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Scanner क्या है और कितने प्रकार के होते है?

दोस्तों वर्तमान के समय में हर चीज कंप्यूटर के द्वारा हो रही है। अगर हम यह कहें कि काफी हद तक अब सभी काम कंप्यूटर से ही होने लगे हैं तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। दोस्तो कंप्यूटर बहुत सारे Component से मिलकर बना हुआ होता है। इसमें हर कंपोनेंट का अपना एक अलग ही महत्व होता है।

अगर हम कंप्यूटर के मुख्य भाग की बात करें तो इसमें सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट अर्थात CPU,ram, Motherboard, keyboard आदि का अधिक महत्व होता है।इसके अलावा इसमें छोटे छोटे अन्य componant भी होते हैं।

दोस्तों यह तो computer के इंटरनल पार्ट हैं।computer से कुछ चीजें करवाने के लिए हमें कंप्यूटर में external part bhi भी जोड़ना होता है। जैसे अगर हमें कंप्यूटर को कोई भी दिशा निर्देश देने हैं तो हमें कंप्यूटर को कीबोर्ड से जोड़ना पड़ता है। 

इसके अलावा अगर हमें कोई फाइल एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में ट्रांसफर करनी है तो उसके लिए हमें Data Cable अथवा USB cable इस्तेमाल करना पड़ता है।

दोस्तों आज हम आपको कंप्यूटर से जोड़े जाने वाले एक part स्केनर के बारे में बताने वाले हैं। आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि Scanner क्या होता है। Scanner काम कैसे करता है, Scanner के क्या फायदे हैं, आइए जानते हैं विस्तार से।

Scanner क्या है?

Scanner एक ऐसा tool है जो computer editing के लिए photographic print,poster,magazine and page इत्यादि से photo लेता है।

स्कैनर आपके कंप्यूटर को प्रिंट किया हुआ इमेज, डॉक्यूमेंट लेने की परमिशन देता है और उसके बाद उसे डिजिटल फाइल में कन्वर्ट कर देता है। आप स्केनर को कंप्यूटर से USB,FireWire, Parllel और SCSI के जरिए जोड़ सकते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्केनर कई प्रकार के मिलते हैं और इनका उपयोग ब्लैक अथवा वाइट या फिर कलरफुल डाटा को स्कैन करने के लिए किया जाता है।

आमतौर पर स्कैनर सॉफ्टवेयर के साथ ही आते हैं जैसे कि Adobe Photoshop Product अगर आप एडोब फोटोशॉप सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं तो आप इसकी मदद से स्कैन होने वाली Image में कुछ बदलाव भी कर सकते हैं।Scanner का काम है कि वह किसी भी फोटो को देखे, उसे समझे और उसे प्रोसेस करें।

Scanner आपके कंप्यूटर के साथ ही जुड़े हुए होते हैं और कंप्यूटर में स्केनर को जोड़ने के लिए स्मॉल कंप्यूटर सिस्टम इंटरफेस की हेल्प ली जाती है। इसमें एक एप्लीकेशन होती है जो फोटोशॉप अथवा इमेज को Read करने का काम करती है।

स्केनर की टेक्नोलॉजी बिल्कुल Photocopy वाली मशीन के जैसी है बस फर्क इतना है फोटोकॉपी मशीन के अंदर मशीन डॉक्यूमेंट की एक कॉपी आपको उपलब्ध कराती है वहीँ स्कैनर उन्हें आपके कंप्यूटर में सुरक्षित करके रखता हैं, जिन्हें आप बाद में बहुत से कार्य में इस्तेमाल कर सकते हैं।हार्ड कॉपी को डिजिटल में बदलने के लिये Scanner की आवश्यकता होती है।

Scanner के प्रकार

Scanner एक ऐसा Tool है जिसका इस्तेमाल हर ऑफिस, स्कूल तथा टिकट बुकिंग की ऑफिस में किया जाता है।इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हर क्षेत्र में कई तरीको से होता है और इसीलिए इसके अलग अलग प्रकार मिलते है, जो निम्नलिखित है –

फ्लैटबेड ( Flatbed Scanner ) स्कैनर : इस scanner को डेस्कटॉप scanner भी कहा जाता है।इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है।

शीट फेड ( Sheet – Fed Scanner ) स्कैनर : यह Scanner एक पोर्टेबल प्रिंटर की तरह दिखाई देता है।जब इस स्केनर में डॉक्यूमेंट चलने लगता है तो इसका हेड गति हीन हो जाता है

