Computer ke anuprog

कंप्यूटर के अनुप्रयोग और प्रमुख अंग

Last Updated on September 7th, 2020 by Bhupendra Singh

इस पेज पर आप कंप्यूटर के अनुप्रयोग की समस्त जानकारी विस्तार पूर्वक पढ़ेंगे जो सभी दैनिक जीवन और सरकारी परीक्षा की दृष्टि से जरूरी हैं।

तो चलिए कंप्यूटर के अनुप्रयोग और प्रमुख अंग की जानकारी को पढ़कर समझते है।

कंप्यूटर अनुप्रयोग

कंप्यूटर को संगणक या अभिकलित्र भी कहाँ जाता है। इसको सर्वप्रथम गणनाओं को आसान  बनाने के लिए तैयार किया गया था। पूराने समय में कंप्यूटर का उपयोग सिर्फ गणना करने के लिये किया जाता था।

लेकिन बढती तकनीक के साथ आज हमारे पास ऐसे कंप्यूटर मौजूद हैं जिसमें हम बड़े से बड़े कार्य जैसे : Audio Recording , Video Recording, Photo Editing, ऑनलाइन पढ़ाई, आदि भी आसानी से कर रहे हैं।

कंप्यूटर का प्रयोग आम बात है हर कार्यालय में कंप्यूटर अनिवार्य हो चुका है। तथा घरों भी आपको आजकल कंप्यूटर या लैपटाँप अवश्य मिल जायेगें।

कंप्यूटर Input – Prosessing – Output  पर कार्य करता है। क्योंकि कंप्यूटर Command पर अपना कार्य निष्पादित करता है जिसको यूजर द्वारा दिया जाता है। जिसे यूजर इंनपुट के माध्यम से कंप्यूटर को देता है जिसके बाद Prosessing करता है। तथा उसके बाद कार्य का निष्पादन किया जाता है। कंप्यूटर का दिमाग उसकी तार्किक क्षमता होता है।

एक कम्पूटर  कार्य करने के लिए उसमें यह तीन Hardware+ Software + OS (Oprating system)  एलीमेंट्स का होना जरुरुी है। क्योंकि  बिना सोफ्टवेयर या हार्डवेयर के बिना कप्यूटर की कल्पना नहीं की जा है। तथा आपरेटिंग सिस्टम के बिना हार्डवेयर और सोफ्टवेयर का तालमेल नहीं बनाया जा सकता है।

आधुनिक कंप्यूटर का जनक सर चार्ल्स  बेबेज को माना जाता है।

चार्ल्स बेबेज का जन्म  सन् 1791ई0 मे लंदन इग्लैंड में हुआ था। उन्ही के प्रयासों के कारण कंप्यूटर विकास में क्रान्ति का उदभव् हुआ है। जिसके फलस्वरुप आज हम समय कंप्यूटर के इस दौर में है। जब से कप्यूटर ने जिस प्रकार किया है उसे उसकी अलग – अलग पीढियों में विभाजित किया गया है।

पहली पीढी के कंप्यूटर  – 1945 ई0 – 1955 ई0

यह कप्यूटर काफी विशाल आकार के थे। तथा इनका आधार वैक्यूम ट्यूब था। जिसके कारण यह काफी ऊष्मा का उत्सर्जन किया करते थे। तथा अधिक विद्युत की खपत भी क्या करते थे।

यह बाइनरी नम्बर को ही समझते थे जिसके कारण इनमें एक बार एक ही कार्य किया जाया सकता था इनपुट से आउटपुट के लिये पंच कार्ड का उपयोग किया जाता था।

दूसरी पीढी के कंप्यूटर – 1956 ई0 – 1964 ई0

यह कंप्यूटर पहले वाले कंप्यूटर से कहीं बेहतर थे इसमें वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्राँजिस्टर का प्रयोग शुरु हो गया।

जिससे इसकी क्षमता में वृध्दि हुई। तथा इसमें मशीनरी लेग्वेंज की जगह ऐस्बलीं लेग्वेंज का यूज होने लगा।

