ग्रंथि

ग्रंथि (gland) की समस्त महत्वपूर्ण जानकारी

ग्रंथि (gland) की समस्त महत्वपूर्ण जानकारी
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नमस्कार छात्रों इस पेज पर आप जीव विज्ञान के महत्वपूर्ण अध्याय ग्रंथि (Gland) से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी विस्तार से पढ़ेगे।

पिछले पेज पर हमनें मनुष्य के दांत से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी विस्तार पूर्वक दी है यदि आप गलती से पढ़ना भूल गए हैं तो उसे भी जरूर पढ़िए।

चलिए आज हम मनुष्य की ग्रंथियों के बारे में विस्तार से पढ़ते है।

ग्रंथि (Gland) की परिभाषा

कोशिकाओं के व्यवस्थित समूह को ही ऊतक कहाँ जाता हैं यही ऊतक मिलकर अंग का निर्माण करते हैं कुछ ऊतक या अंग विशेष प्रकार कर रसायन एन्जाइम, हार्मोन का निर्माण करते हैं उन्हें ग्रंथि कहा जाता हैं। ग्रंथि शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रण करने हेतु एन्जाइम का निर्माण करती हैं।

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ग्रंथियां तीन प्रकार की होती हैं

  • बाह्य स्त्रावी ग्रंथि (Exocriane Gland)
  • मिश्रित ग्रंथि (Mixed Gland)
  • अन्तःस्त्रावी ग्रंथि (Endocriane)

बाह्य स्त्रावी ग्रंथि (Exocriane Gland)

मानव शरीर में उपस्थित वे ग्रंथियां जो अपने द्वारा बनाई गई या उत्पन्न रासायनिकों क्रिया स्थल तक पहुँचने के लिए धमनी की नलिकाओं का उपयोग करती हैं इसी कारण से इन्हें नालिकीय ग्रंथि भी कहा जाता हैं यह मुख्य रूप से एन्जाइम का निर्माण करती हैं।

Ex:- आँशु ग्रंथि, लार ग्रंथि, स्वेद ग्रंथि, श्लेष्मा ग्रंथी।

मिश्रित ग्रंथि (Mixed Gland)

वह ग्रंथि जो अपने द्वारा बनाए गए या निर्मित रसायन को क्रिया स्थल तक पहुंचने में कुछ दूरी तक तो अपने ही नलिकाओं का उपयोग करती हैं। किंतु इसके बाद उस रसायन को रक्त के माध्यम से या अन्य किसी नालिका के माध्यम से क्रिया स्थल तक पहुँचाती हैं मिश्रित ग्रंथि कहलाती हैं। मानव शरीर में एक मात्र मिश्रित ग्रंथि अग्न्याशय ग्रंथि हैं।

अन्तःस्त्रावी ग्रंथि (Endocriane)

वे ग्रंथियां जो अपने द्वारा बनाई गई रसायन क्रिया स्थल पर पहुँचने में स्वयं की नलिकाओं का उपयोग नहीं करती इसी कारण से इन्हें नालिका विहीन ग्रंथि कहा जाता हैं यह मुख्य रूप से हार्मोन्स का निर्माण करती हैं।

अन्तःस्त्रावी ग्रंथि के कुछ उदाहरण निम्लिखित हैं

  • पीयूष ग्रंथि
  • थायराइड ग्रंथि
  • परा अबटु ग्रंथि
  • थाइमस ग्रंथि
  • अग्न्याशय ग्रंथि
  • अधि व्रक्त ग्रंथि
  • जनन ग्रंथियां

1. पीयूष ग्रंथि (Pitutray Gland)

यह मानव शरीर की मुख्य ग्रंथि मानी जाती हैं जो कि मस्तिष्क में उपस्थित होती हैं यह सबसे छोटी ग्रंथि भी होती हैं इसका कुल वजन 0.6 ग्राम होता हैं इस ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन शरीर की भिन्न ग्रंथियों को अंगों को उत्प्रेरक के तौल पर नियंत्रण करते हैं इसी कारण से इस ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि कहा गया।

पीयूष ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन

  • STH हार्मोन (Somato Tropic Hormone) /  शरीर वृद्धि हार्मोन
  • T. S. H. (Thyroid Stimulated Harmons)
  • G. T. H (Ganado Tropic harmons)
  • Lectogenic harmons

S. T. H. (Somato Trapic Harmon):- यह हार्मोन शारीरिक वृद्वि (हड्डियों की वृद्धि) में सहायता करता हैं करता हैं अतः इसे वृद्धि हार्मोन कहा जाता हैं।

T. S. H. (Thyroid Stimulated Harmons):- यह एक उत्प्रेरक हार्मोन होता हैं जो कि थाइराइड ग्रंथि को थाइरॉक्सिन बनाने के लिए उत्प्रेरित करता हैं।

G. T. H (Ganado Tropic harmons):- यह हार्मोन जनन क्रियाओं को नियंत्रण करता हैं।

Lectogenic harmons:- यह हार्मोन केवल महिलाओं में पीयूष ग्रंथि से निकलता हैं इसका मुख्य कार्य शिशु के जन्म के समय ही दुग्ध का निर्माण (शिशु का पोषण) करना होता हैं।

2. थाइरॉक्सिन ग्रंथि (Thyroxin Gland)

यह ग्रंथि गले में जोड़े के रूप में उपस्थित होती हैं जो कि ट्रेकिया (श्वसन तंत्र का मध्य भाग) के दोनों तरफ स्थित होती हैं इससे निकलने वाला हार्मोन थायरोक्सिन शरीर में (रक्त में) आयोडीन की मात्रा का निर्धारण करता हैं।

