महात्मा गाँधी का निबंध

महात्मा गाँधी का निबंध पढ़े

सभी लोग जानते है कि हिंदी विषय की परीक्षा में एक निबंध तो जरूर आता है और जिसमे महात्मा गाँधी का निबंध पूछे जाने की संभावना अधिक होती है।

इसलिए इस पेज पर हमने महात्मा गाँधी का निबंध विस्तार पूर्वक शेयर किया है जिसको पढ़कर आप आसान से महात्मा गाँधी का निबंध याद कर सकते है।

पिछली पोस्ट में हमने विज्ञान के चमत्कार का निबंध और दीपावली पर निबंध शेयर किया है उनको जरूर पढ़े।

चलिए महात्मा गाँधी का निबंध विस्तार पूर्वक पढ़ते हैं।

महात्मा गाँधी का निबंध

महत्मा गाँधी का सम्पूर्ण जीवन से हमें अनेको सीख मिलती है इसलिए हमें महात्मा गाँधी के बारे में जानकारी होना आवश्यक है इस निबंध में हमने महात्मा गाँधी के जीवन की समस्त महत्वपूर्ण घटनाओ को विस्तार से समझाया है

महत्मा गाँधी के निबंध की रूप रेखा नीचे दी गयी है

रूपरेखा

  • प्रस्तावना
  • जीवन परिचय
  • बैरिस्टरी पास करने का निर्णय
  • दक्षिण अफ्रीका में जाना
  • नेटाल इण्डियन कांग्रेस की स्थापना
  • राजनीति में प्रवेश
  • जनता का आंदोलन
  • दूसरा विश्व युद्ध
  • भयानक उपद्रव
  • गाँधी जी के चारित्रिक गुण
  • कुशल लेखक
  • मृत्यु
  • उपसंहार

1. प्रस्तावना

पृथ्वी पर जब अनाचार, अत्याचार एवं अन्याय का दौर प्रारम्भ होता हैं तब पृथ्वी के भार को हल्का करने के लिए एवं मानव कल्याण के लिए महापुरुषों का आविर्भाव होता हैं बीसवीं शताब्दी में जिन महापुरुषों ने भारत के गौरव में चार चांद लगाए उनमें महात्मा गाँधी एवं रविंद्रनाथ ठाकुर के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं राजनीति के क्षेत्र में ही नहीं अपितु नैतिक एवं धार्मिक क्षेत्र में भी गांधी जी की अपूर्व देन हैं।

2. जीवन परिचय

महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था इनके पिता का नाम करमचंद था इनकी जाती गांधी थी इन्होंने अपनी बचपन की आँखे 2 अक्टूबर, 1869 को पोरबंदर में खोली थी।

गांधी जी ने प्रारम्भ की शिक्षा-दीक्षा पोरबन्दर में ही ग्रहण की गांधी जी की माता बहुत ही साधु स्वभाव की धर्मपरायण महिला थीं जिसका गांधी जी के जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ा।

इनके पिता राजकोट रियासत के दीवान पद पर प्रतिष्ठित थे पिता की यह इच्छा थी कि उनका पुत्र पढ़ लिख कर एक योग्य व्यक्ति बने।

3. बैरिस्टरी पास करने का निर्णय

उन दिनों में बैरिस्टरी पास करके वकालत करना एक उत्तम व्यवसाय माना जाता था माता पुत्र को विदेश में भेजने के पक्ष में नहीं थी गांधी जी ने माता से आज्ञा लेने के लिए प्रतिज्ञा ली विदेश में शराब मास और अनाचार से दूर रहूंगा गांधी जी ने इस प्रतिज्ञा का अक्षरशः पालन किया।

वकालत का व्यवसाय प्रारंभ

इंग्लैंड से बैरिस्टर की उपाधि ग्रहण करके गांधी जी ने भारत भूमि पर पदार्पण किया तथा वकालत का व्यवसाय करना प्रारम्भ कर दिया इस पेशे में झूठ बोले बिना काम नहीं चल सकता गांधी जी सत्य पथ के राही थे अतः इस पेशे में वह असफल ही सिद्ध हुए।

4. दक्षिण अफ्रीका में जाना

एक बार गांधी जी को एक मुकदमे की पैरवी की वजह से दक्षिणी अफ्रीका जाना पड़ा दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भारतीयों के साथ बहुत ही अमानवीय व्यवहार किया जाता था।

गांधी जी उस बुरे व्यवहार को कर्मगति समझकर सहन कर लेते थे एक बार गांधी जी से अदालत में पगड़ी उतारने को कहाँ गांधी जी ने अदालत से बाहर आना स्वीकार किया परंतु पगड़ी को सिर से नहीं उतारा।

5. नेटाल इण्डियन कांग्रेस की स्थापना

गांधी जी ने 1894 में इंडियन नेटाल कांग्रेस की स्थापना की इस संस्था ने भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

