प्रकाश का अपवर्तन क्या हैं इसके नियम और अंतर

इस पेज पर हम प्रकाश का अपवर्तन की समस्त जानकारी पढ़ने वाले हैं तो पोस्ट को पूरा जरूर पढ़िए।

पिछले पेज पर हमने न्यूटन के गति के नियम की जानकारी शेयर की हैं तो उस आर्टिकल को भी पढ़े।

चलिए आज हम प्रकाश का अपवर्तन क्या हैं इसके नियम, प्रकार एवं प्रकाश का परावर्तन कैसे होता है की समस्त जानकारी पड़ेगें।

प्रकाश का अपवर्तन क्या है

जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करती है तो दोनों माध्यमों को अलग करने वाले तल पर आपतित होने पर बिना मुड़े सीधे निकल जाती है लेकिन तिरछी आपतित होने पर वह अपनी मूल दिशा से विचलित हो जाती है। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।

जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम जैसे हवा से पानी में प्रवेश करती है तो वह दोनों माध्यमों के बीच खींचे गए अभिलंब की ओर झुक जाती है तथा जब किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है तो वह अभिलंब से दूर हट जाती है। लेकिन जो किरण अभिलंब के समांतर में प्रवेश करती है उनके पथ में कोई परिवर्तन नहीं होता है और वह बिना झुके सीधी निकल जाती है।

प्रकाश के अपवर्तन के नियम

prakash ka apvartan
प्रकाश के अपवर्तन

अपवर्तन के दो नियम हैं।

  • आपतित किरण, अपवर्तित किरण, और आपतन बिंदु तीनों एक ही समतल में स्थित होते हैं।
  • आपतन कोण की ज्या तथा अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात एक नियतांक होता है। इसे स्नेल के अपवर्तन के नियम के रूप में भी जाना जाता है।

प्रकाश के अपवर्तन के कारण घटने वाली घटनाएं

1. रात के समय तारों का टिमटिमाना :- वायुमंडल में वायु का घनत्व अलग-अलग परतो में पाई जाती है। जब तारों से प्रकाश चलता है तो उसका विभिन्न परतों से लगातार अपवर्तन होते रहता है। क्योंकि वायु की परतें स्थिर नहीं होती है इसलिए हमें यह महसूस होता है कि तारे टिमटिमा रहे हैं।

2. पानी से भरे किसी बर्तन में सिक्का ऊपर दिखाई देना :- पानी से भरे किसी बर्तन की तली में पड़ा हुआ सिक्का ऊपर उठा हुआ दिखाई पड़ता है। इसका कारण यह है कि जब हम बर्तन में पानी डालते हैं तो अपवर्तन के कारण सिक्का कुछ ऊपर उठा हुआ प्रतीत होता है।

3. अपवर्तन के कारण ही पानी के अंदर पड़ी हुई मछली उसकी वास्तविक गहराई से कुछ ऊपर उठी हुई दिखाई पड़ती है।

4. सूर्योदय के कुछ समय पहले और सूर्यास्त के कुछ समय बाद तक सूर्य क्षितिज के नीचे होने पर भी हमें दिखाई देता है। यह घटना भी अपवर्तन के कारण ही होती है।

प्रकाश के अपवर्तन को प्रभावित करने वाले कारण

प्रकाश के अपवर्तन को निम्नलिखित कारण प्रभावित कर सकते हैं।

माध्यम पर घनत्व :- माध्यम का घनत्व प्रकाश के अपवर्तन को प्रभावित करता है। जब माध्यम का घनत्व कम होता है, तो यह प्रकाश को ज्यादा अपवर्तित नहीं करता है। सघन माध्यम प्रकाश को अपवर्तित करता है क्योंकि यह प्रकाश के वेग को धीमा कर देता है जिससे अपवर्तन होता है।

तापमान और दबाव :- तापमान और दबाव के प्रभाव को उच्च और निम्न ऊंचाई पर हवा के अपवर्तनांक में अंतर से समझा जा सकता है।

उच्च ऊंचाई पर, जहां तापमान और दबाव कम होता है, हवा का घनत्व कम होता है और इसलिए यह कम ऊंचाई की तुलना में प्रकाश को बहुत कम अपवर्तित करता है।