तीसरी पीढी के कंप्यूटर – 1965ई0 से 1975ई0

यह कंप्यूटर पीढी के कंप्यूटर का विकास काफी तेजी से हुआ। अबतक इंटीग्रेट संर्किट (आई0 सी0) खोज होने के पश्चात् इनका साइज काफी छोटा हो गया।

तथा इसकी भी काफी तेज हो गई अब कंप्यूटर की गति गणना करीब माइक्रो सेकेण्ड व नैनो सेकेण्ड होने लगी। साथ ही उच्च स्तरीय भाषा बेसिक व पास्कल का भी विकास इस तकनीक में होने लगा।

चौथी पीढी के कंप्यूटर – 1976ई0 से 1989ई0

इस समयावधि के दौरान विकसित हुये कंप्यूटरों को चौथी पीढ़ी के कंप्यूटरों के रुप में पहचान मिली इस पीढी की महत्वपूर्ण विशेषता यह थी। कि इस पीढ़ी के कप्यूटरों में चिप तथा माइक्रोप्रोसेसर आने लगे थे।

इससे कंप्यूटरों के आकार में बेहद कमी आई तथा इनकी स्टोरेज क्षमता में वृध्दि हुई अर्धचालक मैमोरी के प्रयोग के साथ ही C लेग्वेंज का भी विकास हुआ।

जिससे प्रोग्रामिंग करना सरल हुआ। तथा आँपरेटिग सिस्टम के रुप में M S DOS आया। तथा कंप्यूटर आसान व सरल हो गया।

पाँचवी पीढ़ी के कंप्यूटर – 1989 से अब तक

इस पीढ़ी के कंप्यूटर का इस्तेमाल व रखरखाव आसान तो हुआ ही साथ ही कंप्यूटर की तकनीकी अपने उच्च स्तर पर पँहुच चुकी है। इस समय कंप्यूटर एक छोटी सी पुस्तिका के रुप में आने लगे हैं।

तथा स्मार्ट लैपटाँप, इंटरनेट, कई आपरेटिंग सिस्टम, विंडो, एन्डोड, लाइनेक्स का अनुप्रयोग हुआ जिसमें विन्डो एक्सपी, 7, 8, 10  महत्वपूर्ण रहे।

तथा  गूगल ने तो कंप्यूटर व इंटरनेट की दुनिया में तहलका ही मचा दिया आजकल कोई इससे अछूता नहीं है हर अपना हर मुशकिला कार्य यहाँ आसानी से कर सकते हैं।

आज सारा समाज सोशल मीडिया के जरिये एक दुसरे से जुड़ा हुआ है तथा अब तो टेक्नोलाँजी दिन पर दिन तेजी से बढती जा रही है बहुत जल्द आर्टिफियल इंन्टेलीजेंस के आविष्कार का दावा भी किया जा रहा है।

भारत की सुपर कंप्यूटर योजना

सुपर कम्प्यूटर का नामविकास में सहयोगी संस्थान
फ्लोसाल्वर एम के -3 राष्ट्रीय वैमानिकी प्रयोगशाला, बंगलुरु
पेस अनुराग, हैदराबाद
टेरा फ्लाँप भाभा परमाणु अनुसंन्धान केन्द्र
परम सी- डैक
परम -1000 सी- डैक
परम अनन्त सी- डैक
परम पद्म सी- डैक
कब्रू आईएमएस
एका के0आर0एल0 टाटा समुह पूणे
सागा 220 व्रिकम सारावाई अंतरिक्ष केन्द्र
परम युवा सी- डैक
परम युवा 2 सी – डैक
परम शावक सी- डैक
परम ईशान सी- डैक

कंप्यूटर के प्रमुख अंग

नीचे आप कंप्यूटर के प्रमुख अंगों को पड़ेगें जिसकी जानकारी होना आपके लिए जरूरी हैं।

इनपुट डिवाइस :

यह वह डिवाइस है जिसके जरिये कंप्यूटर को कार्य करने के लिये निर्देशित किया जाता है।

