BAL KISE KAHTE HAI

बल की परिभाषा, प्रकार, विमीय सूत्र, मात्रक और उदाहरण

इस पेज पर आप बल की परिभाषा, विमीय सूत्र, मात्रक और बल के प्रकारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी पड़ेगे तो विज्ञान की सभी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।

आप सभी को बल के वाले में जानकारी होना जरूरी हैं क्योंकि छटवीं से ले कर बारवीं तक विज्ञान की जितनी भी परीक्षाएं होती हैं एक प्रश्न बल का जरूर ही आता हैं यदि आप इस पोस्ट को पूरा पड़ेंगे तो बल के बारे में अच्छे से समझ पाएंगे और सभी प्रश्नों के उत्तर अच्छे से दे पाएंगे।

बल किसे कहते है?

बल वह कारक होता है जो किसी भी रुकी हुई अथवा थमी हुई वस्तु में परिवर्तन ला सकता है।

दूसरे शब्दों में बल वह बाह्य कारक हैं जो किसी वस्तु की प्रारंभिक अवस्था में परिवर्तन करता हैं या परिवर्तन करने की चेष्टा करता हैं।
बल एक सदिश राशि हैं इसका S.I. मात्रक न्यूटन हैं।

जब कोई वस्तु किसी भी सीधे रस्ते पर चल रही होती है तो उसे रोकने के लिए या उसकी गति को और तेज करने के लिए जिस कारक का उपयोग किया जाता है उसे ही बल कहते है।

बल का विमीय सूत्र

बल का विमाय सूत्र = [M L T-2] होता हैं।

बल का मात्रक

बल का S.I मात्रक न्यूटन (N) है।

बल एक सदिश राशि है, इसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।

जरूर पढ़िए

बल (force) के प्रकार

1. घर्षण बल (Friction force)

यह वह बल है जो किसी वस्तु की गति की दिशा के विपरीत दिशा में कार्य करता है यह दो सतहों के बीच कार्य करता है।

उदाहरण:

  • जब हम चलते हैं तो यह बल हमारे चप्पल या जूते और धरती के बीच कार्य करता है।
  • जब सड़क पर कोई कार दौड़ती है तो यह बल सड़क और कार के टायर के बीच कार्य करता है।

घर्षण बल को कम करना (Reducing the friction force)

घर्षण बल को कम करने के लिए हम निम्न चीजों का उपयोग करते हैं

  1. चिकनी गोली
  2. चिकनी समतल
  3. समतल की सतह पर चिकनाई युक्त पदार्थ का उपयोग

2. अभिकेन्द्रीय बल (Centripital force)

जब कोई वस्तु वृतीय पथ पर गति करता है तो उसके केंद्र से उस पर एक बल लगता है जो उसे प्रत्येक बिंदु पर केंद्र की ओर खींचता है | इस बल को अभिकेन्द्रीय बल कहते हैं |

जैसे : सूर्य के चारो ओर पृथ्वी की गति।

3. चुम्बकीय बल (Magnetic force)

चुम्बक द्वारा किसी चुम्बकीय धातु पर लगाया गया बल चुम्बकीय बल कहलाता है अथवा विद्युत चुम्बक द्वारा अपने चारों फैले चुम्बकीय क्षेत्र में चुम्बकीय धातु द्वारा बल का अनुभव करना।

4. गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational force)

दो पिंडो के बीच लगने वाले बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते है। जैसे – पृथ्वी और सूर्य के बीच लगने वाला बल।

बल की प्रबलता के आधार पर बल 

बल की प्रबलता के आधार पर बल दो प्रकार के होते है

  • संतुलित (balanced force)
  • असंतुलित (unbalanced force)

1. संतुलित बल (balanced force)

यदि कोई भी वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का परिणामी बल शून्य हो तो उस वस्तु पर लगने वाले सभी संतुलित बल कहलाते हैं।

2. असंतुलित बल(unbalanced force)

असंतुलित बल वह बल होता है जिसमे प्रस्ताव होता है जैसे की किसी रस्सी को दोनों तरफ से खींचा जाए और वह एक तरफ के लोगो को दूसरी तरफ ले आए।

यदि हम संतुलित बलों से शुरू करें और तब उनमें किसी एक बल को बढ़ा या घटा दे तो परिणामी बल शून्य नहीं रह जायेगा और वस्तु उस बढ़े हुए बल की दिशा में गति करना प्रारम्भ कर देगी, अथार्थ उसमे त्वरण उत्पन्न हो जायेगा। इस स्तिथि में बल असंतुलित हो जायेगा जिसे असंतुलित बल कहा जायेगा।

उदहारण:

  • दरवाजे को खोलने या बंद करने के लिए खीचना अथवा धकेलना।
  • चलती हुई वाहन को रोकने के लिए ब्रेक लगाना।
  • किसी रुकी हुई वस्तु को धक्का मारना जिससे की वह चलने लगे।
  • किसी भी वस्तु को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना।
  • ऊपर से गिरती हुई कोई वस्तु गुरुत्वाकर्षण की वजह से जमीन पे आ गिरती है यह भी बल है।
  • तराजू का एक तरफ झुक जाना आदि।

गति के नियम

गति के नियम को प्रस्तुत करने का श्रेय महान वैज्ञानिक सर आइजक न्यूटन को जाता है। इन्होने ने गति के तीन नियम दिए जिसे न्यूटन का गति का नियम कहा है।

  • गति का प्रथम नियम
  • गति का द्वितीय नियम
  • गति का तृतीय नियम

इस पेज पर आपने बल की परिभाषा, विमीय सूत्र, मात्रक और बल के प्रकारों संतुलित बल और असंतुलित बल के बारे में सम्पूर्ण जानकारी को पढ़ा मुझे उम्मीद हैं कि आपको ये पोस्ट पसंद आई होगी आप इस आर्टिकल को पढ़कर बल के बारे में अच्छे से जान गए होंगे।

यदि आपको बल के बारे में जानकारी प्राप्त हो गई हैं तो आपका कर्तव्य हैं कि अपने दोस्तों तक भी इस पोस्ट को शेयर करें जिससे उनको भी बल के बारे में सभी स्पष्ट पता हो।

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