भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन

भारत में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों का आगमन

इस पेज पर आप सामान्य ज्ञान के महत्वपूर्ण अध्याय भारत में यूरोपीय कम्पनियों का आगमन कब और कैसे हुआ इससे सम्बंधित समस्त जानकारी विस्तार पूर्वक पड़ेगें।

पिछले पेज पर हम सामान्य ज्ञान के अध्याय संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की जानकारी शेयर कर चुके है उसे भी जरूर पढ़े।

तो चलिए अब यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों के आगमन की जानकारी को पढ़कर समझते है।

भारत में यूरोपीय कम्पनियों का आगमन

भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक संम्पन्नता, आध्यात्मिक उपलब्धियाँ, दर्शन, कला आदि प्रभावित होकर मध्यकाल में बहुत से व्यापारियों एवं यात्रियों का आगमन हुआ सबसे पहले भारत में यूरोपीय पुर्तगाली कम्पनी ने सबसे पहले प्रवेश किया।

पुर्तगालियों के पश्चात डच भारत आए ये नीदरलैंड एवं हॉलैंड के निवासी थे डच के बाद भारत में अंग्रेजों का आगमन हुआ उसके बाद फ्रांसीसी भारत आए तो चलिए सभी के बारे में विस्तार पूर्वक पढ़ते हैं।

भारत में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों का आने के क्रम को याद रखने का आसान तरीका

पुर्तगालीयों का आगमन

  • सर्वप्रथम पुर्तगाली भारत पँहुचे थे।
  • 17 मई 1498 ई0 को वास्को-डि-गामा ने भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कालीकट (केरल) बन्दगाह पर पहुँचकर भारत तथा यूरोप मध्य नए समुद्र मार्ग की खोज की।
  • वास्को-डी-गामा की सहायता गुजराती व्यापारी अब्दुल मजीद ने की।
  • 1499 में वास्को-डी-गामा स्वदेश लौट गया और उसके वापस पहुँचने के बाद ही लोगों को भारत के सामुद्रिक मार्ग की जानकारी मिली।
  • सन् 1500 में पुर्तगालियों ने कोचीन (केरल) के पास अपनी कोठी बनाई।
  • 1502 ई0 में कोचीन में प्रथम व्यापारिक कोठी की स्थापना की।
  • 1505 ई0 प्रथम पुर्तगाली वायसराय फ्रांसिस्को द अल्मेडा भारत आया।
  • इसके बाद सन् 1509 ई0 में अलफांसो द अल्बुकर्क दूसरा पूर्तगाली वायसराय बना।
  • 1510 में पुर्तगालियों ने गोवा पर अपना अधिकार कर लिया तथा उसे अपना प्रशासनिक केंद्र बनाया।
  • पुर्तगालियों के भारतीय क्षेत्र का पहला वायसऱय डी-अल्मोड़ा था।
  • उसके बाद (अल्फांसो डी अल्बूकर्क) पुर्तगालियों का वॉयसराय नियुक्त हुआ।
  • उसने 1510 में कालीकट के शासक जमोरिन का महल लूट लिया।
  • सन् 1571 में बीजापुर, अहमदनगर और कालीकट के शासकों ने मिलकर पुर्तगालियों को निकालने की चेष्टा की पर वे सफल नहीं हुए।
  • 1579 में वे मद्रास के निकच थोमें, बंगाल में हुगली और चटगाँव में अधिकार करने मे सफल रहे।
  • 1580 में मुगल बादशाह अकबर के दरबार में पुर्तगालियों ने पहला ईसाई मिशन भेजा।
  • अल्बूकर्क नें गोवा को बीजापुर के यूसूफ आदिल शाह को हरा कर जीता।
  • पुर्तगालीयों ने गोवा, दमन, दीव, साषअटी, बसर्ड चौल, बंबई, सेंट थोम और हुगली में अपनी बस्तियाँ बसाई।