थाइरॉक्सिन ग्रंथि के कार्य

  • यह कोशिकीय श्वसन की गति को तीव्र करता हैं।
  • यह शरीर की सामान्य वृद्धि विशेषतः हड्डियों, बाल इत्यादि के विकास के लिए अनिवार्य हैं।
  • जनन अंगों के सामान्य कार्य इन्हीं की सक्रियता पर आधारित रहते हैं।
  • पीयूष ग्रंथि के हार्मोन के साथ मिलकर शरीर में जल सन्तुलन का नियंत्रण करते हैं।

थाइरॉक्सिन की कमी से होने वाले रोग

  • जड़मानवता (Cretinism)
  • घेघां (Goitre)
  • हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism)
  • मिक्सिंडमा

जड़मानवता:- यह जन्म से पूर्व (गर्वावस्थाा में) आयोडीन की कमी से होता हैं इस रोग से शिशु का सम्पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास रुक जाता हैं।

घेघां:- भोजन में आयोडीन कमी से यह रोग उत्पन्न हो जाता हैं इस रोग में थायरॉयड ग्रंथि के आकार में बहुत वृद्धि हो जाती हैं।

हाइपोथायरायडिज्म:- लम्बे समय तक इस हार्मोन

की कमी के कारण यह रोग होता हैं इस रोग के कारण सामान्य जनन-कार्य संभव नहीं हो पाता कभी-कभी इस रोग के कारण मनुष्य गुगा एवं बहरा हो जाता हैं।

मिक्सिंडमा:- यौननावस्था में होने वाले इस रोग में उपापचय भली-भांति नहीं हो पाता, जिससे हृदय-स्पंदन तथा रक्त-चाप कम हो जाता हैं।

आयोडीन की अधिकता से होने वाले रोग

  •  Toxin Goiter:- रक्त चाप (BP) बढ़ जाता हैं।
  • Exophthalmia:- नेत्र गोलक सूजन।

3. परा अबटु ग्रंथि (Thyroid Gland)

यह ग्रंथि भी गले में जोड़े के रूप में उपस्थित होती हैं इसके द्वारा बनाये गए हार्मोन शरीर में (रक्त में) कैल्सियम की मात्रा को निर्धारण करता हैं।

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4. थाइमस ग्रंथि

यह ग्रंथि सीने में जोड़े के रूप में उपस्थित होती हैं इससे बनने वाला हार्मोन शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखता हैं वृद्धा वस्था में यह ग्रंथि कार्य करना बंद कर देती हैं। जिससे रोगप्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती और विभिन्न बीमारियां होने लगती हैं।

5. अग्न्याशय ग्रंथि

इसके द्वारा उतपन्न रासायनिकों के बारे में सर्वप्रथम लैंगर हैंस (चिकित्सा वैज्ञानिक) के द्वारा बताया गया इस ग्रंथि से एक पाचक रस निकलता हैं जिसका PH मान 6.5 से 8.2 तक होता हैं।

  • अल्फा सेल
  • बीटा सेल
  • गामा सेल

अल्फा सेल:- इस सेल से निकलने वाला हार्मोन ग्लूकोगेन से जो कि रक्त में शर्करा की मात्रा को बढ़ाता हैं।

बीटा सेल:- इस कोशिकाओं से निकलने वाला हार्मोन Isulire रक्त में शर्करा की मात्रा को कम करता हैं।

गामा सेल:- यह कोशिकाओं Smatostatin हार्मोन रक्त में शर्करा की मात्रा का निर्धारण (एक निश्चित मात्रा में) बनाए रखने का कार्य करता हैं एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के रक्त में शर्करा के अणु की मात्रा 80 से 180 मिलीलीटर होती हैं।

6. अधि व्रक्त ग्रंथि

अधिव्रक्त ग्रंथि अग्न्याशय के नीचे उपस्थित होती हैं इसके मुख्य रूप से दो भाग होते हैं।

  • Cortex
  • Medula

Cortex:- यह बाहरी भाग हैं इससे निकलने वाले हार्मोन रक्त में नमक, शर्करा, जनन ग्रंथि को नियत्रिंत करने में सहायक हैं। यह जीवन का नितांत अतिआवश्यक भाग होता हैं। इसकी अनुपस्थिति में जीवन मात्र 2 सप्ताह का बचता हैं।

Medula:- यह अधिवृक्त ग्रंथि का आंतरिक भाग होता हैं इससे निकलने वाले हार्मोन (एमीनों अम्ल) लगभग समान कार्य करते हैं इनसे शरीर में तनाव उतपन्न होता हैं

इस ग्रंथि को 4S ग्रंथि (S – Salt, S – Sugar, S – Sex, S – Stress) कहा जाता हैं। हार्मोन के कारण इस ग्रंथि को (उड़ो, लड़ो, मरो) वाली ग्रंथि कहा जाता हैं।

7. जनन ग्रंथियां

यह ग्रंथियां महिलाओं एवं पुरुषों में अलग-अलग होती हैं।

पुरुषों में जनन ग्रंथियां:- यह ग्रंथियां शरीर के तापक्रम पर कार्य नहीं इसी कारण से यह शरीर के बाहर उपस्थित एक मात्र अन्तः स्त्रावी ग्रथि होती हैं। इस ग्रंथि से Testestaron हार्मोन निकलता हैं। जो कि पुरुषों में वयस्कता को प्रदर्शित करता हैं।

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आशा करती हूं कि आपको Htips की यह ग्रंथि (gland) की परिभाषा और उसके प्रकार वाली पोस्ट पसंद आई होगी यही आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हैं तो कमेंट में जरूर बताएं धन्यवाद

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