हैण्डहेल्ड ( Handheld ) स्कैनर : इस scanner में डॉक्यूमेंट को आगे बढ़ाने के लिए Belt का इस्तेमाल नहीं होता है, बल्कि इसमें आपको बेल्ट को आगे बढ़ाने के लिए खुद सहारा देना पड़ता है। इसलिए यह स्केनर अच्छी क्वालिटी वाले फोटो नहीं दे पाते हैं परंतु यह तुरंत ही टेक्स्ट को स्कैन करने में मददगार है।

ड्रम ( Drum ) स्कैनर : ड्रम स्केनर का ज्यादा इस्तेमाल पब्लिशिंग कंपनियां करती हैं और इसका अधिक इस्तेमाल अखबार छापने वाली कंपनियां भी करती है।

यह किसी भी फोटो की बहुत छोटी-छोटी जानकारी को भी अद्भुत तरीके से स्कैन करता है। इस स्केनर में सबसे पहले जिस डॉक्यूमेंट को स्कैन करना है उससे ऊपर शीशे के सिलेंडर तक पहुंचाया जाता है।

वहां पर सिलेंडर के केंद्र में एक सेंसर लगा होता है। यह सेंसर डॉक्यूमेंट से आ रही रोशनी को 3 बीम में बांट देता है। इसके बाद हर बीम को एक रंगीन फिल्टर से गुजरते हुए फोटोमल्टीप्लायर Tube तक पहुंचाया जाता है।यहां आने के बाद रोशनी एक इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल जाती है। इसके बाद आप Scanner से अपनी इमेज को बाहर निकाल सकते हैं।

Scanner की खोज किसने की है?

कंप्यूटर के साथ जो पहला स्केनर इस्तेमाल किया गया था वह ड्रम स्केनर था जिसका निर्माण साल 1957 में Russell A. Kirsch के द्वारा अमेरिका के National Beuroe में किया गया था और इस पर Russell A. Kirsch के 3 महीने के बेटे की 5 सेमीवर्ग की फोटो ली गई थी।

उस समय ब्लैक एंड वाइट स्कैनर का इस्तेमाल किया जाता था और जो उनके बेटे की पहली तस्वीर ली गई थी वह भी ब्लैक एंड वाइट थी। इसके बाद में इसमें काफी बदलाव किए गए और आज स्केनर ब्लैक एंड वाइट तथा रंगीन फोटो और डॉक्यूमेंट स्कैन कर सकता है।

Scanner का उपयोग कहा-कहा होता है?

आपने देखा होगा कि जब भी आप किसी परीक्षा का Form Online भरते हैं तब आपको डॉक्यूमेंट के तौर पर अपनी फोटो, मार्कशीट, सिग्नेचर इत्यादि को ऑनलाइन अपलोड करना होता है और इसे अपलोड करने का काम स्केनर ही करता है। स्कैनर आपके डॉक्यूमेंट को स्कैन करके डिजिटल में चेंज कर देता है और उसे अपलोड करता है।

किताबों को Online Upload करने के लिए तथा OMR sheet की जांच करने के लिए स्केनर का इस्तेमाल किया जाता है। वर्तमान में हम Ebook के जरिए ऑनलाइन पढ़ाई करते हैं। यह भी स्केनर के कारण संभव हो पाया है।

अगर आप अपने Smartphone में स्कैनर का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो उसके लिए भी गूगल प्ले स्टोर पर बहुत सारी एप्लीकेशन मौजूद है आप उन्हें इंस्टॉल करके अपने डॉक्यूमेंट को स्कैन कर सकते हैं और उन्हें डिजिटल डॉक्यूमेंट में बदल सकते हैं।

Scanner के क्या लाभ है?

स्केनर बहुत ही अच्छे से और सटीकता से अपना काम करते हैं और फोटो को एक अच्छी क्वालिटी देते हैं।आप जिस भी Documents को स्कैन करते हैं उसे इलेक्ट्रॉनिक डॉक्यूमेंट की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।

आप चाहे तो एक बार स्कैन हुई फोटो को आप ग्राफ़िक एप्लीकेशन की तरह भी यूज कर सकते हैं। अगर किसी डॉक्यूमेंट को स्कैन करने के लिए एक अच्छे स्केनर का इस्तेमाल किया जा रहा है तो आप अपनी डॉक्यूमेंट के साइज को कम या ज्यादा करवा कर उसे स्कैन करवा सकते हैं।

Scanner के नुकसान

जो भी photo और Document Scan होता है वह फोटो और डॉक्यूमेंट संग्रहित होने के लिए बहुत सारी जगह लेता है। कई बार स्कैनिंग की प्रक्रिया में डॉक्यूमेंट अथवा इमेज अपनी असली क्वालिटी खो देती है। स्कैन की गई किसी भी डॉक्यूमेंट की क्वालिटी असली इमेज की क्वालिटी पर आधारित होती है।

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