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यकृत

यकृत (liver)

यकृत शरीर की सबसे बड़ी एवं व्यस्त ग्रंथि हैं जो कि हल्के पीले रंग पित्त रस का निर्माण करती हैं यह भोजन में ली गई वसा के अपघटन में पाचन क्रिया को उत्प्रेरक एवं तेज करने का कार्य करता हैं।

इसका एकत्रीकरण पित्ताशय में होता हैं यकृत अतिरिक्त वसा को प्रोटीन में परिवर्तित करता हैं एवं अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में परिवर्तित करने का भी कार्य करता हैं। जो कि आवश्यकता पढ़ने पर शरीर को प्रदान किए जाते है।

मात्रक

किसी वस्तु या पिण्ड के मानक मापन की इकाई को मात्रक कहाँ हैं। मूल मात्रक, मात्रकों में वे मात्रक हैं जो अन्य मात्रकों से स्वतंत्र होते हैं अर्थात उनको एक-दूसरे से अथवा आपस में बदला नहीं जा सकता हैं।
उदाहरण:- लम्बाई, समय और द्रव्यमान के लिए क्रमशः मीटर, सेकण्ड और किलोग्राम का प्रयोग किया जाता हैं।

मात्रक
ग्रंथि

ग्रंथि (gland)

कोशिकाओं के व्यवस्थित समूह को ही ऊतक कहाँ जाता हैं यही ऊतक मिलकर अंग का निर्माण करते हैं कुछ ऊतक या अंग विशेष प्रकार कर रसायन एन्जाइम, हार्मोन का निर्माण करते हैं उन्हें ग्रंथि कहा जाता हैं। ग्रंथि शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रण करने हेतु एन्जाइम का निर्माण करती हैं।

मानव श्वसन तंत्र

मानव श्वसन में वायु फेफड़ों तक एवं फेफड़ों से बाहर जिस मार्ग से होकर गुजरती हैं उस मार्ग में उपस्थित सभी तंत्रों को मिलाकर ही श्वसन तंत्र कहाँ जाता हैं।
श्वसन
Geneticism

गुणसूत्र (Cromosom)

जीन्स को वहन करने वाली वे वैयक्तिक जीवद्रव्य इकाइयां जो नियमित रूप से उत्तरोत्तर कोशिका विभाजनों द्वारा गुणन करती हैं तथा अपने व्यक्तिगत, आकारिकी, एवं कार्य को बनाये रखती हैं गुणसूत्र कहलाती हैं।

मानव कंकाल तंत्र

मानव शरीर का ढाँचा हड्डियों का बना होता है। सभी हड्डियाँ एक-दूसरे से जुड़ी रहती है। हड्डियों के ऊपर मांसपेशियाँ होती हैं जिनकी सहायता से हड्डियों के जोड़ों को हिलाया-डुलाया जाता है। हड्डियाँ एवं मांसपेशियाँ शरीर के आन्तरिक अंगों की सुरक्षा करती है। मनुष्य के शरीर में 206 हड्डियाँ पायी जाती हैं। मानव शरीर का ढाँचा बनाने वाले अंग को ककाल तंत्र (skeleton system) कहते हैं।
KANKAL TANTRA
Teeth in hindi

दांत (Teeth)

मुखगुहा के ऊपरी तथा निचले दोनों जबड़ो में दाँतो की एक-एक पंक्ति पायी जाती हैं। मनुष्य के एक जबड़े में 16 दाँत और दूसरे जबड़े में 16 दाँत तथा कुल 32 दाँत होते हैं।  जबड़े के प्रत्येक ओर दो कृन्तक (Incisors) एक रदनक (Canine), दो अग्र चवर्णक (Premolars) तथा तीन चवर्णक (Molars) दाँत पाए जाते हैं।

मस्तिष्क (Brain)

मनुष्य का मस्तिष्क अस्थियों के खोल क्रेनियम में बंद रहता हैं जो इसे बाहरी आघातों से बचाता हैं। मस्तिष्क केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का मुख्य भाग माना जाता हैं। पूर्णरूप से विकसित मानवीय मस्तिष्क शरीर के भार का लगभग 1/50 होता है और कपाल गुहा (Cranial cavity) में अवस्थित रहता है।
मनुष्य का मस्तिष्क
हृदय

