कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी क्या हैं

हेलो दोस्तों, इस पेज पर आप कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी क्या हैं इसके बारे में समस्त जानकारी पढ़ने वाले हैं तो चलिए कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी की जानकारी पढ़ते और समझते हैं।

कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी क्या हैं

कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी को कार्बन सिक्वेस्ट्रेशन भी कहा जाता है। यह कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर करने की प्रक्रिया हैं।

जिसमें वायुमंडल में उपस्थित या फैक्ट्री और चिमनियों से निकलने वाले कार्बन गैस को कैप्चर करके उसे अलग-अलग जगहों पर लिक्विड स्टेट में स्टोर किया जाता हैं।

यह एक ऐसी विधि है जो वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को कम करती है। जिसका उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को कम करना हैं।

इसका उद्देश्य वातावरण में ग्रीनहाउस गैस की मात्रा को स्थिर करना और मानव ‘कार्बन फुटप्रिंट’ को कम करना है। यह एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन मानवजनित गतिविधियों से भी हो सकती हैं।

कार्बन डाइऑक्साइड क्या है?

कार्बन डाइऑक्साइड एक ग्रीनहाउस गैस है। यह मानव और प्राकृतिक दोनों गतिविधियों के परिणामस्वरूप हो सकती हैं।

प्राकृतिक या जैविक कार्बन डाइऑक्साइड कार्बनिक पदार्थों के विघटन जैसे भूमि-उपयोग में परिवर्तन और जंगल की आग से उत्पन्न होता हैं।

जबकि मानव निर्मित कार्बन डाइऑक्साइड ऊर्जा पैदा करने वाली प्रक्रियाओं जैसे कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस को जलाने से बन सकता हैं।

कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन कैसे काम करता हैं

यह इस्तेमाल किए गए कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन के प्रकार पर निर्भर करता हैं।

हालांकि, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों द्वारा चर्चा की जाने वाली तकनीकों में से एक कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (CCS) हैं।  

यह एक जियोइंजीनियरिंग प्रक्रिया है जहां कार्बन डाइऑक्साइड को पहले उद्योगों से उत्सर्जन से निकले अन्य गैसों से अलग किया जाता हैं।

फिर इसे एक ऐसे स्थान पर ले जाया जाता है जहां इसे लंबे समय तक स्टोर करने के लिए वातावरण से सुरक्षित रूप से अलग किया जाता हैं।   

एक बार जब कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर कर लिया जाता है और ले जाया जाता है, तो इसे अन्य स्थानों जैसे भूमि के भीतर गहरे स्थान में स्टोर किया जाता हैं।  

कार्बन कैप्चर के प्रकार

कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं।

1. जैविक कार्बन कैप्चर

यह आमतौर पर घास के मैदानों और जंगलो के साथ-साथ मिट्टी और महासागरों में कार्बन डाइऑक्साइड का स्टोरेज है। जिसमे कार्बन को नदियों, महासागरों, मिट्टी और जंगलों में स्टोर किया जाता है।

(a). महासागरों में :- महासागर प्रत्येक वर्ष मानवीय गतिविधियों के माध्यम से उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड का लगभग 25% अवशोषित करते हैं।

जब महासागर कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं, तो इसका परिणाम नकारात्मक होता हैं।

समुद्र के ठंडे हिस्से समुद्र के गर्म हिस्सों की तुलना में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं।

जैसे, ध्रुवीय क्षेत्र अधिक कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं।

(b). वनों में :- वनों और घास के मैदानों जैसे पौधे कार्बन उत्सर्जन का लगभग 25% अवशोषित करते हैं।

जब पेड़, शाखाएं और पत्ते मर जाते हैं और जमीन पर गिर जाते हैं, तो वह मिट्टी में जमा कार्बन को छोड़ देते हैं। 

2. भूवैज्ञानिक कार्बन कैप्चर

यह वह जगह है जहां कार्बन डाइऑक्साइड को भूमिगत संरचनाओं में जमा किया जाता है। जैसे चट्टानों में इस तरह के कार्बन कैप्चर और स्टोरेज जीवाश्म ईंधन देते हैं। 

3. तकनीकी कार्बन कैप्चर

यह कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़ने और स्टोर करने का एक नया तरीका है और वैज्ञानिकों द्वारा इसका पता लगाया जाना जारी हैं। 

यह विधि नई तकनीकों का उपयोग करती है, जिसका मतलब है कि वैज्ञानिक कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण से हटाने और इसे कहीं और स्टोर करने के बजाय संसाधन के रूप में उपयोग करने के अधिक तरीकों की तलाश कर रहे हैं।

(a). ग्राफीन उत्पादन :- कार्बन डाइऑक्साइड से ग्रेफीन को कच्चे माल के रूप में बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा हैं। 

ग्राफीन एक तकनीकी चीज है, जिसका उपयोग स्मार्टफोन और अन्य तकनीकी डिवाइस के लिए स्क्रीन बनाने के लिए किया जाता हैं।   

कार्बन कैप्चर के उदाहरण

1. प्रकाश संश्लेषण :- यह वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे और पेड़ वृद्धि के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित और स्टोर करते हैं। 

बदले में वह ऑक्सीजन छोड़ते हैं। यह विधि वातावरण में ऑक्सीजन बनाने में सहयोग करती है और पौधों और पेड़ों को बढ़ने में मदद करती है

2. सेंचुरी प्लांट :- यह दुनिया का सबसे बड़ा कार्बन कैप्चर और स्टोरेज प्लांट हैं। 

यह संयुक्त राज्य अमेरिका के वेस्ट टेक्सास में पेकोस काउंटी में स्थित है, और नवंबर 2010 में इसको शुरू किया गया था। 

कार्बन कैप्चर पर्यावरण की मदद कैसे करता हैं 

1. यह हमें अधिक पेड़ लगाने और वनों को संरक्षित करने के लिए प्रेरित करता हैं। 

2. यह ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में मदद करता हैं।   

3. यह समुद्र के अम्लीकरण को कम करता हैं। 

4. कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने में मदद करता हैं। 

कृत्रिम कार्बन कैप्चर की चुनौतियाँ

कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी के सामने आज कई चुनौतिया है जिस कारण इस तकनीक में विकास करने में रुकावट हो रही हैं। 

1. तकनीक की कमी :- भले ही आज तकनीक बहुत विकसित हो गई है। लेकिन आज कई ऐसे कार्य है जो तकनीक के अभाव में पूरा नहीं हो पा रहा है। उन्ही में से एक कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी है जिसका विकास तकनीक के अभाव में नहीं हो पा रहा हैं। 

2. अधिक लागत :- इस टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए अधिक खर्च होता है।

Elon Musk
Elon Musk

दुनिया के सबसे अमीर आदमी में से एक Elon Musk ने इस बात की घोषणा की।

“जो भी व्यक्ति एक ऐसी तकनीक का अविष्कार करेगा जो कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी पर काम करेगी उसको 100 मिलियन डॉलर का इनाम मतलब लगभग 730 करोड़ का इनाम देंगे”। 

3. पर्यावरण चिंताएँ :- कार्बन डाइऑक्साइड को गहरे भूमि में स्टोर किया जाता है। जिसके कई बुरे परिणाम हो सकते हैं।

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