डचो का आगमन

  • पुर्तगालियो के बाद भारत में डचो का आगमन हुआ।
  • 1578 में सर फ्रांसिस ड्रेक नामक एक अंग्रेज़ नाविक ने लिस्बन जाने वाले एक जहाज को लूट लिया।
  • इस जहाज़ से उसे भारत जाने वाले रास्ते का मानचित्र मिला।
  • पहला डच अषेवेण कर्ता कार्नेलियन हाऊटमैन पूर्वी रास्ते से सन् 1596 ई0 में भारत पँहुचा।
  • 31 दिसम्बर सन् 1600 को कुछ व्यापारियों ने इंग्लैँड की महारानी एलिज़ाबेथ को ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना का अधिकार पत्र दिया।
  • डचों ने भारत में अपनी प्रथम व्यापारिक कोठी (फैक्ट्री) 1605 ई0 में मसूलीपट्टम में स्थापित की।
  • डचों की दूसरी व्यापारिक कोठी पुलीकट में स्थापित की।
  • उन्होंने अपने स्वर्ण सिक्के को ढाला और पुलीकट को ही अपना केन्द्र बनाया।
  • इनकी प्रमुख बस्ती पुलीकट, सूरत, कारिकल, पटना, बालासोर अन्य प्रमुख बस्तियाँ थी।
  • डचो ने पहली बार वेतन पर मजदूरों को रखा।
  • पुर्तगालियों को अंग्रेजों ने 1611 में जावली की लड़ाई (सूरत) में पराजित कर दिया।
  • सर थॉमस रो को इंग्लैंड के शासक जेम्स प्रथम ने अपना राजदूत बनाकर जहाँगीर के दरबार में भेजा।
  • इसके बाद बालासोर (बालेश्वर), हरिहरपुर, मद्रास (1633), हुगली (1651) और बंबई (1688) में अंग्रेज कोठियाँ स्थापित की गईं।
  • डचों का भारत में से अन्त वेदरा के युध्द (1759ई0) के उपरान्त ही हो गया।
  • डच व अंग्रेजो की बीच लड़ा गया जिसमें डचों की हार हुई। तथा वह भारत छोड़ने को विवश हुये।

अंग्रेजो का आगमन

  • 1600 ई0 में महारानी एलिजाबेथ प्रथम से प्राप्त चार्टर एक्ट से ईस्ट इंड़िया कम्पनी की स्थापना हुई।
  • 1609 ई0 में पहली बार मुगल दरबार में आने वाला अंग्रेज कैप्टन हांकिन्स था।
  • अंग्रेज कैप्टन हांकिन्स ने तत्कालीन मुगल स्रमाट जहांगीर से अपनी पहली फैक्टी सूरत में खोलने के लिये उसकी इजाजत माँगी।
  • सन् 1613 ई0 में मुगल बादशाह जहाँगीर द्वारा एक फरमान जारी किया गया जिसके जरिये अंग्रेजो को सूरत में अपनी पहली व्यापारिक कोठी खोलने की स्वीकृति दे दी गई।
  • जेम्स प्रथम का राजदूत बनकर सर टाँमस रो मुगल स्रमाट जहाँगीर के दरबार में आया।
  • सन् 1615 ई0 से 1619 ई0 तक जहाँगीर के दरबार में रहा जहा उसने अंग्रेजो के हित में कई व्यापारिक सफलताये प्राप्त कराई।
  • सन् 1611 ई0 में अंग्रेजो ने अपनी दक्षिण-पूर्वी तट पर पहली कोठी (फैक्ट्री) मुसलीपट्टनम् में स्थापित की ।
  • 1661 ई0 में इंग्लैण्ड के राजा चार्ल्स द्वतीय को पुर्तगालियों ने अपनी पत्नी ब्रेगोजा की कैथरीन के दहेज के रुप में बंबई मिली थी।
  • 1632 ई0 में गोलकुण्डा के सुल्तान ने अँग्रेजो को एक सुनहरा फरमान दे दिया
  • अंग्रेज सुल्तान को 500 पैगोडा वार्षिक देकर गोलकुण्डा राज्य के बन्दरगाह पर स्वतंत्रता पूर्वक व्यापार कर सकते थे।
  • 1639 ई0 अंग्रेज अधिकारी फ्रांसिस डे ने मद्रास के राजा चन्द्रगिरि से मद्रास को पट्टे पर ले लिया तथा यही एक किला बन्द कोठी का निर्माण कराया गया।
  • जिसे फोर्ट सेन्ट जार्ज के नाम से जाना जाने लगा तथा यह अंग्रेजो का मुख्यालय बन गया। फ्रासिस डे को चेन्नई स्थांपक कहा जाता है।
  • जाँब चारनाक ने कलकत्ता की नींव रखी। यहाँ की नवीन किलाबन्दी फोर्ट विलियम कहलाई।
  • गैराल्ड औगियर ने 1669-1677ई 0 सूरत व बम्बई प्रेसीडेन्ट का गर्वनर रहा इनसे बम्बई शहर की स्थापना की।

