़्त की रोटियाँ तोड़ते रहोगे जाकर कहीं काम-धंधे की तलाश क्यों नहीं करते।

460. राग-रंग में रहना – ऐश में रहना

प्रयोग – इन दिनों राजनीतिज्ञ ही राग-रंग में रहते हैं।

ल – से मुहावरे

461. लोहे के चने चबाना – कठिनाई झेलना

प्रयोग – भारतीय सेना के सामने पाकिस्तानी सेना को लोहे के चने चबाने पड़े।

462. लकीर का फकीर होना – पुरानी प्रथा पर ही चलना

प्रयोग – यह अबतक लकीर के फकीर ही है। टेबुल पर नही, चौके में ही खायेंगे।

463. लाल-पीला होना – नाराज होना

प्रयोग – राजू के कक्षा में शोर मचाने पर अध्यापक लाल-पीले हो गए।

464. लंबी-चौड़ी हाँकना – गप्प मारना

प्रयोग – मोहन कक्षा में लंबी-चौड़ी हाँक रहा था तभी अध्यापक आ गए और वह खामोश हो गया।

465. लगाम ढीली करना – सख्ती न करना/नियमों में नर्मी बरतना

प्रयोग – जरा-सी लगाम ढीली करने से मेरी कंपनी का कोई भी कर्मचारी अब समय पर नहीं आता।

466. लज्जा या शर्म से पानी-पानी होना – बहुत लज्जित होना

प्रयोग – अपनी गलती पर पंडित जी लज्जा से पानी-पानी हो गए।

467. लौ लगना – धुन लगना, प्रेम होना

प्रयोग – मधुरिमा को तो पढ़ाई की लौ लग गई है। दिन रात पढ़ने में ही लगी रहती है।

468. लकड़ी होना – अत्यन्त दुर्बल होना

प्रयोग – बीमारी में बिट्टू लकड़ी हो गया है।

469. लोहा लेना – सामना करना

प्रयोग – 1857 के संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से लोहा लिया।

