मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती हैं

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“मकर संक्रांति की आपको हार्दिक शुभकामनाएं” इस पेज पर आप मकर संक्रांति क्या हैं, मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती हैं, मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व, मकर संक्रांति कैसे मनाये आदि की जानकारी पड़ेगें।

मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को मनाई जाती हैं लेकिन इस साल देशभर में मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा।

चलिए मकर संक्रांति की सम्पूर्ण जानकारी पढ़ते हैं।

मकर संक्रांति क्या हैं?

मकर संक्रांति हिंदुओ का प्रमुख पर्व हैं जो हमारे भारत देश और नेपाल में धूमधाम से मनाया जाता हैं।

पौष मास (जनवरी महीने) में जब सूर्य मकर राशि में आता हैं तभी इस पर्व को मनाया जाता हैं वर्तमान शताब्दी में यह त्यौहार जनवरी माह की 14 या 15 तारीक को पढ़ता हैं।

जनवरी महीने की 14 या 15 तारीक को सूर्य धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करता हैं।

तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं। जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं।

मकर संक्रांति का त्यौहार कब मनाया जाता हैं

मकर संक्रांति का त्यौहार प्रत्येक वर्ष जनवरी के महीने में मनाया जाता हैं, वैसे तो मुख्यतः इस पर्व को 14 जनवरी के दिन मनाया जाता हैं।

लेकिन कभी-कभी मकर संक्रांति को 15 जनवरी के दिन बनाया जाता हैं वर्ष 2021 में भी मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी।

यदि भारतीय सभ्यता की बात की जाए तो जिस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की तरफ जाता हैं उसी दिन मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता हैं।

मकर संक्रांति क्यों मनाते है

भगवान सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण जाने के शुभ मौके पर मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता हैं।

भरतीय शास्त्रों में कहा जाता हैं कि जब सूर्य दक्षिणायन में रहता हैं तो देवताओं की रात्रि होती हैं। अर्थात देवताओं के लिए यह समय नकारात्मक का प्रतीक होता हैं।

जब सूर्य दूसरी तरफ उत्तरायण में रहता हैं तो देवताओं का दिन रहता हैं। अर्थात देवताओं के लिए यह समय बहुत ही शुभ माना जाता हैं। और सकारात्मक का प्रतीक होता हैं।

मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी छोड़कर अपने पुत्र शनिदेव से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं।

चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है।

महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रान्ति का चयन किया था।

मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व

वैज्ञानिक दृष्टि से मकर संक्रांति अपना एक अलग ही महत्व रखती हैं क्योंकि इस त्यौहार से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचता।

हमारे देश में ऐसे बहुत से त्यौहार मनाए जाते हैं जिससे पर्यावरण को काफी हानि पहुँचती हैं और पर्यावरण दूषित होता हैं जबकि मकर संक्रांति से पर्यावरण को कॉफी कम हानि पहुँचती हैं।

मकर संक्रांति के दिन से सर्दी थोड़ी कम होने लगती हैं मकर संक्रांति से सूर्य भारत की तरफ बढ़ना शुरू करता हैं और भारतीय नदियों में वाष्पन क्रिया शुरू हो जाती हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार नदियों से निकलने वाली वाष्प कई रोगों को दूर करती हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार नदी में नहाना शरीर के लिए लाभकारी माना जाता हैं एवं भारतीय संस्कृति के अनुसार नदियों में नहाना शुभ माना जाता हैं।

मकर संक्रांति कैसे मनाए

मकर संक्रांति विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मान्यताओं के साथ मनाया जाता हैं

मकर संक्रांति के दिन सुबह उठकर तिल को पीस कर इसी उबटन को लगाकर स्नान करना चाहिए।

मकर संक्रांति के दिन तीर्थ स्थल या पवित्र नदियों में स्नान करने का महत्व अधिक होता हैं।

यदि किसी तीर्थ स्थल का जल आपके पास हो तो उसे पानी में मिलाकर उसी जल से स्नान करें।