जैसे – की बोर्ड, माउस, स्कैनर, लाइट पेन, जाँयस्टिक, आदि ।

1. की-बोर्ड (Keyboard) : की-बोर्ड या कुंजी पटल कंप्यूटर की सबसे बड़ी इनपुट डिवाइस है।

इसमें अलग-अलग कार्य हेतु अलग-अलग प्रकार की करीब 100 के आस -पास की होती हैं जिसमें फंक्शन की, न्यूमैरिक की, एल्फाबेटिक की, तथा कुछ अतिरिक्त की होती है।

2. माउस (Mouse) : कंप्यूटर माउस का आविष्कार डंग एंजेलबर्ट ने किया था। माउस के सहायता से कंप्यूटर में माउस पाइंटर को किसी भी दिशा में ले जाकर फंक्शन को चलाने में सहायता मिलती है।

यह कंप्यूटर की बेहद जरुरी इकाई है। यह समतल जगह पर हाथ के द्वारा चलाया जाता है।

3. स्कैनर (Scanner) : स्कैनर भी एक इनपुट डिवाइस है इसका इस्तेमाल जरुरी हार्डकाँपी डाक्यूमेंट को कंप्यूटर में सेव करने के लिये किया जाता है।

आउटपुट डिवाइस :

यह वह डिवाइसेस हैं जिसका प्रयोग परिणाम दिखाने के लिये या प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। जैसे- वीडियो डिस्पले यूनिट, प्रिंटर, आदि

1. सीपीयू (CPU) : सीपीयू इसका पूरा नाम सेण्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट है। यह कंप्यूटर का सबसे प्रमुख भाग है, जो कि निर्देशों का उपयोग कर सम्पूर्ण कम्प्यूटर प्रणाली को संचालित करता है। इसे कम्प्यूटर का मस्तिषक कहा जाता है।

2. एएलयू (अर्थमेटिक लाँजिक यूनिट) : यह कम्प्यूटर के अंकगणितीय व लाँजिक कार्यो को संम्पादित करने में अपनी भूमिका निभाता है। अंकगणितीय कार्य संख्या की तुलना करने तथा कम, बराबर, एवं अधिक को शामिल करने के लिए प्रयुक्त किये जाते हैं।

3. कण्ट्रोल यूनिट (Control Unit) : यह निर्देशो का सही उपयोग व उनको कण्ट्रोल करने का कार्य करने के लिये है।

4. प्राइमरी मैमोरी (Praimari Memory) : मैमोरी उपयोग कंम्प्यूटर में डाटा को संग्रहित करने तथा सूचारु रुप चलाने में मदद करने के लिए किया जाता है। इसको दो भागों में विभाजित किया जाता है।

यह कम्प्यूटर के मदर बोर्ड में साथ में लगी होती है। यह कम्प्यूटर का स्मृति संग्राहक है जहाँ जानकारी को संचित किया जाता है। इस स्मृति संग्राहक के दो रु हैं।

5. रोम (Rom) : रोम स्थायी मैमोरी है। जो कम्पयूटर के निर्माण के समय ही इसमें लगाई जाती है। जिसके डाटा को केवल पढ़ा जा सकता है।

6. रैम (Ram) : यह परिवर्तनशील मैमोरी है। यह कम्प्यूटर की मेन मैमोरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कम्प्यूटर में एक समय पर कितने प्रोग्राम चलाये जा सकते हैं। यह उसकी रैम की दक्षता पर निर्भर करता है।

इसीलिए जब आप कभी गेम्स या कोई साफ्टवेयर लेने जाते हैं। तो आपसे ये पूछा जाता है कि आपके कम्प्यूटर की रैम की क्षमता कितनी है।

7. सेकेण्डरी मैमोरी (Secondary Memory) : यह सूचना को स्थायी रुप से जमा करने के काम आती है। इसको कम्यूटर में हार्ड डिस्क, फ्लाँपी डिस्क, सीडी एंव डीवीडी रोम आदि प्रकार की होती है।