देशवासियों को दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भारतीयों की दुर्दशा से अवगत कराया दक्षिण अफ्रीका में रहकर गांधी जी ने सत्याग्रह एवं असहयोग की नवीन नीति से सरकार का विरोध करना प्रारम्भ कर दिया गांधी जी तथा जनरल स्मट्स में समझौता के आधार पर भारतीयों को बहुत से अधिकार मिले इससे उनके मन मानस में आशा का संचार हुआ।

6. राजनीति में प्रवेश

1915 में गांधी जी ने भारत की राजनीति में भाग लेना प्रारंभ कर दिया भारत को स्वतंत्र कराने के लिए उन्होंने सत्य एवं अहिंसा को अस्त्र-शस्त्र के रूप में प्रयोग किया।

इसी मध्य चौरी-चौरा नामक गाँव में सत्याग्रह के मध्य हिंसक घटना घटित हो गई अहिंसा के उपासक गांधी जी ने सत्याग्रह को तब तक के लिए स्थगित कर दिया जब तक अहिंसा का अनुपालन न हो।

1930 में पुनः सत्याग्रह प्रारम्भ हुआ जिससे गोरी सरकार को गांधी जी के समक्ष घुटने टेकने पड़े।

लदन में समझौते के निमित्त एक गोलमेज सभा आमंत्रित की गई किन्तु यह व्यर्थ प्रमाणित हुई गांधी जी को गिरफ्तार कर लिया गया।

7. जनता का आंदोलन

गांधी जी ने आजादी के आंदोलन को जनता के आंदोलन का रूप दे दिया उनके नेतृत्व में मजदूर एवं कृषक स्वाधीनता के संघर्ष में भाग लेने के लिए सहर्ष तैयार हो गए।

अंग्रेजों ने अपनी कूटनीति से अछूतों को चुनाव से अलग कर दिया गांधी जी का सन 1930 से 1939 तक का समय रचनात्मक कार्यों में व्यतीत हुआ।

8. दूसरा विश्व युद्ध

1939 में दूसरा विश्वयुद्ध छिड़ गया गांधी जी ने प्रथम विश्व युद्ध में कुछ आशा लेकर अंग्रजों की बहुत सहायता की लेकिन युद्ध के बाद अंग्रेजों का भारतीयों के प्रति व्यवहार और भी कठिन हो गया।

इसी हेतु द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों की तब तक सहायता न करने की ठान ली जब तक वे अपने बोरी-बिस्तर बांधकर देश को आजाद नहीं कर देते।

9. भयानक उपद्रव

देश के बंटवारे के फलस्वरूप भयानक उपद्रव हुए हिंसा तथा मारकाट का दौर चला गांधी जी ने शांति स्थापना का भरसक प्रयास किया दंगा रोकने के लिए आमरण अनशन का व्रत लिया।

10. महात्मा गाँधी जी के चारित्रिक गुण

गांधी जी का मनोबल असाधारण था वे प्राणों की कीमत पर भी सत्य की रक्षा करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे वे सत्य तथा अहिंसा के पुजारी थे वे व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ राजनीति में भी सत्य एवं अहिंसा के प्रयोग के प्रबल समर्थक थे।

गांधी जी जीवन एवं राजनीति को जुड़ा हुआ स्वीकारते थे राजनीति के अलावा गांधी जी ने देश वासियों का सभी क्षेत्रों में मार्गदर्शन किया कंगाल एवं रोगियों की सेवा में उनका अधिकांश समय व्यतीत होता था।

11. कुशल लेखक

गांधी जी एक कुशल लेखक भी थे उन्होंने हरिजन एवं हरिजन सेवक नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन किया यंग इंडिया नामक पत्र भी निकाला।

12. मृत्यु

साम्प्रदायिकता मानव को विकासग्रस्त कर देती हैं ऐसे ही एक विकृत नाथूराम विनायक गोडसे ने 30 जनवरी 1948 की शाम को प्रार्थना सभा में आते ही गांधी जी पर गोलियां चला दी हत्यारे को हाथ जोड़कर नमस्ते करते हुए गांधी पंचतत्व में विलीन हो गए।

13. उपसंहार

महात्मा गांधी युगपरुष थे धर्म, नैतिकता, राजनीति एवं आध्यात्मिक के क्षेत्र में उनकी देनों को कभी भी नहीं भुलाया जा सकता हैं गांधी जी ने अंधकार में भटकते हुए भारतीयों को प्रकाश के दर्शन कराए।

सत्य एवं अहिंसा का एक ऐसा अमोघ अस्त्र उन्होंने समस्त विश्व को प्रदान किया जिसकी आज के हिंसा एवं मार काट के दौर से गुजर रहे विश्व को महान आवश्यकता है।

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आशा करती हूं कि महात्मा गाँधी के निबंध वाली यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी।

इस पोस्ट से संबंधित प्रश्नो को कमेटं में पूछे।

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