यदि तीर्थ स्थल का जल उपलब्ध ना हो तो दूध, दही से स्नान करें। स्नान करने के बाद अपने आराध्य देव की आराधना करें।

मकर संक्रांति के दिन सुबह सूर्य देवता को जल, तिल और लाल चन्दन अपर्ण करना चाहिए ऐसा करना शुभ माना जाता हैं।

पूजा पाठ करने के बाद अपने से बड़ो का आशीर्वाद लेकर मकर संक्रांति की शुभकामनाएं Wishes के साथ दें।

उसके बाद अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ मिलकर छत पर पतंग उड़ाए।

याद रखें पतंग के धागे में कांच का प्रयोग बिल्कुल ना करें क्योंकि उससे पक्षियों को नुकसान पहुँच सकता हैं। खुद को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं।

बहुत से लोग होते हैं जो दूसरों की पतंग काटने के लिए माझा में कांच का इस्तेमाल कर लेते हैं जिससे खुद को ही चोट लग जाती हैं इसलिए सिर्फ माझा के द्वारा ही अपनी पतंग को आसमान की ऊंचाइयों तक ले जाए।

पतंग उड़ाने के बाद सभी परिवार वाले दोस्त रिस्तेदार साथ बैठ कर तिल के लड्डू और आपके घर मैं जो पकवान बनते हैं बैठ कर खाएं एवं मकर संक्रांति का पर्व एन्जॉय करें।

मकर संक्रांति के दिन दान करके पुण्य कमाए। महिलाएं अपने बुजुर्गों, जरूरत मंदो, अनाथों, गरीबों को वस्त्र दान करें।

तिल एवं गुड़ से बने व्यंजन एवं कंबल आदि का दान करना सुभ माना गया हैं इससे गरीबों को उनकी जरूरते पूरी हो जाती हैं और आपको थोड़ा पुण्य कमाने का मौका मिल जाता हैं।

मकर संक्रांति राज्यों के विविध रूप

हमारे भारत में शुरू से ही प्रकृति को देवों का स्थान दिया गया हैं, मकर संक्रांति का त्यौहार भी सूर्य देव को समर्पित माना जाता हैं यह त्यौहार अलग अलग राज्यों में अलग-अलग रीति-रिवाजों से मनाया जाता हैं।

उत्तरप्रदेश : उत्तरप्रदेश में इस दिन सूर्य भगवान की पूजा की जाती हैं।

इस दिन सुहागिन लड़की के घर उसके माँ-बाप खिचड़ी की सारी सामग्री ले जाते हैं और अपनी बेटी को देते हैं।

संक्रांति के दिन खिचड़ी खाना या दान करना अच्छा माना गया हैं इसलिए सभी अपने घर पर खिचड़ी बना कर खाते हैं।

पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल में इस दिन हुगली नदी पर गंगा सागर मेले का आयोजन किया जाता हैं।

महाराष्ट्र : महाराष्ट्र में मकर संक्रांति बहुत उत्साह पूर्वक मनाई जाती हैं।

इस दिन सुहागने नमक, कपास आदि दूसरी सुहागनों को दान देती हैं, वैसे काला रंग अशुभ माना जाता हैं लेकिन इस दिन महाराष्ट्र के लोग काले कपड़े पहनते हैं।

इस दिन तिल और गुड़ के लड्डू बनाकर सगे संबंधी रिस्तेदारों में बांटा जाता हैं तिल के लड्डू एक-दूसरे को देकर बोलते हैं तिलगुल लो और मीठी वाणी बोलो।

असम : असम में भोगली बिहू के नाम से इस पर्व को मनाया जाता हैं।

आंध्रप्रदेश : आंध्रप्रदेश में संक्रांति के नाम से तीन दिन का पर्व मनाया जाता हैं।

गुजरात और राजस्थान : राजस्थान में इस पर्व को उत्तरायण के रूप में बनाते हैं इस दिन पतंग उत्सव का आयोजन किया जाता हैं।