फ्राँसीसियों का आगमन

  • 1664 ई0 में कोलबर्ट के अनुरोध पर कपंनी द इंडीज ओरिएंटल की स्थापना हुई।
  • भारत में फ्रांसीसियों की प्रथम कोठी फ्रैंको कैरों के द्वारा सूरत में 1668 ई0 में स्थापित की गयी थी।
  • 1674ई0 में पांडिचेरी की स्थापना का श्रेय फ्रांसिस मार्टिन को दिया जाता है।
  • प्रथम कर्नाटक युध्द – अंग्रेजो व फांसीसियों के मध्य आस्ट्रिया के उत्तराधिकार को लेकर हुआ।
  • इसमें ए-ला-शापल की संधि के द्वारा आस्ट्रिया का उत्तराधिकार विवाद समाप्त हो गया और इसी संधि के तहत प्रथम कर्नाटक युध्द की भी समाप्ति हो गई।
  • दूसरा कर्नाटक युध्द – 1749 ई0 से 1754 ई0 के बीच हुआ।
  • इस युध्द में फ्रासीसी गर्वनर डुप्ले की हार हुई। उसे फ्रांस वापस बुला लिया गया तथा उसके स्थान पर गोडेहू को भारत में अगले गर्वनर के रुप में भेजा गया।
  • पांडेचेरी की संधि से इस युध्द की समाप्ति हुई।
  • तीसरा कर्नाटक युध्द – यह युध्द 1756ई0- 1763ई0 के बीच लड़ा गया। इस सप्तवर्षीय युध्द की समाप्ति पेरिस की संन्धि होने पर हुई।
  • 1760 ई0 में अंग्रेजो ने फाँसीसियों को वाडिवाश की लड़ाई में बूरी तरह हरा दिया था।
  • जिसके बाद फ्रांसीसी कभी कभी अंग्रेजो की राह रोड़ा नहीं बन सके तथा धीरे-धीरे भारत की राजनीति में दखल देने लगे तथा कालांन्तर में भारत की गध्दी पर भी बैठे।
  • 1761 ई0 में अंग्रेजो ने पाँडिचेरी को फ्रांसीसियों से छीन लिया।
  • 1763 ई0 में हुई पेरिस संधि द्वारा अंग्रेजो ने चन्द्रनगर को छोडकर फ्रासीसियों के सभी प्रदेश उनको वापस कर दिये।
  • सन् 1749 ई0 तक फ्रासीसीयो के कब्जे में थे। ये प्रदेश भारत की आजादी तक फ्रांसीसीयों पर बने रहे तथा भारत के आजाद होने पर ही यह उनसे छीने गये।
कम्पनीस्थापना वर्ष
पुर्तगाली ईस्ट इंडिया कम्पनी1498 ई0
अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कम्पनी1600 ई0
डच ईस्ट इंडिया कम्पनी1602 ई0
डैनिश ईस्ट इंडिया कम्पनी1616 ई0
फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कम्पनी1664 ई0
स्वीडिश ईस्ट इंडिया कम्पनी1731 ई0

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