470. लगन लगना – प्रेम/भक्ति होना

प्रयोग – ईश्वर में जब लगन लग जाती है तो सारा संसार मिथ्या लगने लगता है।

व अ से मुहावरे

471. वक्त पड़ना – मुसीबत आना

प्रयोग – वक्त पड़ने पर ही मित्र की पहचान होती है।

472. वज्र टूटना – भारी विपत्ति आना

प्रयोग – रामू के पिताजी के मरने के पश्चात् उस पर वज्र टूट पड़ा।

473. विष घोलना – किसी के मन में शक या ईर्ष्या पैदा करना

प्रयोग – राजू ने बनी-बनाई बात में विष घोल दिया।

474. विष उगलना – कड़वी बात कहना

प्रयोग – कालू हमेशा राजू के खिलाफ विष उगलता रहता है।

475. वेद वाक्य – सौ प्रतिशत सत्य

प्रयोग – हमारे शिक्षक की कही हर बात वेद वाक्य है।

श – से मुहावरे

476. शैेतान की खाला – बहुत ही दुष्ट स्त्री

प्रयोग – शांति तो शैेतान की खाला है।

477. शंख के शंख रहना – मूर्ख के मूर्ख बने रहना

प्रयोग – शंभू तो शंख का शंख ही रहा।

478. शक़्कर से मुँह भरना – खुशखबरी सुनाने वाले को मिठाई खिलाना

प्रयोग – रमेश ने दसवीं पास होने पर अपने मित्रों का शक़्कर से मुँह भर दिया।

479. शहद लगाकर चाटना – निरर्थक वस्तुओं को सँभाल कर रखना

प्रयोग – अब इन दस्तावेजों को वापस क्यों नहीं कर देते क्या शहद लगाकर इनको चाटोगे।

480. शामत आना – बुरा समय आना

प्रयोग – सब ठीक ठाक चल रहा था। न जाने कहाँ से शामत आ गई और सब बर्बाद हो गई।

स – से मुहावरे

481. सर्द हो जाना – डरना, मरना

प्रयोग – बड़ा साहसी बनता था, पर भूत का नाम सुनते ही सर्द हो गया।

482. सरकारी मेहमान – कैदी

प्रयोग – मुन्ना झूठे आरोप में ही सरकारी मेहमान बन गया।

483. साँप लोटना – ईर्ष्या आदि के कारण अत्यन्त दुःखी होना

प्रयोग – राजू की सरकारी नौकरी लग गई तो पड़ोसी के साँप लोट गया।

484. सिर ऊँचा उठाना – इज्जत से खड़ा होना

प्रयोग – अपनी ईमानदारी के कारण मुन्ना समाज में आज सिर ऊँचा उठाए खड़ा है।

485. सिर पर पाँव रख कर भागना – बहुत तेजी से भाग जाना

प्रयोग – पुलिस को देख कर डाकू सिर पर पाँव रख कर भाग गए।

486. सिर पर आ जाना – बहुत नजदीक होना

प्रयोग – परीक्षा मेरे सिर पर आ गयी है, अब मुझे खूब पढ़ना चाहिए।

487. साँप सूँघ जाना – हक्का बक्का रह जाना

प्रयोग – बहुत गुंडागर्दी कर रहे थे, अब थानेदार साहब को देखकर क्यों साँप सूँघ गया?

488. सुईं का भाला बनाना – छोटी-सी बात को बढ़ाना

प्रयोग – इस मामले को यहीं समाप्त करो। इतनी-सी बात का सुईं का भाला मत बनाओ।

489. सितारा चमकना या बुलंद होना – सौभाग्य के दिन आना

प्रयोग – इन दिनों इंदिराजी का सितारा चमक रहा है, बुलंद है।

490. सुबह का चिराग होना – समाप्ति पर आना

प्रयोग – वह बहुत दिनों से बीमार है। उसे सुबह का चिराग ही समझो।

ह – से मुहावरे

491. हाथ पैर मारना – काफी प्रयास

प्रयोग – राम कितना मेहनत क्या फिर भी वह परीक्षा में सफल नहीं हुआ।

492. हाथ मलना – पछताना

प्रयोग – समय बीतने पर हाथ मलने से क्या लाभ ?

493. हवा उड़ना – खबर या अफवाह फैलाना

प्रयोग – एक बार हमारे गाँव में हवा उड़ी थी कि एक पहुँचे हुए महात्मा आए हैं, जो कि सच थी।

494. हवा बिगड़ना – पहले की सी धाक या मर्यादा न रह जाना

प्रयोग – आजकल पुराने रईसों की हवा बिगड़ गई है।

495. हाथ पर हाथ धरे बैठना – कुछ कामकाज न करना

496. हाथ भर का कलेजा होना – बहुत खुश होना

प्रयोग – अच्छी नौकरी मिलने से राम का हाथ भर का कलेजा हो गया है।

497. हाथ पैर फूल जाना – बहुत ज्यादा काम पढ़ जाना।

प्रयोग – किचिन में थोड़ा-सा काम क्या बढ़ जाता है, मेरी पत्नी के तो हाथ-पैर फूल जाते हैं।

498. हाथपाई होना – मारपीट होना

प्रयोग – मेरी क्लास के दो बच्चों में आज हाथपाई हो गई और दोनों को चोट लग गई।

499. हुक्का पानी बंद करना – जाति से बाहर कर देना

प्रयोग – रमाकांत की बेटी ने अंतर्जातीय विवाह किया तो सारे गाँव के लोगों ने उसका हुक्का-पानी बंद कर दिया।

500. हौसला बढ़ाना – हिम्मत बढ़ाना

प्रयोग – अध्यापकों को चाहिए कि वे बच्चों का हौसला बढ़ाते रहें तभी बच्चे कुछ अच्छा कर पाएँगे।

आशा करती हूं कि आपको हिंदी मुहावरे कि यह पोस्ट पसंद आएगी क्योकि इस पोस्ट के अंतर्गत आपको हिंदी वर्णमाला से सम्बंधित सभी मुहावरों के अर्थ और वाक्य में प्रयोग आसानी से मिल जाएंगे।

मुहावरे से संबंधित कोई भी प्रश्न है तो कमेंट में जरूर पूछे

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