सभी दोस्त मिलकर छत पर पतंग उड़ाते हैं और सभी दोस्त और परिवार के सदस्य मिलकर इस त्यौहार का आनंद उठाते हैं।

तमिलनाडु : तमिलनाडु में किसानों का यह प्रमुख पर्व पोंगल के नाम से मनाया जाता हैं सभी किसान भगवान के सामने नई फसल को प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं।

इस दिन सभी नए कपड़े पहन कर खुशी मनाते हैं एवं दाल-चावल की खिचड़ी बना कर सभी प्रेम से खाते हैं।

पंजाब : पंजाब में संक्रांति का त्यौहार पूर्व लोहड़ी के रूप में मनाया जाता हैं। इस दिन पंजाबी लोग धूमधाम से समारोह का आयोजन करते हैं, नाच गान किया जाता हैं।

इस दिन शादी का प्रस्ताव देकर पूरा गांव या शहर इकट्ठा होकर जश्न मनाते हैं एवं इस दिन नए अनाज बोए जाते हैं।

कुम्भ का मेला मकर संक्रांति के समय क्यों लगता हैं

कुम्भ के मेले की परम्परा आदि शंकराचार्य जी ने स्थापित की थी कुम्भ का मेरा प्रयागराज (इलाहाबाद) में मकर संक्रांति के समय में हर 12 साल में एक बार महान कुम्भ का मेला आयोजन होता हैं।

इस महान कुम्भ के मेले में लगभग करोड़ों लोग शामिल होते हैं इसमें हिमालय पर घोल तपस्या करने वाले साधुओं से लेकर हजारों विदेशी यात्री प्रयागराज में गंगा और यमुना नदी के संगम पर भगवान सूर्य देवता की पूजा करते हैं।

मकर संक्रांति को लेकर आपके मन में आने वाले प्रश्न

1. मकर संक्रांति के दिन कौन से भगवान की पूजा की जाती हैं?

Ans. मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य देवता की पूजा की जाती हैं।

2. बिहार में मकर संक्रांति को किस नाम से जाना जाता हैं?

Ans. बिहार में मकर संक्रांति को खिचड़ी नाम से जाना जाता हैं।

3. बंगाल में प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के दिन किस स्थान पर विशाल मेले का आयोजन होता हैं?

Ans. बंगाल में प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के दिन गंगासागर पर विशाल मेले का आयोजन होता हैं।

4. तमिलनाडु में मकर संक्रांति के त्यौहार को पोंगल के रूप में कितने दिन तक मनाते हैं?

Ans. तमिलनाडु में मकर संक्रांति के त्यौहार को पोंगल के रूप में 4 दिन तक मनाते हैं।

5. असम में मकर संक्रांति को किस नाम से मनाते हैं?

Ans. असम में मकर संक्रांति को माघ-बिहू अथवा भोगाली-बिहू के नाम से मनाते हैं।

6. मकर संक्रांति के दिन क्या खाना चाहिए?

Ans. मकर संक्रांति के दिन सभी अपने घरों में तिल और गुड़ से बनी मिठाई एवं तिल के लड्डू और दाल, चावल, घी से बनी खिचड़ी का सेवन करते हैं।

7. मकर संक्रांति के दिन दान पुण्य क्यों करना चाहिए?

Ans. मकर संक्रांति के दिन दान-पुण्य करना शुभ माना जाता हैं इस दिन दान करने से 100 गुना पुण्य प्राप्त होता हैं इसलिए लोग इस दिन गरीबों और जरूरतमन्दों को तिल-गुड़ और कम्बल एवं पैसों का दान करते हैं।

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इस पेज पर आपने मकर संक्रांति क्या हैं, मकर संक्रांति कब मनाई जाती हैं, मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं, मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व, संक्रांति कैसे मनाए समस्त जानकारी विस्तार से पढ़ी।

उम्मीद करती हूं कि आपको मकर संक्रांति की यह पोस्ट पसंद आयी होंगी।

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