हृदय

यह हृदयावरण (Pericardium) नामक थैली में सुरक्षित रहता हैं इसका का कुल वजन 375 ग्राम होता हैं। यह शरीर का सबसे व्यस्त अंग हैं यह 1 मिनट में 72 बार धड़कता हैं तथा बच्चों का हृदय 1 मिनट में 102 बार धड़कता हैं जो कि 1 मिनिट में लगभग 500 मिली लीटर रक्त को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुंचाता हैं।

मानव जीभ

मुखगुहा के फर्श पर स्थित एक मोटी एवं मांसल रचना होती हैं।  जीभ के ऊपरी सतह पर कई छोटे-छोटे अंकुर होते हैं जिन्हें स्वाद कलियाँ कहते हैं इन्हीं स्वाद कलियों का मुख्य कार्य भोजन में उपस्थित स्वाद को पहचानना एवं लार को भोजन में मिलाना होता हैं। यह मांसपेशियों से मिलकर बनी होती हैं इसकी गति के कारण ही लाल ग्रंथियां सक्रिय होती हैं एवं भोजन को ग्रास नली में पहुँचाया जाता हैं।
जीभ की जानकारी

पाचन तंत्र

पाचन तंत्र एक यांत्रिक एवं रासायनिक अभिक्रिया हैं। जो कि भोजन से प्राप्त जटिल कार्बनिक यौगिकों को सरल कार्बनिक यौगिकों में तोड़ने का कार्य करती हैं। इस प्रक्रिया को पाचन प्रक्रिया कहाँ जाता हैं।

मानव आँख

आंख मनुष्य का ऐसा अंग है जो प्रकाश के लिए सबसे संवेदनशील हैं। मनुष्य की आँख प्रकाश को संसूचित करके तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा विद्युत रासायनिक संवेदो में बदलने का कार्य करती है जिनकी न्यूनतम देखने की क्षमता 25 सेंटीमीटर एवं अधिकतम देखने की क्षमता अनन्त होती हैं।
manushya ki aankh eye
विटामिन की परिभाषा

विटामिन

विटामिन की खोज 1911 ई. में एफ.जी. हाफकिन्स ने की थी परन्तु विटामिन नाम फंक नामक विज्ञानिक ने दिया था। यह एक प्रकार का कार्बनिक यौगिक हैं इनसे कोई कैलोरी प्राप्त नहीं होती परंतु यह शरीर के उपापचयी में रासायनिक प्रतिक्रियाओ के नियम के लिए अत्यंत आवश्यक हैं इसे रक्षात्मक पदार्थ भी कहा जाता हैं। इनसे शरीर को किसी भी प्रकार की ऊर्जा प्राप्त नहीं होती हैं और ना ही शरीर को कोशिकाओं में इनका संश्लेषण होता हैं।

धमनी और शिरा

धमनियाँ  एक प्रकार की रक्त वाहिका है जो सम्पूर्ण शरीर मे शुद्ध रक्त को प्रवाहित करती है जहाँ रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है उसे शुद्ध रक्त माना जाता है। धमनिया शरीर की गहराई वाले भागों में उपस्थित होती हैं इनमें शुद्व रक्त प्रवाहित होता हैं। यह शरीर की ऊपरी भागों में पाई जाती हैं जो कि रक्त को शरीर के विभिन्न अंको से हृदय तक पहुँचती हैं इनमें अशुद्ध रक्त प्रभावित होता हैं। जिस रक्त में कार्बनडाइआक्साइड की मात्रा अधिक एवं ऑक्सीजन की मात्रा कम होती हैं वह अशुद्ध रक्त कहलाता हैं।
धमनी और शिरा

रक्त

रक्त एक तरल संयोजी ऊतक होता हैं उसमें उपस्थित हीमोग्लोबिन के कारण इसका रंग लाल होता हैं। यह एक चिपचिपा क्षारीय पदार्थ है जिसका PH मान 7.4 होता हैं। रक्त का निर्माण अस्थि मज्जा में होता हैं किंतु गर्वावस्था के समय शिशु के शरीर में रक्त का निर्माण यकृत में होता हैं।