प्रकाश की तरंग दैर्ध्य :- प्रकाश में 7 प्रमुख रंग होते हैं। इन रंगों में अलग-अलग तरंग दैर्ध्य होते हैं। जब प्रकाश माध्यम से होकर गुजरता है, तो जिस रंग का तरंगदैर्घ्य कम होता है, उसका अपवर्तन कम होता है और जिस रंग का तरंगदैर्घ्य अधिक होता है वह अधिक अपवर्तित होता है।

अपवर्तनांक क्या हैं

एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर प्रकाश की किरण के मुड़ने का परिमाण पहले माध्यम की तुलना में दूसरे माध्यम में प्रकाश की चाल पर निर्भर करता है।

किसी माध्यम की प्रकाश की किरण की दिशा को बदलने की क्षमता को उसका अपवर्तनांक कहते हैं। 

किसी माध्यम का अपवर्तनांक शून्य में प्रकाश की चाल और उस माध्यम में प्रकाश की चाल के अनुपात को कहते हैं।

अर्थात यदि हमें किसी माध्यम का अपवर्तनांक ज्ञात करना है तो उसके लिए शून्य में प्रकाश की चाल को उस माध्यम में प्रकाश की चाल से भाग देना होगा।

सूत्र :- 

किसी माध्यम का अपवर्तनांक (n) =  शून्य में प्रकाश की चाल ( c) / उस माध्यम में प्रकाश की चाल (cm)

वायुमंडलीय अपवर्तन क्या है

पृथ्वी के वायुमंडल में प्रकाश के अपवर्तन को वायुमंडलीय अपवर्तन कहते हैं। अपवर्तन के कारण तारों का टिमटिमाना और सूर्योदय तथा सूर्यास्त के आभासी समय की घटनाएं होती हैं।

परावर्तन और अपवर्तन के बीच अन्तर

परावर्तनअपवर्तन
जब प्रकाश किसी चिकनी सतह से टकराता है तो वह परावर्तन कहलाता हैं। अपवर्तन प्रकाश किरणों का झुकना है जब यह एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाती हैं।
परावर्तन आम तौर पर चमकदार सतहों पर होता है जो केवल प्रकाश को इसके माध्यम से प्रवेश की अनुमति के बिना ही पुन: उत्पन्न करने की अनुमति देता हैं। अपवर्तन पारदर्शी सतहों में होता है जो किरण को एक अलग माध्यम में झुकने की अनुमति देता हैं।
परावर्तन के दो रूप होते हैं। नियमित परावर्तन (स्पेक्युलर रिफ्लेक्शन) और डिफ्यूज्ड रिफ्लेक्शन। अपवर्तन का एक ही रूप होता हैं।
परावर्तन की घटना दर्पण में होती हैं। अपवर्तन की घटना लेंस में होती हैं।
परावर्तन की प्रक्रिया में प्रकाश वापस लौटता है और उसी दिशा में वापस लौटता हैं। अपवर्तन की प्रक्रिया में प्रकाश पथ बदलता है अर्थात एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता हैं।
जब कोई प्रकाश किरण किसी चमकदार सतह की सीमा से टकराती है तो प्रकाश किरण की गति में कोई परिवर्तन नहीं होता हैं। प्रकाश की गति उस माध्यम के साथ बदलती है जिसमें किरण झुकती हैं।
परावर्तन में जिस माध्यम में प्रकाश फैलता है वह वही रहता हैं। अपवर्तन में प्रसार का माध्यम बदल जाता हैं।
परावर्तन कोण और आपतन कोण परावर्तन के मामले में समान होते हैं। अपवर्तन में, परावर्तन कोण और आपतन कोण समान नहीं होते हैं।
जब प्रकाश का अपवर्तन होता है, तो उसकी आवृत्ति कैसी होती हैं?

जब प्रकाश का अपवर्तन होता है तो उसकी आवृत्ति समान रहती है।

जब प्रकाश का अपवर्तन होता है, तो तरंगदैर्घ्य कैसा होता है?

जब प्रकाश का अपवर्तन होता है, तो सघन माध्यम में तरंगदैर्घ्य कम हो जाता है जबकि विरल माध्यम में तरंगधैर्य  अधिक हो जाता हैं।

उम्मीद हैं आपको प्रकाश का अपवर्तन की समस्त जानकारी पसंद आयी होगीं।

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