न्यूटन के गति के नियम

न्यूटन के गति के नियम | Law of Motion in Hindi

Last Updated on May 13th, 2020 by Bhupendra Singh

नमस्कार छात्रों आशा करती हूं कि आप लोग अच्छे होंगे आज इस पेज पर हम भौतिक विज्ञान का दूसरा महत्वपूर्ण टॉपिक न्यूटन के गति के नियम को विस्तार पूर्वक पड़ेंगे और आसानी से समझेंगे।

इस पेज पर न्यूटन ने गति के 3 नियमों का प्रतिपादन किया हैं जिसका हम विस्तार पूर्वक अध्ययन करेंगे।

चलिए गति के नियम को पढ़ना शुरू करते है।

न्यूटन का गति नियम

भौतिकी के पिता न्यूटन ने सन 1687 ई. में अपनी पुस्तक प्रिंसिपिया में सबसे पहले गति के 3 नियमों को प्रतिपादित किया था।

1. न्यूटन के गति का प्रथम नियम

न्यूटन के अनुसार जब कोई वस्तु विराम अवस्था में हैं तो वह विराम अवस्था में ही रहेगी या यदि वह एकसमान चाल से सीधी रेखा में चल रही हैं तो वैसी ही चलती रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल लगाकर उसकी वर्तमान अवस्था में परिवर्तन न किया जाए।

प्रथम नियम को गैलीलियो का नियम या जड़त्व का नियम भी कहते हैं। “प्रथम नियम से बल की परिभाषा भी मिलती हैं।”

बल की परिभाषा

बल वह बाह्य कारक हैं जो किसी वस्तु की प्रारंभिक अवस्था में परिवर्तन करता हैं या परिवर्तन करने की चेष्टा करता हैं बल एक सदिश राशि हैं।

जड़त्व के कुछ उदाहरण

  • ठहरी हुई मोटर या रेलगाड़ी के अचानक चल पड़ने पर उसमें बैठे यात्री पीछे की ओर झुक जाते हैं।
  • चलती हुई मोटरकार के अचानक रुकने पर उसमें बैठे यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं।
  • कम्बल को हाथ से पकड़ कर डण्डे से पीटने पर धूल के कण झड़कर गिर पड़ते हैं।

2. न्यूटन के गति का द्वितीय नियम

किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस वस्तु पर आरोपित बल के समानुपाती होता हैं तथा संवेग परिवर्तन बल की दिशा में होता हैं।

अब यदि आरोपित बल F बल की दिशा में उतपन्न त्वरण a एवं वस्तु का द्रव्यमान m हो, तो न्यूटन के गति के दूसरे नियम से F = ma अर्थात न्यूटन के दूसरे नियम से बल का व्यंजक प्राप्त होता हैं।

संवेग (Momentum)

किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा वेग के गुणन फल को उस वस्तु का संवेग कहते हैं।

संवेग = वेग × द्रव्यमान

यह एक सदिश राशि हैं इसका S.I. मात्रक किग्रा. × मीटर / सेकण्ड हैं।

उदाहरण

  • क्रिकेट खिलाड़ी तेजी से आती हुई गेंद को पकड़ते समय अपने हाथों को पीछे की ओर खीच लेते है, ताकि गेंद का वेग कम किया जा सके इससे चोट भी कम लगती हैं।
  • तेज घुमती हुई गेंद में उसके वेग के कारण संवेग की मात्रा अधिक होती हैं इसलिए गेंद में काफी बल होता है, गेंद पकड़ के हाथ पीछे खींचने से गेंद में संवेग परिवर्तन की दर कम हो जाती हैं इस कारण तेज गति से आ रही गेंद का प्रभाव हाथ पर कम पड़ता हैं।

3. न्यूटन के गति का तृतीय नियम

प्रत्येक क्रिया के बराबर, परंतु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती हैं।

न्यूटन के तृतीय नियम को क्रिया – प्रतिक्रिया का नियम कहते हैं।

उदाहरण

  • बन्दूक से गोली चलाने पर चलाने वाले को पीछे की ओर धक्का लगना।
  • नाव से किनारे पर कूदने पर नाव को पीछे की ओर हट जाना।
  • रॉकेट को उड़ाने में।

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