कम्प्यूटर से सम्बन्धी अन्य डिवाइस

टैबलेट : यह एक प्रकार का छोटा लैपटाप या स्मार्ट फोन का बड़ा भाई कह सकते हैं। जिसमें आकर्षक टूल्स तथा टच स्किन का समायोजन है। आजकल सैमसंग, ओप्पो, वीवो, शाओमी कम्पनीयों के शानदार टैबलेट  बाजारों में आपको मिल जायेगें।

ब्लूटूथ : यह एक प्रकार का बेतार डाटा आदान – प्रदान करने का माध्यम है जिससे दो या दो डिवाइसज को जोड़ा जा सकता है। लेकिन इसकी रेंज करीब 10 मीटर  के दायरे में भली प्रकार से कार्य करती है। अब इसका नया वर्जन ब्लूटूथ 3,0 आ गया है। जिससे इसकी रेंज करीब 15 मीटर के दायरे पकड़ कर सकती है।

स्मार्ट फोन : एक ऐसा मोबाइल फोन है जिसमें कम्प्यूटर तथा मोबाइल की सारी खूबियाँ या सुविधाँये एक साथ हैं। जिसके जरिये हर काम आसान होने लगा है। इस समय स्मार्ट फोन की सबसे बढिया ओपरेंटिग सिस्टम एन्डरोइड है।

इंटरनेट क्या है?

सूचना प्रौद्योगिकी की जीवन रेखा इण्टरनेट विश्व के विभिन्न स्थानों पर स्थापित टेलीफोन लाइन के सहयोग से एक दूसरे के साथ जुड़े कम्प्यूटरों का ऐसा नेटवर्क है, जो सूचना लेन देन में या आदान – प्रदान करने में विश्व स्तरीय आँकड़ा – सूचना सेवा उपलब्ध कराता है।

इन्टरनेट को और मजबूत बनाने के लिए पर्वतीय क्षेत्र जहाँ लाइन बिछाना बेहद मुश्किल है वहाँ इसे स्पेस सैटलाइट के जरिये पँहुचाने कार्य किया जाता है साथ ही मोबाइल टावर से भी इन्टरनेट सुविधाये मोबाइल कम्पनीयों द्वारा वितरित की जा रही हैं।

जून 2012 में नया इण्टरनेट प्रोटोकाँल वर्जन -6 शुरु हो गया है।

इण्टरनेट से प्राप्त होने वाली सेवाएं

इण्टरनेट से मिलने वाली सेवाएँ ई-मेल, बेवसाइट चलाना, ई- कामर्स, सरकारी योजनाँओ  में आवेदन करना, घर बैठे बैंकिग, या फिर बिजली का के बिल का भुगतान, रेल , बस, हवाई जहाज की टिकटे बुक करना आदि शामिल हैं।

आजकल इण्टरनेट के जरिये आप यूट्यब के जरिये काफी कुछ सीख या सीखा सकते हैं तथा ई -लंर्निग भी कर सकते हैं।

बर्ल्ड बाइड बेब यानि (WWW) : इसकी शुरुआत टिम बर्सन ली ने की थी। यह सुविधा वैज्ञानिकों के बीच सूचना आदान प्रदान करने के लिये की गयी थी। आज यह इण्टरनेट की सबसे बड़ी जड़् यही है।

जरूर पढ़िए :

इस पेज पर आपने कंप्यूटर के अनुप्रयोग की मूल बातों के बारे में समस्त जानकारी को पढ़ा और समझा है और हमे आशा है आपको जानकारी पसंद आयी होगी।

कंप्यूटर के अनुप्रयोगों से संबंधित किसी भी प्रश्न के लिए कमेंट करे।

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2 thoughts on “कंप्यूटर के अनुप्रयोग और प्रमुख अंग

  1. Computers ke baare mein itni saral aur aasan tareeke se jankari Maine nhi dekhi kisi bhi site par bhaijaan aapka bhot sukriya.

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